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2026 में लगेगा अधिक मास, नया साल होगा 13 महीनों का, जानें क्या करें और क्या न करें

2026 में लगेगा अधिक मास, नया साल होगा 13 महीनों का, जानें क्या करें और क्या न करें

संक्षेप:

adhik maas 2026: साल 2026 में लगने वाले अधिक मास से हिंदू नया साल 13 महीनों का होगा। इसे मलमास भी कहा जाता है। आइए जानते हैं अगले साल लगने वाले मलमास की तिथि, महत्व, वर्जनाएं और इस महीने में किए जाने वाले कार्य।

Dec 05, 2025 02:08 pm ISTHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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adhik maas 2026 : जब चांद-सूरज की चाल अपनी लय बदलती है और पंचांग अचानक एक अतिरिक्त महीना जोड़ देता है, तब साल सिर्फ आगे नहीं बढ़ता तो इसके मायने भी बदल जाते हैं। साल 2026 भी ऐसा ही दुर्लभ पड़ाव लेकर आ रहा है, जिसमें हिंदू नया वर्ष 12 नहीं बल्कि पूरे 13 महीनों का होगा। यह अतिरिक्त महीना है मलमास कहा जाता है जिसे लोग अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहते हैं। लोक मान्यता है कि यह महीना भगवान विष्णु की खास कृपा बरसाने वाला समय होता है और इसी कारण इसे आध्यात्मिक रूप से सबसे पावन काल माना जाता है।

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adhik maas 2026 : क्यों लगता है मलमास?

सूर्य और चंद्र कैलेंडर के बीच का फर्क ही इस अद्भुत महीने को जन्म देता है। सौर वर्ष 365 दिन का होता है और चंद्र वर्ष 354 दिन का अंतर होता है। यह अंतर हर 32 महीने और 16 दिनों में इतना बढ़ जाता है कि पंचांग को संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ना पड़ता है। इसी अतिरिक्त महीने को अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इसका उद्देश्य सिर्फ कैलेंडर को ठीक करना नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय संतुलन को स्थिर करना भी माना गया है।

adhik maas 2026 : अगले में कब लगेगा अधिक मास?

पंचांग के अनुसार, अधिक मास 17 मई 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 को समाप्त होता है। इस पूरे महीने को वरदान माना जाता है, यह तप, जप, ध्यान, भक्ति और दान का महापवित्र समय है। मान्यता है कि अधिक मास के पहले दिन व्रत रखने से पापों का क्षय होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है।

हिंदू पंचांग में एक ऐसा समय माना जाता है जब सांसारिक और मांगलिक कार्यों को विराम देकर आध्यात्मिक साधना को प्राथमिकता दी जाती है। यह महीना हर तीन साल में एक बार आता है और इसका उद्देश्य पंचांग की गणितीय समायोजन को संतुलित करना होता है, पर धार्मिक रूप से इसे अत्यंत पवित्र माना गया है।

adhik maas 2026 : मांगलिक कार्यों से परहेज

परंपराओं में कहा गया है कि मलमास के दौरान विवाह जैसे शुभ संस्कार, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, भूमि पूजन या किसी नए व्यवसाय की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान किए गए शुभ कार्य अपेक्षित फल नहीं देते और ग्रह-नक्षत्र भी मांगलिक कर्मों के अनुकूल नहीं माने जाते। इसी कारण इस पूरे अवधि में बड़े संस्कारों को स्थगित करने की सलाह दी जाती है।

adhik maas 2026 : आध्यात्मिक साधना पर जोर

मलमास का सर्वोच्च महत्व ईश्वर भक्ति और साधना से जुड़ा है। इस समय भगवान विष्णु की पूजा, रामायण, भागवत और गीता जैसे ग्रंथों का पाठ, दान, जप, तप, गऊ-सेवा और जरूरतमंदों की सहायता को विशेष शुभ माना गया है। शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि इस महीने में किया गया पुण्य सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़कर फल देता है। इसी कारण भक्त इस समय को आत्मशुद्धि और साधना के लिए सर्वोत्तम अवसर मानते हैं।

adhik maas 2026 : क्यों कहा जाता है इसे पुरुषोत्तम मास

कथाओं में वर्णन मिलता है कि जब एक अतिरिक्त महीना उत्पन्न हुआ तो कोई भी देवता उसे अपनाने को तैयार नहीं था। तब भगवान विष्णु ने उसे अपने संरक्षण में लिया और उसे ‘पुरुषोत्तम मास’ के रूप में प्रतिष्ठित किया। यही कारण है कि यह समय देवों में भी सर्वोच्च माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में की गई साधना जीवन में सौभाग्य, शांति और आध्यात्मिक उत्थान लेकर आती है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari
हिमांशु तिवारी लाइव हिन्दुस्तान में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं। वे करियर, एजुकेशन और जॉब्स से जुड़ी खबरें बनाते हैं। यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी, आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं पर इनकी पैनी नजर रहती है। कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक, जामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी करने के बाद साल 2016 में इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत की और लाइव हिन्दुस्तान से पहले जी न्यूज, इंडिया टीवी और एबीपी न्यूज जैसे बड़े मीडिया हाउस में काम कर चुके हैं। करियर, एजुकेशन और जॉब्स के अलावा हिमांशु को राजनीति, देश-विदेश, रिसर्च और मनोरंजन बीट का भी अनुभव है। और पढ़ें
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