Amavasya kab Hai: चैत्र अमावस्या कब है, 18 या 19 मार्च, पितरों के लिए तर्पण कब करें, नवरात्र की प्रतिपदा तिथि कब?
chaitra amavasya kab hai :पितरों के लिए तर्पण करने के लिए यह शुभ दिन है। इस दिन सुबह स्नान करें, लौटे में जलभरकर काले तिल डालकर पितरों को अर्पित करें।

इस साल अमावस्या तिथि को लेकर लोगों में कंफ्यूजन बना हुआ है। दरअसल इस बार अमावस्या तिथि दो दिन 18 और 19 मार्च को है। अब लोगों में सवाल है कि अमावस्या दो दिन है, तो चैत्र नवरात्रि 19 से कैसे शुरू हो रहे हैं। यहां हम आपकी कंफ्यूजन को दूर कर रहे हैं। इस साल अमावस्या तिथि 18 तारीख की सुबह 8.25 बजे से लग रही है। अमावस्या तिथि 19 मार्च की सुबह 6.52 तक रहेगी। ऐसे में अमावस्या दो दिन मिल रही है। 19 तारीख को 6.52 मिनट के बाद प्रतिपदा लग जाएगी, लेकिन उदया तिथि की प्रतिपदा नहीं रहेगी। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को चैत्र नवरात्रि पर कलश स्थापना होती है। इसलिए नवरात्रि की शुरुआत भी इसी दिन से है। 19 मार्च से लेकर चैत्र नवरात्रि 27 मार्च तक रहेगें। इन दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है।
अब दो दिन अमावस्या है तो 18 और 19 मार्च को क्या करें
आपको बता दें कि अगर आप अमावस्या पर पितरों के लिए धूपदान करते हैं, तो आप 18 मार्च की दोपहर में कर सकते हैं। अगले दिन 19 मार्च को नहीं हो पाएगा, क्योंकि सुबह सात बजे से पहले ही तिथि समाप्त हो जाएगी। 19 मार्च को आप स्नान और दान कर सकते हैं। लेकिन अमावस्या से जुड़े पितरों के काम 18 मार्च को ही होंगे। 19 मार्च को नौ देवियों की कलश स्थापना होगी। इस दिन पंचक भी है।
अमावस्या तिथि पर क्या करें
पितरों के लिए तर्पण करने के लिए यह शुभ दिन है। इस दिन सुबह स्नान करें, लौटे में जलभरकर काले तिल डालकर पितरों को अर्पित करें। गाय के गोबर का कंड़ा जलाकर इस पर खीर पूड़ी रखें। कौवे, गाय, कुत्ते और गरीबों को भोजन कराएं। पीपल के पेड़ की भी पूजा भी करें। दीपक जलाएं और सात परिक्रमा करें।
यहां पढ़ें अमावस्या के बाद शुरु होंगे चैत्र नवरात्रि
18 मार्च (बुधवार) : चैत्र कृष्ण चतुर्दशी तिथि प्रातः 08.26 मिनट तक पश्चात अमावस्या तिथि। पितृकार्येषु अमावस। पंचक।
19 मार्च (गुरुवार) : चैत्र कृष्ण अमावस्या तिथि प्रातः 06.53 मिनट तक पश्चात प्रतिपदा रात्रि 04.53 मिनट तक तदनंतर द्वितीया तिथि। चैत्र अमावस (प्रातः 06.53 मिनट तक)। वि. संवत् 2082 पूर्ण। रौद्र नाम नव वि. संवत् 2083 प्रारंभ। चैत्र (वासंत) नवरात्र प्रारंभ। घटस्थापन (अभिजित मुहूर्त में)। ध्वजारोहण। तैलाभ्यंग। श्री दुर्गा पूजा। गुड़ी पड़वा। पंचक। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि का क्षय।
20 मार्च (शुक्रवार) : चैत्र शुक्ल द्वितीया तिथि नवरात्र व्रत रात्रि, 02.31 मिनट तक। चंद्रदर्शन। पंचक समाप्त रात्रि 02.28 मिनट। उत्तर गोल प्रारंभ।
21 मार्च (शनिवार) : चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि नवरात्र व्रत, रात्रि 11.57 मिनट तक। श्री मत्स्य जयंती। गणगौरी तृतीया। शव्वाल (मु.) मास प्रारंभ। गंडमूल रात्रि 12.38 मिनट तक।
22 मार्च (रविवार) : चैत्र शुक्ल चतुर्थी तिथि नवरात्र व्रत, रात्रि 09.17 मिनट तक। शक चैत्र एवं संवत् 1948 प्रारंभ। दमनक चतुर्थी।
23 मार्च (सोमवार) : चैत्र शुक्ल पंचमी तिथि सायं 06.39 मिनट तक। श्री (लक्ष्मी) पंचमी। -पं. ऋभुकांत गोस्वामी
लेखक के बारे में
Anuradha Pandeyशार्ट बायो
अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।
परिचय और अनुभव
अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।
शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर सफर
अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।
विजन
अनुराधा का उद्देश्य एस्ट्रोलॉजी (धर्म) के माध्यम से राशियों पर ग्रहों के प्रभाव, कुंडली, ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र, भाव और दशा-विश्लेषण को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना है। ग्रहों का व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर क्या असर पड़ता है, इन जटिल ज्योतिषीय अवधारणाओं को आम पाठकों के लिए सुलभ बनाना उनकी प्राथमिकता है। इसके साथ ही टीम का कुशल मार्गदर्शन और कंटेंट की क्वालिटी सुनिश्चित करना भी उनके विजन का अहम हिस्सा है।
विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र
कुंडली एवं ग्रह-दशा के माध्यम से राशियों पर ग्रहों का प्रभाव, नक्षत्रों का आम लोगों की जिंदगी पर असर और इससे जुड़ी एक्सपर्ट से वेरिफाइड सलाह पाठकों तक पहुंचाना उनका प्रमुख कार्य क्षेत्र है। वे धार्मिक और समसामयिक विषयों पर गहराई से अध्ययन कर तथ्यपरक जानकारी प्रस्तुत करती हैं। उनका अनुभव सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यावहारिक और निरंतर शोध पर आधारित है। जन्म कुंडली विश्लेषण, ग्रह-नक्षत्रों की चाल और वैदिक ज्योतिष पर उनकी गहरी पकड़ उनके लेखों को विश्वसनीय बनाती है। खबरों की दुनिया से इतर, अनुराधा जी को किताबें पढ़ना पसंद है, जो उनके शोधपरक लेखन को और समृद्ध बनाता है।
विशेषज्ञता
कुंडली एवं ग्रह-दशा
ग्रह नक्षत्रों का लोगों पर असर
धर्म एवं भारतीय परंपराएं
व्रत-त्योहारों का महत्व
ग्रहों की स्थिति और राशियां


