
आंवला नवमी पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए करें ये खास उपाय
हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी या अक्षय नवमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन आंवले के वृक्ष, माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य कभी नष्ट नहीं होता, इसलिए इसे ‘अक्षय नवमी’ कहा जाता है।
Amla Navami 2025 Date: हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी या अक्षय नवमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन आंवले के वृक्ष, माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य कभी नष्ट नहीं होता, इसलिए इसे ‘अक्षय नवमी’ कहा जाता है। आंवला नवमी का दिन देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए सबसे शुभ माना गया है। आंवले का पेड़ स्वयं लक्ष्मी का स्थान बताया गया है। इस पेड़ के नीचे पूजा करने से न केवल धन की वृद्धि होती है, बल्कि घर में स्थायी सुख-समृद्धि भी बनी रहती है। कहा जाता है कि आंवला भगवान विष्णु का प्रिय वृक्ष है और इस दिन जो व्यक्ति श्रद्धा से इसका पूजन करता है, उसे विष्णु-लक्ष्मी दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन कुछ उपाय करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं, मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए क्या करें-

आंवले के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं- पीतल या मिट्टी के दीपक में गाय के घी से दीप जलाएं और “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः” मंत्र का 11 बार जाप करें। इससे घर में धन और सौभाग्य की वृद्धि होती है।
आंवले के वृक्ष के नीचे श्रीसूक्त का पाठ करें- आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर श्रीसूक्त का पाठ करें। ऐसा करने से लक्ष्मी माता प्रसन्न होकर घर में स्थायी निवास करती हैं।
लक्ष्मीजी को सफेद पुष्प और चावल अर्पित करें- लक्ष्मीजी को सफेद फूल, अक्षत और हल्दी अर्पित करें। यह उपाय दरिद्रता को दूर करता है।
7 आंवले मंदिर में दान करें- उपाय को करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। इसके साथ ही ऐसा करने से शरीर रोगों से मुक्त होता है और आयु में वृद्धि लाता है।
आंवले का सेवन करें या उसका जल पिएं- आंवले को अमृत समान माना गया है। यह शरीर से नकारात्मकता और पापों का क्षय करता है।
गरीबों को भोजन या वस्त्र दान करें- इस दिन का दान अक्षय फल देता है, जो कभी नष्ट नहीं होता हैं।
क्यों कहते हैं इसे ‘अक्षय नवमी’- ‘अक्षय’ का अर्थ होता है- जो कभी क्षय न हो। शास्त्र कहते हैं कि इस दिन किया गया कोई भी पुण्य कार्य, व्रत, जप या दान जन्मों-जन्मों तक फल देता है।इसलिए आंवला नवमी को धन, सौभाग्य और सुख-समृद्धि प्राप्ति का श्रेष्ठ दिन माना गया है।





