Quote Of The Day: किस परिवार में दोष नहीं, सुख हमेशा बना नहीं रहता.. पढ़ें चाणक्य के अनमोल विचार

Apr 05, 2026 08:48 am ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। उन्हें आज के समय में भी एक महान दार्शनिक, कुशल कूटनीतिज्ञ, प्रभावशाली राजनीतिज्ञ और प्रख्यात अर्थशास्त्री के रूप में याद किया जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने जीवन के लगभग हर पहलू का गहन विश्लेषण किया है। नीचे पढ़ें उनके अमोल विचार…

Quote Of The Day: किस परिवार में दोष नहीं, सुख हमेशा बना नहीं रहता.. पढ़ें चाणक्य के अनमोल विचार

Aaj Ka Vichar: आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। उन्हें आज के समय में भी एक महान दार्शनिक, कुशल कूटनीतिज्ञ, प्रभावशाली राजनीतिज्ञ और प्रख्यात अर्थशास्त्री के रूप में याद किया जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने जीवन के लगभग हर पहलू का गहन विश्लेषण किया है। अपने एक श्लोक के माध्यम से उन्होंने यह भी बताया है कि किन लोगों के प्रति आवश्यकता से अधिक लगाव रखना व्यक्ति के आत्मसम्मान को आहत कर सकता है। ऐसे ही आज हमने चाणक्य नीति के कुछ श्लोक चुने हैं, जो एक ऐसा जीवन मंत्र है जिसे हमेशा याद रखना चाहिए और अपने व्यवहार में उतारना चाहिए।

श्लोक 1

निर्धनं पुरुषं वेश्या प्रजा भग्नं नृपं त्यजेत्।
खगा वीतफलं वृक्षं भुक्त्वा चाभ्यागता गृहम् ॥

इस श्लोक के जरिए आचार्य चाणक्य कहते हैं कि वेश्या निर्धन पुरुष को छोड़ देती है, प्रजा पराजित या कमजोर राजा का साथ त्याग देती है, पक्षी फलहीन वृक्षों को छोड़कर उड़ जाते हैं और अचानक आया अतिथि भोजन करने के बाद घर से विदा हो जाता है। आचार्य चाणक्य यहां यह समझाना चाहते हैं कि अधिकांश संबंध तभी तक बने रहते हैं, जब तक उनसे किसी न किसी स्वार्थ की पूर्ति होती रहती है।

श्लोक 2

दुराचारी दुरादृष्टिर्दुरावासी च दुर्जनः।
यन्मैत्रीक्रियते पुम्भिर्नरः शीघ्रं विनश्यति ॥

अर्थ

इस श्लोक का भाव यह है कि जो व्यक्ति बुरे आचरण वाला हो, बिना कारण दूसरों को नुकसान पहुंचाता हो और दूषित वातावरण में रहता हो, ऐसे व्यक्ति से जो कोई मित्रता करता है, वह शीघ्र ही पतन को प्राप्त होता है। यह श्लोक सिखाता है कि मनुष्य का पतन उसकी गलत संगति से बहुत जल्दी हो सकता है, इसलिए हमेशा अच्छे लोगों का साथ ही जीवन को सही दिशा देता है।

श्लोक 3

कस्य दोषः कुलेनास्ति व्याधिना के न पीडितः।
व्यसनं के न संप्राप्तं कस्य सौख्यं निरन्तरम् ॥

अर्थ

ऐसा कोई परिवार नहीं है जिसमें कोई दोष न हो, ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो कभी रोग से पीड़ित न हुआ हो, ऐसा कोई नहीं जिसे कभी दुख या कष्ट न मिला हो और ऐसा भी कोई नहीं जिसका सुख हमेशा बना रहता हो। इस श्लोक से हमें यह सीख मिलती है कि जीवन में कोई भी पूर्ण नहीं है और न ही किसी का सुख हमेशा स्थायी रहता है, इसलिए परिस्थितियों को स्वीकार कर संतुलित जीवन जीना ही बुद्धिमानी है।

श्लोक 4

कोकिलानां स्वरो रूपं नारीरूपं पतिव्रतम्।
विद्यारूपं कुरूपाणां क्षमा रूपं तपस्विनाम् ॥

अर्थ

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि कोयल की सुंदरता उसकी मधुर आवाज में होती है, स्त्री की सुंदरता उसके पतिव्रत धर्म में होती है, कुरूप व्यक्ति की सुंदरता उसकी विद्या होती है और तपस्वी की सुंदरता उसकी क्षमा में होती है।

श्लोक 5

लालयेत् पञ्चवर्षाणि दश वर्षाणि ताडयेत्।
प्राप्ते तु षोडशे वर्षे पुत्रं मित्रवदाचरेत्॥

अर्थ

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि बच्चे को पहले पांच साल तक प्रेम से पालना चाहिए, अगले दस साल तक उसे अनुशासन और शिक्षा देनी चाहिए, और जब वह सोलह वर्ष का हो जाए, तो उसके साथ मित्र जैसा व्यवहार करना चाहिए।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
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