अधिकमास की पद्मिनी एकादशी से पूर्णिमा तक ये 5 दिन हैं शुभ, 3 साल बाद आएगा ऐसा मौका

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

Adhikmaas: अधिकमास के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु हैं। इसलिए इस पूर्णिमा पर श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

Adhikmaas

अधिकमास वैसे तो बहुत पुण्यकारी माना जाता है। लेकिन भगवान विष्णु के दिए इस मास की तिथियां बहुत लाभकारी बताई गई हैं। एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक अधिकमास की इन तिथियों में स्नान दान और पूजा पाठ का बहुक अधिक फल मिलता है। इस दौरान भगवान श्रीहरि की अराधना और तुलसी की सेवा के साथ विभिन्न उपायों से लाभ मिलता है। इन तिथियों में आप अपने ग्रहों को सही कर सकते हैं। मां लक्ष्मी का भी आशीर्वाद पा सकते हैं। यहां हम बता रहे हैं आपको उन दिनों के बारें में कि इस दिन क्या करें।

अधिकमास की एकादशी भी खास

अधिकमास की एकादशी भी खास है, इसमें मां लक्ष्मी को प्रसन्न किया जाता है। अधिकमास ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि प्रातः 06.22 मिनट तक पश्चात द्वादशी तिथि रहेगी। भद्रा प्रातः 06.22 मिनट तक। इसे पुरुषोत्तम कमला एकादशी व्रत भी कहते हैं। इसकी कथा में भी जिक्र है कि इस एकादशी पर व्रत करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

अधिक मास प्रदोष व्रत, मिलेगी शिवजी की भी कृपा

भले ही यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित है, लेकिन ब्रह्मा विष्णु और महेश तीनो एक ही हैं। प्रदोष व्रत अधिकमास में और भी अधिक पुण्यकारी हो जाता है। इस दिन विष्णु जी के साथ भगवान शिव की कृपा भी मिलती है। प्रदोष व्रत उस दिन होता है, जिस दिन द्वादशी और त्रयोदशी का संयोग हो। प्रदोष व्रत और शिवरात्रि के दिन व्रत रखने से कुंडली के सभी ग्रह दोष खासकर शनि और राहु के दूर होते हैं। 28 मई (गुरुवार) को अधिक मास ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी तिथि प्रातः 07.58 मिनट तक पश्चात त्रयोदशी तिथि। प्रदोष व्रत।अधिक मास) ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी तिथि प्रातः 09.51 मिनट तक पश्चात चतुर्दशी तिथि।

अधिक मास की पूर्णिमा

अधिक मास की पूर्णिमा के दिन आप मां लक्ष्मी का लाभ पा सकते हैं। इस दिन श्रीहरि की पूजा करें, जहां श्रीहरि वहां मां लक्ष्मी इसलिए इस दिन मां लक्ष्मी के साथ श्रीहरि के पूजा करें। अधिकमास के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु हैं। इसलिए इस पूर्णिमा पर श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। पवित्र नदियों में स्नान और दान करें। इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनी जाती है। इस बार अधिकमास की पूर्णिमा शनिवार और रविवार दोनों दिन रहेगी। व्रत की पू्र्णिमा शनिवार को और स्नान दान की पूर्णिमा रविवार को रहेगी। इस दिन पितरों के लिए तर्पण और दान और दीपदान भी बहुत खास माना गया है।

कब है व्रत वाली पूर्णिमा और स्नानदान वाली पूर्णिमा

30 मई (शनिवार) : अधिक मास ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी तिथि प्रातः 11.58 मिनट तक पश्चात पूर्णिमा तिथि। भद्रा प्रातः 11.58 मिनट से रात्रि 01.06 मिनट तक। श्री सत्यनारायण व्रत। व्रत की पूर्णिमा। 31 मई (रविवार) : अधिक मास ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तिथि दोपहर 02.15 मिनट तक पश्चात प्रतिपदा तिथि। ज्येष्ठी योग। स्नान-दानादि की अधिक मासीय ज्येष्ठी पूर्णिमा। गंडमूल सायं 04.12 मिनट से।

-पं. ऋभुकांत गोस्वामी

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey

शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


परिचय और अनुभव

अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर सफर

अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।


विजन

अनुराधा का उद्देश्य एस्ट्रोलॉजी (धर्म) के माध्यम से राशियों पर ग्रहों के प्रभाव, कुंडली, ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र, भाव और दशा-विश्लेषण को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना है। ग्रहों का व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर क्या असर पड़ता है, इन जटिल ज्योतिषीय अवधारणाओं को आम पाठकों के लिए सुलभ बनाना उनकी प्राथमिकता है। इसके साथ ही टीम का कुशल मार्गदर्शन और कंटेंट की क्वालिटी सुनिश्चित करना भी उनके विजन का अहम हिस्सा है।


विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र

कुंडली एवं ग्रह-दशा के माध्यम से राशियों पर ग्रहों का प्रभाव, नक्षत्रों का आम लोगों की जिंदगी पर असर और इससे जुड़ी एक्सपर्ट से वेरिफाइड सलाह पाठकों तक पहुंचाना उनका प्रमुख कार्य क्षेत्र है। वे धार्मिक और समसामयिक विषयों पर गहराई से अध्ययन कर तथ्यपरक जानकारी प्रस्तुत करती हैं। उनका अनुभव सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यावहारिक और निरंतर शोध पर आधारित है। जन्म कुंडली विश्लेषण, ग्रह-नक्षत्रों की चाल और वैदिक ज्योतिष पर उनकी गहरी पकड़ उनके लेखों को विश्वसनीय बनाती है। खबरों की दुनिया से इतर, अनुराधा जी को किताबें पढ़ना पसंद है, जो उनके शोधपरक लेखन को और समृद्ध बनाता है।


विशेषज्ञता

कुंडली एवं ग्रह-दशा
ग्रह नक्षत्रों का लोगों पर असर
धर्म एवं भारतीय परंपराएं
व्रत-त्योहारों का महत्व
ग्रहों की स्थिति और राशियां

और पढ़ें
जानें Sawan 2026, Rashifal और Panchang की सटीक जानकारी। रोजाना पूजा-पाठ के लिए पढ़ें Shiv Chalisa, Shiv Aarti, Shiv Mahamrityunjaya Mantra, Shiv Stuti, Hanuman Chalisa और Bajrang Baan