Baglamukhi Jayanti 2026: मां बगलामुखी की जयंती आज, कर लें ये 3 खास उपाय, शत्रुओं पर पाएं विजय
बगलामुखी जयंती हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन देवी बगलामुखी का अवतरण हुआ था। श्रद्धा और विधि-विधान से उनकी पूजा करने पर मां अपने भक्तों को शत्रुओं से जुड़ी परेशानियों से बचाती हैं।

बगलामुखी जयंती हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन देवी बगलामुखी का अवतरण हुआ था। श्रद्धा और विधि-विधान से उनकी पूजा करने पर मां अपने भक्तों को शत्रुओं से जुड़ी परेशानियों से बचाती हैं। इस साल मां बगलामुखी की जयंती आज यानी 24 अप्रैल को मनाई जा रही है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार मां बगलामुखी की उपासना करने वाले भक्त को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और विजय प्राप्त होती है। हालांकि, दस महाविद्याओं में आठवीं स्वरूप मां बगलामुखी की पूजा के लिए शास्त्रों में कुछ खास नियम बताए गए हैं, जिनका पालन किए बिना उनकी साधना पूर्ण नहीं मानी जाती। साथ ही इस दिन कुछ उपाय करने से मां प्रसन्न होती हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
बगलामुखी देवी कैसे प्रकट हुईं?
मां बगलामुखी के प्रकट होने को लेकर दो प्रमुख कथाएं प्रचलित हैं। पहली कथा के अनुसार, एक बार एक राक्षस ब्रह्मा जी का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ चुराकर पाताल लोक में छिप गया। तब ब्रह्मा जी ने देवी भगवती की कठोर तपस्या की। उनकी साधना से प्रसन्न होकर मां बगलामुखी प्रकट हुईं। उन्होंने बगुले का रूप धारण कर उस राक्षस का वध किया और ग्रंथ वापस ब्रह्मा जी को सौंप दिया।
दूसरी कथा के अनुसार, सतयुग में एक भयानक तूफान आया, जिससे पृथ्वी के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा। तब भगवान विष्णु, भगवान शिव के पास गए। शिव जी ने बताया कि इस संकट से केवल आदिशक्ति ही बचा सकती हैं। इसके बाद भगवान विष्णु ने आदिशक्ति की तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां आदिशक्ति गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में हरिद्रा झील से बगलामुखी रूप में प्रकट हुईं और पृथ्वी को इस संकट से बचाया।
मां के अन्य नाम
देवी बगलामुखी को देवी पीतांबरा के नाम से भी जानते हैं क्योंकि इनको पीला रंग प्रिय है। देवी का रंग पीला है। इनको ब्रह्मास्त्र रूपिणी भी कहा जाता है।
पूजा विधि
- सुबह स्नान आदि करके शुद्ध हो जाएं।
- पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
- पूजा करते समय मुख पूर्व दिशा की ओर रखें।
- पूजा में अधिक से अधिक पीले रंग का उपयोग करें।
- मां का आसन पीले रंग का रखें।
- मां को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें।
- पीले रंग के फूल चढ़ाएं।
- पूजा में पीले रंग के फल शामिल करें।
- विधि-विधान से पूजा पूरी करें।
- अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार दान करें।
मां बगलामुखी जयंती पर उपाय
1. मां बगलामुखी अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और प्रसन्न होने पर उनका आशीर्वाद बनाए रखती हैं। ऐसे में उनकी कृपा पाने के लिए पूजा में अधिक से अधिक पीले रंग का उपयोग करें, क्योंकि यह रंग मां को बहुत प्रिय है। साथ ही इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनना भी शुभ माना जाता है।
2. इसके अलावा बगलामुखी जयंती पर हवन और पूजा करें। शत्रु से छुटकारा पाने या हराने के लिए इस दिन स्नान आदि कर पीले सरसों के दानों से हवन करें। शत्रुओं को शांत करने का यह एक प्रभावशाली और आसाना उपाय है। । बगलामुखी जयंती पर अपनी श्रद्धा के अनुसार मां को भोग जरूर लगाएं। खासतौर पर पीले रंग की चीजें जैसे पान, पीली मिठाई, पीले फल और पंचमेवा अर्पित करना शुभ होता है। इससे मां शीघ्र प्रसन्न होकर आर्थिक समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
3. इस दिन मां बगलामुखी को चने की दाल अर्पित करना भी लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि इससे नजर दोष दूर होता है। पूजा के बाद इस दाल को किसी ब्राह्मण को दान कर देना चाहिए।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
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