Adhik Maas 2026: अगले महीने से लग रहा है अधिकमास, इस महीने में कौन से काम निषेध, विष्णुजी ने क्यों कहा पुरुषोत्तम मा
मलमास या अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहलाता हे, उसमें सूर्य की कोई संक्रान्ति नहीं होती प्रायः अढाई वर्ष यानी 32 के बाद यह मास आता है। जिस महीने में पूर्णिमा का योग न हो, वह प्रजा, पशु आदि के लिए अहितकर होता है ।

मलमास या अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहलाता हे, उसमें सूर्य की कोई संक्रान्ति नहीं होती प्रायः अढाई वर्ष यानी 32 के बाद यह मास आता है। जिस महीने में पूर्णिमा का योग न हो, वह प्रजा, पशु आदि के लिए अहितकर होता है । सूर्य ओर चन्द्रमा दोनों इस तिथि का भोग करते हैं । जिन तीस दिनो में संक्रमण न हो, वह सही नहीं है। अन्य किसी पुराण या धार्मिक ग्रन्थो में इनका कोई संकेत नहीं किया गया है । इस मास के बारे में पद्म पुराण और नारद पुराण के बारे में बताया गया है। जब अतिरिक्त महीने की उत्पत्ति हुई थी तो गंदा या अशुद्ध मास कहा जाने लगा। इसके बाद भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम पुरुषोत्तम नाम दिया। उन्होंने कहा कि यह मास अशुद्ध नहीं है। भगवान विष्णु ने कहा कि जो भी इस महीने में मेरी पूजा भक्ति, जप और तप करेगा उसे पूरे साल की पूजा से अधिक फल मिलेगा। इस मास में भागवत कथा का पाठ किया जाता है। भगवान कृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को इस महीने की महिमा सुनाई थी।
मलमास में किन कामों को नहीं किया जा सकता है
भविष्यपुराण में कहा गया है कि इस महीने में सभी तरह क प्रेत-क्रियाओं और सपिण्डन क्रियां को कर सकते हैं। लेकिन यक्ष, विवाहादि कार्य नहीं होते । इसमें तीर्थ स्नान, देव- दर्शन, व्रत-उपवास आदि, सीमन्तोन्नयन, ऋतुशान्ति, पुंसवन ओर पुत्र आदि का मुख-दर्शन किया जा सकता हे । इसी तरह शुक्रास्त में भी ये क्रिया नहीं जाती हैं। राज्याभिषेक भी मलमास में हो सकता है । व्रतारम्भ, प्रतिष्ठा, चूडाकर्म, उपनयन, मन्त्रोपासना, विवाह, नए ग्रह कानिर्माण, गृह-प्रवेश, गौ आदि का ग्रहण, आश्रमान्तर में प्रवेश, तीर्थयात्रा, अभिषेक-कर्म, वृषोत्सर्ग, कन्या का द्विरागमन और यज्ञ आदि इन सबका मलमास में निषेध है। इसी तरह शुक्रास्त में भी ये काम निषेध है। गुरुके अस्त एवं सूर्य के सिंह राशिमें स्थित होनेपर अधिक मास मे जो निषिद्ध कर्म है, उन्हें नहीं करना चाहिए । कर्क राशिमें सूर्यके आने पर भगवान् शयन करते हैँ ओर उनके तुलाराशि में आनेपर निद्राका त्याग करते हैं।
कब से शुरू हो रहा है अधिकमास
आपको बता दें कि इस साल मई से जून तक अधिक मास रहेगा। अधिकमास के कारण ज्येष्ठ का महीना दो महीने रहेगा। इसकी शुरुआत 17 मई को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होगी और समापन 15 जून को ज्येष्ठ अमावस्या के दिन होगा।
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Anuradha Pandeyशार्ट बायो
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