Quote Of The Day: धन की देवी लक्ष्मी चंचल हैं, प्राण भी स्थिर नहीं, लेकिन धर्म स्थायी, पढ़ें चाणक्य के अनमोल विचार
Aaj Ka Vichar: आचार्य चाणक्य की नीतियां आज के समय में भी उतनी ही प्रभावी और प्रासंगिक मानी जाती हैं। उन्हें एक महान दार्शनिक, दूरदर्शी कूटनीतिज्ञ, कुशल राजनीतिज्ञ और श्रेष्ठ अर्थशास्त्री के रूप में जाना जाता है। माना जाता है कि उन्होंने जीवन के हर पहलू को गहराई से समझाया है।

Aaj Ka Suvichar: आचार्य चाणक्य की नीतियां आज के समय में भी उतनी ही प्रभावी और प्रासंगिक मानी जाती हैं। उन्हें एक महान दार्शनिक, दूरदर्शी कूटनीतिज्ञ, कुशल राजनीतिज्ञ और श्रेष्ठ अर्थशास्त्री के रूप में जाना जाता है। माना जाता है कि उन्होंने जीवन के हर पहलू को गहराई से समझाया है। इसी क्रम में हम आपके लिए चाणक्य नीति के कुछ ऐसे श्लोक लेकर आए हैं, जो जीवन के महत्वपूर्ण मंत्र की तरह हैं और जिन्हें अपनाकर व्यक्ति अपने व्यवहार और सोच में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
श्लोक 1
चला लक्ष्मीश्चलाः प्राणश्चले जीवितमन्दिरे।
चलाऽचले च संसारे धर्म एको हि निश्चलः ॥
अर्थ-
आचार्य चाणक्य के अनुसार लक्ष्मी का स्वभाव चंचल है, वह कभी एक स्थान पर टिकती नहीं। जैसे आज धन हमारे पास होता है और कल कहीं और चला जाता है, उसी तरह प्राण, जीवन और शरीर भी क्षणभंगुर हैं और एक समय के बाद समाप्त हो जाते हैं। लेकिन इस सृष्टि में केवल ‘धर्म’ ही ऐसा है जो अटल और स्थायी है। इसलिए व्यक्ति को हमेशा धर्म के मार्ग पर चलकर अपने कर्म करने चाहिए और दूसरों को भी धर्म का महत्व समझाना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को ही वास्तव में श्रेष्ठ माना जाता है।
श्लोक 2
नराणां नापितो धूर्तः पक्षिणां चैव वायसः।
चतुष्पदां श्रृगालस्तु स्त्रीणां धुर्ता च मालिनी॥
अर्थ-
आचार्य चाणक्य के मुताबिक अलग-अलग वर्गों में कुछ ऐसे लोग या जीव होते हैं, जो अपनी चतुराई और चालाकी के लिए जाने जाते हैं। मनुष्यों में नाई (नापित) को चतुर और चालाक कहा गया है,पक्षियों में कौवा (वायस) सबसे धूर्त माना जाता है। चार पैरों वाले जानवरों में सियार चालाक होता है, और स्त्रियों में दासी और सेविका (मालिनी) को धूर्त बताया गया है।
श्लोक 3
जनिता चोपनेता च यस्तु विद्यां प्रयच्छति।
अन्नदाता भयत्राता पञ्चैते पितरः स्मृताः॥
राजपत्नी गुरोः पत्नी मित्र पत्नी तथैव च।
पत्नी माता स्वमाता च पञ्चैता मातरः स्मृता॥
अर्थ-
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो जन्म देता है, जो शिक्षा देता है, जो ज्ञान प्रदान करता है, जो भोजन कराता है और जो भय से रक्षा करता है, ये पांचों पिता के समान माने जाते हैं। इसी तरह, राजा की पत्नी, गुरु की पत्नी, मित्र की पत्नी, अपनी पत्नी की माता (सास) और अपनी जन्म देने वाली माता, इन पांचों को माता के समान सम्मान देना चाहिए।
श्लोक 4
लालयेत् पंचवर्षाणि दशवर्षाणि ताडयेत्।
प्राप्ते तु षोडशे वर्षे पुत्रं मित्रवदाचरेत्॥
अर्थ-
आचार्य चाणक्य के अनुसार, पिता को अपने पुत्र के पालन-पोषण के अलग-अलग चरणों में अलग व्यवहार अपनाना चाहिए। पहले पांच वर्षों तक बच्चे को प्यार और देखभाल के साथ पालना चाहिए। इसके बाद अगले दस वर्षों में उसे अनुशासन सिखाने के लिए जरूरत पड़ने पर डांट-डपट भी करनी चाहिए। और जब वह सोलह वर्ष का हो जाए, तब उसके साथ मित्र की तरह व्यवहार करना चाहिए।
श्लोक 5
श्रुत्वा धर्मं विजानाति श्रुत्वा त्यजति दुर्मतिम्।
श्रुत्वा ज्ञानमवाप्नोति श्रुत्वा मोक्षमवाप्नुयात्॥
अर्थ-
इस श्लोक के जरिए आचार्य चाणक्य कहते हैं कि सुनने से ही व्यक्ति धर्म को समझता है। सुनकर ही गलत सोच को छोड़ता है और सुनकर ही ज्ञान प्राप्त करता है। इस तरह ही वो सुनकर अंत में मोक्ष तक पहुंच सकता है। जब हम सही बातें सुनते हैं, तो हमें धर्म और सही रास्ते की समझ मिलती है। इससे हमारी गलत सोच धीरे-धीरे खत्म होती है। फिर हम ज्ञान हासिल करते हैं और जीवन को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं। अंत में यही ज्ञान हमें शांति और मुक्ति की ओर ले जाता है।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव
धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
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रत्न विज्ञान


