अजा एकादशी की पूजा कैसे करें? नोट करें शुभ मुहूर्त, बस ना करें ये गलतियां

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7 दिसंबर को अजा एकादशी की पूजा है। इस खास मौके पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा होती है। जानें इस दिन किन गलतियों को करने से बचना है? साथ में जानें पूजा की आसान विधि। 

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सनातन धर्म में एकादशी की पूजा को लेकर काफी मान्यता है। भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी की पूजा को बहुत ही खास माना जाता है। इस एकादशी का नाम अजा एकादशी है। धार्मिक मान्यता है कि इस इस दिन सच्चे मन से व्रत रखा जाए और विधि विधान से सारी पूजा की जाए तो पापों से मुक्ति मिलती है। इस खास दिन पर भगवान विष्णु के साथ-साथ मां लक्ष्मी की भी पूजा होती है।

अजा एकादशी पर व्रत रखने और पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आता है और पैसों से जुड़ी दिक्कत दूर होती है। इस एकादशी की कथा के अनुसार जब राजा हरिशचंद्र ने इस व्रत को रखा था तो उन्हें अपना खोया हुआ सब कुछ मिल गया था। अगर आप भी ये व्रत रखना चाहते हैं तो जानें इस व्रत का शुभ मुहूर्त और तारीख क्या है। साथ में जानें कि इस अजा एकादशी की पूजा कैसे की जाती है और भी जानें कि इस दौरान किन गलतियों से आपको बचना है?

अजा एकादशी का शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचाग के हिसाब से कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर को शुरू हो जाएगी। तिथि के शुरु होने का समय शाम को 7 बजकर 29 मिनट है। वहीं एकादशी तिथि का समापन अगले दिन 7 सितंबर को होगा। तिथि के समापन का समय शाम को 5 बजकर 3 मिनट होगा। ऐसे में अजा एकादसी का व्रत 7 तारीख को रखा जाएगा। बात करें व्रत के पारण की तो इसे 8 सितंबर के दिन करना है। पारण के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 53 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 4 मिनट होगा।

ऐसे करें अजा एकादशी की पूजा

अजा एकादशी की सुबह उठकर स्नान करें और पीले रंग के कपड़े पहनें। बस ध्यान रखें की नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिला लें। पूजा शुरू करने से पहले संकल्प लें। इसके बाद मंदिर की अच्छे से सफाई कर लें। एक चौकी लें और उस पर पीला कपड़ा बिछा दें। अब इस पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की तस्वीर या फिर मूर्ति को रखें। पीले फूल, चंदन और तुलसी दल को अर्पित करें। इसके बाद पंजीरी, केसर खीर, केले और मिठाई का भोग लगाएं। दीया और धूप जलाएं। इसके बाद अजा एकादशी की व्रत कथा पढ़ लें। आखिरी में आरती के साथ पूजा पूरी करें।

अजा एकादशी पर ना करें ये गलतियां

1. एकादशी के दिन चावल ना खाएं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन चावल खाने से बचना चाहिए।

2. एकादशी पर भूलकर भी तुलसी नहीं तोड़ना चाहिए। पूजा के लिए एक दिन पहले तुलसी के पत्ते तोड़ लें।

3. व्रत के दौरान गुस्सा करने से बचें और ना ही किसी के बारे में गलत कहें।

4. एकादशी पर प्याज लहसुन, मांस, शराब और बाकी तामसिक खाने से दूर रहें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

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