दशमी का संयम और तुलसी का महत्व, अजा एकादशी व्रत के ये हैं 6 प्रमुख नियम, जानें पारण का समय भी
Aja Ekadashi Fast Rules 2026: अजा एकादशी व्रत 7 सितंबर को है। एकादशी व्रत में कुछ नियमों का पालन अनिवार्य माना गया है। आइए जानते हैं कि एकादशी व्रत के प्रमुख नियम।

Aja Ekadashi Fast Rules 2026: हिंदू धर्म में अजा एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी व्रत किया जाता है। इस साल अजा एकादशी 7 सितंबर 2026, सोमवार को है और व्रत का पारण 8 सितंबर, मंगलवार को किया जाएगा। एकादशी व्रत में भगवान विष्णु और तुलसी पूजन का विशेष महत्व है। तुलसी को हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी-नारायण की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है। एकादशी व्रत में कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। मान्यता है कि इन बातों का ध्यान रखने से भगवान विष्णु की कृपा से पापों से मुक्ति मिलती है और वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य मिलता है। जानें अजा एकादशी व्रत के प्रमुख 6 नियम:
1.दशमी का संयम:
एकादशी व्रत से एक दिन पहले यानी दशमी तिथि से ही नियम संयम मान्य हो जाते हैं। दशमी की शाम को सूर्यास्त के साथ अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए और सात्विक ही रहना चाहिए।
2. संकल्प और स्नान:
एकादशी व्रत में संकल्प और स्वच्छता अनिवार्य है। एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र पहनना चाहिए। भगवान श्रीहरि की मूर्ति या प्रतिमा के सामने व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
3. व्रत में पूजन सामग्री का उपयोग:
एकादशी व्रत में भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, पीले फूल, दीप और मौसमी फल अर्पित करने चाहिए। श्रीहरि की पूजा में पीले रंग का प्रयोग अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जाता है।
4.तुलसी का महत्व:
भगवान विष्णु को एकादशी के दिन लगाए जाने वाले भोग में तुलसी का पत्ता जरूर शामिल करना चाहिए। मान्यता है कि तुलसी दल के बिना विष्णु पूजन अधूरा माना जाता है।
5.मंत्र का जाप:
एकादशी के पूजन में मंत्रों का विषेष महत्व होता है। पूजा के दौरान ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का निरतंर जप करें। अजा एकादशी व्रत का पाठ करें और भगवान की आरती उतारें।
6.रात्रि जागरण:
एकादशी को रात के समय संभव हो रात्रि जागरण करना चाहिए। मान्यता है कि एकादशी के दिन कीर्तन और भजन करने से जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।
अजा एकादशी व्रत पारण का समय:
अजा एकादशी व्रत का पारण 8 सितंबर 2026 को किया जाएगा। व्रत पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 07 बजकर 17 मिनट से सुबह 09 बजकर 53 मिनट तक है।
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में क्यों जरूरी:
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में करना अनिवार्य होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, एकादशी व्रत खोलना द्वादशी तिथि में नहीं करना पाप के समान होता है। अगर द्वादशी तिथि सूर्योदय से पूर्व समाप्त हो जाए तो व्रत का पारण सूर्योदय के बाद करना चाहिए।


