Quote of the day: धरती पर स्वर्ग के समान जीवन जीते हैं ये लोग, बेहद काम आएंगी आचार्य चाणक्य की ये बड़ी बातें

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Aaj Ka Vichar: आचार्य चाणक्य कई विषयों के ज्ञाता थे। वो एक योग्य गुरु, मार्गदर्शक और कुशल रणनीतिकार थे। आज हम आपको आचार्य चाणक्य की कुछ बड़ी बातें बताने जा रहे हैं, जो आज भी बेहद प्रसांगिक हैं।

Quote of the day: धरती पर स्वर्ग के समान जीवन जीते हैं ये लोग, बेहद काम आएंगी आचार्य चाणक्य की ये बड़ी बातें

आचार्य चाणक्य कई विषयों के ज्ञाता थे। वो एक योग्य गुरु, मार्गदर्शक और कुशल रणनीतिकार थे। कहते हैं कि आज भी अगर कोई उनकी बातें अपने जीवन में उतार ले, तो सफलता उसके कदम चूमती है। मानव जीवन को उन्होंने बेहद करीब से अपनी नीतियों के माध्यम से समझा है और उसे तार्कित रूप से समझाया है। आज हम आपको आचार्य चाणक्य की कुछ बड़ी बातें बताने जा रहे हैं, जो आज भी बेहद प्रसांगिक हैं।

सौभाग्यशाली लोगों की पहचान
1. आचार्य चाणक्य ने अपने एक श्लोक में बताया है कि कौन-कौन से वो लोग हैं, जो कि धरती पर स्वर्ग के समान जीवन जीते हैं। श्लोक है-

भोज्यं भोजनशक्तिश्च रतिशक्तिर्वराङ्गना ।
विभवो दानशक्तिश्च नाल्पस्य तपसः फलम् ॥

इस श्लोक का अर्थ है कि जिस व्यक्ति को अच्छा भोजन मिलता हो और जो स्वस्थ्य जीवन जीता है, उसके लिए धरती स्वर्ग के समान है। जिस भी पुरुष को जीवनसाथी के रुप में एक गुणवान व सुंदर पत्नी मिलती है, उससे भी सौभाग्यशाली कोई और नहीं होता है। इसके अलावा जो व्यक्ति धनवान है वह इस युग में किस्मत का धनी भी है। वहीं, जो भी व्यक्ति दान-पुण्य करता है, तो उसे हर प्रकार का सुख मिलता है और जिसे सारे सुख मिल जाए तो मानों की उसे धरती पर ही स्वर्ग के समान सुख मिल गया।

सीधा और भोला नहीं होना चाहिए

2. "नात्यन्तं सरलैर्भाव्यं गत्वा पश्य वनस्थलीम् ।
छिद्यन्ते सरलास्तत्र कुब्जास्तिष्ठन्ति पादपाः॥"
आचार्य चाणक्य इस श्लोक के माध्यम से कहते हैं कि किसी व्यक्ति बहुत सीधा या भोला नहीं होना चाहिए। इससे होने वाले नुकसान को समझाने के लिए वह कहते हैं कि जंगल में सीधे पेड़ों को सबसे पहले काटा जाता है और टेढ़े-मेढ़े पेड़ बचे रहते हैं। ठीक इसी तरह सीधे लोगों का फायदा पहले उठाया जाता है।

भ्रम में ना करें कोई कार्य
3. न स्नेहात् कृत्वा विघ्नं न द्वेषात् न च लोभतः।
न मोहत् कार्यमत्यन्तं कार्यं कार्यवदाचरेत्"
इस श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि किसी भी काम को भ्रम में आकर नहीं करना चाहिए। हमेशा अपने कार्य को कर्तव्य समझकर, निष्पक्ष और विवेकपूर्ण तरीके से करना चाहिए। यानी जैसे कार्य आवश्यक है, उसे वैसे ही करना चाहिए।

परिस्थियों से सीखें
4. चाणक्य कहते हैं कि पिता को अपने बेटे से प्रेम तो करना चाहिए, लेकिन अंधा लाड़ दिखाना उसके भविष्य के लिए हानिकारक हो सकता है। अगर बच्चे की हर इच्छा पूरी कर दी जाए, तो वह जिद्दी और स्वार्थी बन सकता है। ऐसे बच्चे दूसरों की बात नहीं सुनते और मुश्किल परिस्थितियों में कमजोर पड़ जाते हैं। इसलिए प्रेम के साथ-साथ अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना भी सिखाना जरूरी है।

इन बातों को हमेशा सोचें
5. चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को हमेशा यह सोचना चाहिए कि समय कैसा है, मेरे मित्र कौन हैं, कौन-सा देश या स्थान मेरे लिए सही है, मेरी आय-व्यय का संतुलन क्या है और मेरी असली शक्ति क्या है। इस सभी बातों का ध्यान रखकर ही जीवन में सफलता हासिल की जा सकती है।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव

धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
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