
अखुरथ संकष्टी व्रत आज, नोट कर लें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त
Akhuratha Sankashti Chaturthi Vrat: हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। यह दिन गणेशजी की पूजा और व्रत के लिए बेहद शुभ माना जाता है। पौष माह शुरू हो चुका है, और इसी माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को अखुरथ संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है।
हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। यह दिन गणेशजी की पूजा और व्रत के लिए बेहद शुभ माना जाता है। पौष माह शुरू हो चुका है, और इसी माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को अखुरथ संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गणेशजी की मन से पूजा करने पर जीवन की परेशानियां खत्म होती हैं और घर में सुख-शांति का आगमन होता है। बप्पा की कृपा पाने के लिए इस दिन पूरी श्रद्धा और सही विधि से पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस साल अखुरथ संकष्टी चतुर्थी व्रत 7 दिसंबर यानी कल है। आइए जानते हैं, अखुरथ संकष्टी चतुर्थी व्रत पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और उपाय-
शुभ मुहूर्त-
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - दिसम्बर 07, 2025 को 06:24 पी एम बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त - दिसम्बर 08, 2025 को 04:03 पी एम बजे
संकष्टी के दिन चन्द्रोदय - 07:55 पी एम
ब्रह्म मुहूर्त 05:12 ए एम से 06:06 ए एम
अभिजित मुहूर्त 11:52 ए एम से 12:33 पी एम
विजय मुहूर्त 01:56 पी एम से 02:38 पी एम
गोधूलि मुहूर्त 05:22 पी एम से 05:49 पी एम
अमृत काल 01:59 ए एम, दिसम्बर 08 से 03:27 ए एम, दिसम्बर 08
निशिता मुहूर्त 11:46 पी एम से 12:40 ए एम, दिसम्बर 08
रवि पुष्य योग 04:11 ए एम, दिसम्बर 08 से 07:02 ए एम, दिसम्बर 08
सर्वार्थ सिद्धि योग 04:11 ए एम, दिसम्बर 08 से 07:02 ए एम, दिसम्बर 08
पूजा विधि:
घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें।
गणपति भगवान का गंगा जल से अभिषेक करें।
भगवान गणेश को पुष्प अर्पित करें।
भगवान गणेश को दूर्वा घास भी अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दूर्वा घास चढ़ाने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं।
भगवान गणेश को सिंदूर लगाएं।
भगवान गणेश का ध्यान करें।
गणेश जी को भोग भी लगाएं। आप गणेश जी को मोदक या लड्डुओं का भोग भी लगा सकते हैं।
इस व्रत में चांद की पूजा का भी महत्व होता है।
शाम को चांद के दर्शन करने के बाद ही व्रत खोलें।
भगवान गणेश की आरती जरूर करें।
पूजन सामग्री की लिस्ट
भगवान गणेश की प्रतिमा, लाल कपड़ा, दूर्वा, जनेऊ, कलश, नारियल, पंचामृत, पंचमेवा, गंगाजल, रोली, मौली लाल।





