नौतपा के बाद सूर्य जून में करेंगे आद्रा नक्षत्र गोचर, राहु का नक्षत्र है आद्रा, इस गोचर में क्या किया जाता है?

Anuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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बिहार में आद्रा नक्षत्र का बहुत अधिक महत्व है। आद्रा नक्षत्र का खास तौर पर स्वागत किया जाता है। सबसे पहले जानते हैं कि यह कौन से नंबर का नक्षत्र है और इस नक्षत्र का स्वामी कौन है। इसमें क्या करना चाहिए और इससे राशियों पर क्या असर होगा?

नौतपा के बाद सूर्य जून में करेंगे आद्रा नक्षत्र गोचर, राहु का नक्षत्र है आद्रा, इस गोचर में क्या किया जाता है?

बिहार में आद्रा नक्षत्र का बहुत अधिक महत्व है। आद्रा नक्षत्र का खास तौर पर स्वागत किया जाता है। सबसे पहले जानते हैं कि यह कौन से नंबर का नक्षत्र है और इस नक्षत्र का स्वामी कौन है। इसमें क्या करना चाहिए और इससे राशियों पर क्या असर होगा? आद्रा का अर्थ गीला अर्थात नमी होती है। सूर्य इस साल 22 जून को इस राशि में जाएंगे, इससे पहले 15 जून को सूर्य का गोचर मिथुन राशि में हो जाएगा। अभी नौतपा हैं जो 2 जून को खत्म हो जाएंगे। सूर्य के आद्रा नक्षत्र में जाने को क्यों खास माना जाता है। जब सूर्य इस नक्षत्र में जाते हैं तो मानसून का आगमन हो जाता है। आद्रा नक्षत्र का स्वामी राहु है। जब सूर्य इस नक्षत्र में जाते हैं तो परेशानियां भी आती हैं और सुख भी मिलता है। आर्द्रा नक्षत्र के लोग इमोशनली अपने आपको अच्छे से जानते हैं, वे अपने इमोशंस को अच्छे से जाहिर भी कर सकते हैं।

सूर्य के इस गोचर से किन राशियों के लिए लाभ?

सूर्य के इस गोचर से कई राशियों को लाभ होता है। खासकर सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं, इसलिए इस राशि के लोगों के लिए अच्छे योग बन रहे हैं। इस राशि के लोगों के लिए समय उत्तम है। आपको लाभ भी मिलेगा और आपके लिए पुराने प्रोजेक्ट अब लाभ की डील बनकर आएंगे। कन्या राशि के लिए भी आपके लिए लाभ के योग हैं। आपकी राशि को लाभ हो सकता है साथ ही करियर में आपके लिए सोने पर सुहागा समय है। आपकी अभी की कोशिशे आपके लिए आगे की जमीन तैयार कर देंगी। धनु राशि के लिए भी समय उत्तम है, आपमें आत्मविश्वास आएगा, सरकारी काम आपके जो बिगड़े हुए थे, उन्हें सरकारी सपोर्ट मिलेगा। आपके फैसले भी अच्छे होंगे और आपको लाभ मिलेगा।

क्या होता है जब सूर्य आद्रा नक्षत्र में जाते हैं?

जब सूर्य इस नक्षत्र में जाते हैं तो बिहार आदि जगहों पर खीर, दाल की पुरी की थाली का भोग लगाया जाता है। इस दिन से ही आम खाने की शुरुआत हो सकती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार आद्रा नक्षत्र में देवी देवताओं का पूजन किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए लोगों ने उन्हें इसका भोग लगाया था।

इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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लेखक के बारे में

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शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


परिचय और अनुभव

अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।


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