Aja Ekadashi 2026: एकादशी के दिन जरूर करें ये 4 काम, बिना इसके अधूरा है व्रत
Aja Ekadashi 2026: क्या आप जानते हैं कि इन 4 कामों के बिना अजा एकादशी का व्रत अधूरा माना जाता है? जानिए भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और पाप मुक्ति के सटीक उपाय।

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी इस बार 7 सितंबर को रखी जाएगी। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 6 सितंबर की शाम से शुरू होकर 7 सितंबर की शाम तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत 7 सितंबर को माना जाएगा। भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत में चार काम विशेष रूप से जरूरी माने गए हैं। इनके बिना व्रत अधूरा रह जाता है।
अजा एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अजा एकादशी समस्त पापों का नाश करने वाली और अश्वमेध यज्ञ के समान फल देने वाली है। इस व्रत को विधि से करने वाला व्यक्ति सुख भोगकर अंत में विष्णुलोक को जाता है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की यह एकादशी भक्ति, दान और संयम का विशेष अवसर है। घरों में सुबह से पूजा की तैयारी होती है और कई भक्त मंदिर जाकर विष्णु दर्शन करते हैं। सच्चे मन से किया गया यह व्रत स्वास्थ्य, शांति और आध्यात्मिक उन्नति देता है।
व्रत का संकल्प जरूर लें
सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल से शुद्ध करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें। शास्त्रों में कहा गया है कि संकल्प के बिना पूजा और व्रत का पुण्य अधूरा रहता है। संकल्प में स्वास्थ्य, धन, संतान या मोक्ष जैसे उद्देश्य स्पष्ट कहें। मान्यता है कि संकल्प से कार्य देवताओं तक पहुंचता है और भगवान उस उद्देश्य की पूर्ति करते हैं। बिना संकल्प के व्रत रखना अधूरा माना जाता है।
तुलसी के पास दीपदान करें
अजा एकादशी के दिन सूर्यास्त के बाद तुलसी जी के पास शुद्ध देसी घी का दीपक जरूर जलाएं। फिर तुलसी जी की सात बार परिक्रमा करें और तुलसी-लक्ष्मी मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है। मान्यता है कि एकादशी के दिन तुलसी जी के पास दीपदान करने से धन संबंधी अड़चनें कम होती हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। तुलसी विष्णु प्रिया हैं, इसलिए उनके पास दीपदान इस व्रत का अनिवार्य अंग माना जाता है।
व्रत कथा और विधिपूर्वक पूजन
पूजन के पश्चात अजा एकादशी की कथा पढ़ें या सुनें। निराहार व्रत रखकर शाम को फलाहार करें। अगले दिन ब्राह्मण को भोजन और दक्षिणा देने के बाद स्वयं भोजन करें। कथा सुनने से व्रत का फल पूरा होता है। बिना कथा और सही पारण के व्रत अधूरा रह जाता है, इसलिए विधि का पालन जरूरी है।
रात्रि जागरण का महत्व
स्कंदपुराण में एकादशी पर रात्रि जागरण का विशेष उल्लेख है। रात में पुराण पाठ, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प, चंदन और फल अर्पित कर विष्णु जी की पूजन करें। हर पहर आरती करें और इंद्रिय संयम में रखें। आलस छोड़कर जागरण करने वाले भक्त मोक्ष और श्रीहरि के धाम के अधिकारी माने गए हैं। जागरण में दीपदान गौदान के समान फल देता है।
अजा एकादशी पर संकल्प, तुलसी दीपदान, व्रत कथा और रात्रि जागरण - ये चार काम व्रत को पूरा करते हैं। सिर्फ भूखे रहने से व्रत की पूरी फलश्रुति नहीं मानी जाती है।


