Quote of the day: समुद्र गंभीर होता है, लेकिन प्रलय के समय भूल जाता है मर्यादा, गांठ बांध लें चाणक्य की ये बातें
aaj ka vichar: मनुष्य अकेला ही जन्म लेता है और अकेला ही मरता है। वह अकेला ही नर्क मे जाता है और अकेला ही परम पद को पाता है। चलिए चाणक्य की कुछ नीतियों के बारे में जानते हैं, जो हमें जीवन को समझने की शिक्षा देती है।

aaj ka vichar: आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में कई ऐसी बातें बताई हैं, जिससे मानव जीवन को करीब से समझा जा सकता है। साथ ही जीवन के दुखों को खत्म किया जाता है। चाणक्य की नीतियां मानव समाज के हर एक पहलू की व्यावहारिक शिक्षा देती हैं। उनका एक श्लोक है-जन्ममृत्यू हि यात्येको भुनक्त्येकः शुभाशुभम्। नरकेषु पतत्येक एको याति परां गतिम्। इसका अर्थ है कि मनुष्य अकेला ही जन्म लेता है और अकेला ही मरता है। वह अकेला ही नर्क मे जाता है और अकेला ही परम पद को पाता है। चलिए चाणक्य की कुछ नीतियों के बारे में जानते हैं, जो हमें जीवन को समझने की शिक्षा देती है।
गांठ बांध लें ये 4 बातें
1. “आलस्योपहताः विद्या परहस्ते गतं धनम्।
अल्पबीजं हतं क्षेत्रं हतं सैन्यमनायकम्॥”
अगर आप जीवन को सुखमय बनाना चाहते हैं, तो चाणक्य कि इन 4 बातों को अच्छी तरह समझना होगा। इस श्लोक के जरिए वो कहते हैं कि आलस्य से विद्या नष्ट हो जाती है। जो धन दूसरे के हाथ में चला जाए, वह भी नष्ट हो जाता है। जिस खेत में कम बीज बोया जाए, वह खराब हो जाता है। और जिस सेना का कोई सैनिक या नेता न हो, वह भी नष्ट हो जाती है।
मर्यादा कभी ना भूलें
2. प्रलये भिन्नमर्यादा भवन्ति किल सागराः ।
सागरा भेदमिच्छन्ति प्रलयेऽपि न साधवः ॥
इस श्लोक में चाणक्य कहते हैं कि प्रलय (महाविनाश) के समय समुद्र भी अपनी मर्यादा तोड़ देते हैं। वो किनारों को तोड़कर जल-थल एक कर देता है। लेकिन सज्जन और साधु प्रलय जैसी कठिन परिस्थिति में भी अपनी मर्यादा और सिद्धांत नहीं छोड़ते। ऐसे लोग अपने चरित्र, मर्यादा और सिद्धांतों से समझौता नहीं करते। परिस्थितियां चाहे कितनी भी खराब क्यों न हों, अच्छे लोग हमेशा अपने अच्छे गुण बनाए रखते हैं।
मनुष्य की परख
3.यथा चतुर्भिः कनकं परीक्ष्यते
निघर्षणच्छेदनतापताडनैः।
तथा चतुर्भिः पुरुषः परीक्ष्यते
त्यागेन शीलेन गुणेन कर्मणा॥
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिस तरह सोने की परख चार तरीकों से की जाती है-घिसकर, काटकर, आग में तपाकर और पीटकर। उसी प्रकार मनुष्य की परख भी चार बातों से होती है-
त्याग (दान और उदारता)
शील (अच्छा स्वभाव और चरित्र)
गुण (अच्छे संस्कार और विशेषताएं)
कर्म (उसके कार्य)
दान दरिद्रता को नष्ट कर देता है
4.दारिद्र्यनाशनं दानं शीलं दुर्गतिनाशनम्।
अज्ञाननाशिनी प्रज्ञा भावना भयनाशिनी॥
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि दान दरिद्रता को नष्ट कर देता है। शील स्वभाव से दुःखों का नाश होता है। बुद्धि अज्ञान को नष्ट कर देती है और भावना से भय का नाश हो जाता है।
ये चीजें अभ्यास से नहीं हो सकती प्राप्त
5.दातृत्वं प्रियवक्तृत्वं धीरत्वमुचितज्ञता ।
अभ्यासेन न लभ्यन्ते चत्वार: सहजा गुणा:
इसका अर्थ है कि कुछ चीजें अभ्यास से प्राप्त नहीं किया जा सकता है। जैसे कि दान देने की इच्छा, मधुर वचन बोलना, सहनशीलता और उचित-अनुचित का ज्ञान। बल्कि ये चारों बातें मनुष्यों में सहज स्वभाव से ही होती है।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
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