अधिकमास ज्येष्ठ में नहीं है निर्जला एकादशी, 3 साल में एक बार आती है पद्मा एकादशी
padmini ekadashi kab hai: अधिकमास में दो एकादशी हैं, लेकिन इसमें निर्जला एकादशी नहीं आती है। अधिकमास की पहली एकादशी पद्मिनी या कमला है और दूसरी पद्मा और कमला एकादशी है। यह एकादशी 3 साल में एक बार आती है।

इस साल अगर आप ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी की तारीख खोज रहे हैं तो रुक जाएं। इस साल निर्जला एकादशी मई में नहीं, जून में है। अभी अधिकमास लगा है, इसलिए अधिक मास में पद्मिनी या कमला एकादशी होती है। यह एकादशी बहुत खास है, क्योंकि ये 3 साल में एक बार आती है। इसका जिक्र पद्मपुराण में किया गया है, जिसमें श्रीकृष्ण ने कहा है कि अधिक मास आनेपर जो एकादशी होती है, वह कमला या पद्मिनी नामसे प्रसिद्ध है। वह तिथियों में उत्तम तिथि है। उसके ब्रत के प्रभावसे लक्ष्मी आपके पास आती है।
अधिकमास की एकादशी में तुलसी की पूजा
इस दिन क्या तुलसी की पूजा करो, उसके पास दीपदान करो। इस दिन उल्लेख किया गया है कि जो तुलसीदल पुष्पाणि ये यच्छन्ति जनार्दने। कार्तिक सकलें वत्स पापं जन्मार्जितं दहेत्॥ तुलसीके समीप लाख गुना और भगवान् विष्णुके निकट अनन्त गुना फल होता है। इस व्रत की कहानी में भी मां लक्ष्मी का जिक्र किया है। ऐसा कहा जाता है कि कमला एकादशीके ब्रत से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इस दिन दीपदान उत्तम माना जाता है। इसलिए पद्मिनी एकादशी का व्रत जरूर करें। सुबह व्रत का संकल्प लें और फिर व्रत की कथा पढ़ें। शाम को भगवान नारायण का कीतर्न करें। इस दिन के व्रत का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि अधिकमाल श्रीहरि का महीना है, इसलिए इस दिन मां लक्ष्मीके साथ श्रीहरि की पूजा फलदायी है। इस दिन तुलसी दल भगवान को अर्पित करने चाहिए। खाने में फलाहार लें, अगर व्रत नहीं रख रहे हैं तो भी चावल का सेवन ना करें। पीपल के पेड़ पर और तुलसी के पौधे के पास दीप जलाएं। इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ भी उत्तम माना गया है। ऐसा कहा गया है कि तुलसी की पूजा आपको श्रीहरि के पास ले जाती है। इस दिन लक्ष्मी जी के उपाय भी आपके जीवन में खुशहाली लाते हैं।
कब है एकादशी
हिंदू पंचांग के अनुसार, अधिकमास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 26 मई को सुबह 5 बजकर 11 मिनट से आरंभ होगी और इस तिथि का समापन 27 मई को सुबह 6 बजकर 22 मिनट होगा। दशमी तिथि वाली एकादशी र व्रत नहीं करते हैं, इसलिए उदया तिथि वाली एकादशी 27 मई को मनाई जाएगी। हालांकि एकादशी के नियमों को 26 मई से ही माना जाएगा।
अधिकमास की दूसरी एकादशी कब है?
अधिकमास की दूसरी एकादशी को कामदा या पद्मा एकादशी कहते हैं। ऐसा कहा जाता है। एकादशीको विधिपूर्वक पुष्प, धूप, नैवेद्य तथा फल आदिके द्वारा भगवान् पुरुषोत्तम की पूजा करनी चाहिए । व्रत करनेवाला वैष्णव पुरुष दशमी तिथि को कांस के बर्तन, उड़द, मसूर, चना, कोदो, साग, मधु, पराया अन्न, दो बार भोजन तथा मैथुन---इन दसों का परित्याग करे। इसी प्रकार एकादशी को जूआ, निद्रा, पान, दातुन, परायी निंदा, चुगली, चोरी, हिंसा, मैथुन, क्रोध ओर असत्यभाषण---इन ग्यारह दोषों को त्याग दे।
लेखक के बारे में
Anuradha Pandeyशार्ट बायो
अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।
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