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अक्षय नवमी पर कैसे करें आंवले के पेड़ की पूजा, नोट कर लें शुभ मुहूर्त

अक्षय नवमी पर कैसे करें आंवले के पेड़ की पूजा, नोट कर लें शुभ मुहूर्त

संक्षेप:

Akshaya Navami 2025 Muhurat: माना जाता है कि अक्षय नवमी पर मां लक्ष्मी ने पृथ्वी लोक में भगवान विष्णु एवं शिवजी की पूजा आंवले के रूप में की थी और इसी पेड़ के नीचे बैठकर भोजन ग्रहण किया था। 

Oct 29, 2025 11:44 pm ISTShrishti Chaubey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Akshaya Navami 2025 Muhurat: हर साल कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन अक्षय नवमी का व्रत रखा जाता है। इस दिन स्नान कर आंवला वृक्ष की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, नवमी तिथि 30 अक्टूबर को 10:06 ए एम पर प्रारंभ होगी, जिसका समापन 31 अक्टूबर को 10:03 बजे तक होगा। माना जाता है कि अक्षय नवमी पर मां लक्ष्मी ने पृथ्वी लोक में भगवान विष्णु एवं शिवजी की पूजा आंवले के रूप में की थी और इसी पेड़ के नीचे बैठकर भोजन ग्रहण किया था। यह भी मान्यता है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने कंस वध से पहले तीन वनों की परिक्रमा की थी। आइए जानते हैं अक्षय नवमी की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त-

अक्षय नवमी पर कैसे करें आंवले के पेड़ की पूजा

नवमी के दिन सुबह में स्नान ध्यान कर आंवला वृक्ष के नीचे पूरब दिशा में मुंह करके बैठना चाहिए। इसके बाद वृक्ष की जड़ों को दूध से सींचकर उसके तने पर कच्चे सूत का धागा लपेटा जाता है। फिर रोली, चावल, धूप, दीप से वृक्ष की पूजा की जाती है। आंवला के वृक्ष की कपूर व घी के दीपक से आरती करें। आंवला वृक्ष की 108 परिक्रमाएं करके ही भोजन किया जाता है।

उपाय- आंवला के वृक्ष के नीचे ब्राह्मण, गरीब व जरूरतमंद लोगों को भोजन भी कराया जाता है। ऐसा करने से माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्ति होती है और परिवार के सदस्यों की उन्नति भी होती है।

नोट कर लें शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, इस दिन पूजा का शुभ समय - 06:32 ए एम से 10:03 ए एम तक रहेगा।

आंवला नवमी का महात्मय

एक युग में किसी वैश्य की पत्नी को पुत्र रत्न की प्राप्ति नहीं हो रही थी। अपनी पड़ोसन के कहे अनुसार उसने एक बच्चे की बलि भैरव देव को दे दी। इसका फल उसे उल्टा मिला। महिला कुष्ठ की रोगी हो गई। इसका वह पश्चाताप करने लगी और रोग मुक्त होने के लिए गंगा की शरण में गई। तब गंगा ने उसे कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला वृक्ष की पूजा कर आंवले के सेवन करने की सलाह दी थी। ऐसा करने से वह रोगमुक्त हो गई और पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। तभी से इस व्रत को करने का प्रचलन बढ़ा।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Shrishti Chaubey

लेखक के बारे में

Shrishti Chaubey
लाइव हिन्दुस्तान में बतौर कॉन्टेंट प्रोड्यूसर काम कर रही सृष्टि चौबे को पत्रकारिता में 2 साल से ज्यादा का अनुभव है। सृष्टि को एस्ट्रोलॉजी से जुड़े विषयों पर लिखने की अच्छी समझ है। इसके अलावा वे एंटरटेनमेंट और हेल्थ बीट पर भी काम कर चुकी हैं। सृष्टि ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, हस्तरेखा, फेंगशुई और वास्तु पर अच्छी जानकारी रखती हैं। खबर लिखने के साथ-साथ इन्हें वीडियो कॉन्टेंट और रिपोर्टिंग में भी काफी रुचि है। सृष्टि ने जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। अपने कॉलेज के दिनों में इन्होंने डाटा स्टोरी भी लिखी है। साथ ही फैक्ट चेकिंग की अच्छी समझ रखती हैं। और पढ़ें
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