Quote Of The Day: देवता, पिता और रिश्तेदार इन चीजों से खुश हो जाते हैं, पढ़ें आचार्य चाणक्य के विचार
aaj ka vichar: आचार्य चाणक्य ने अपने नीति ग्रंथ में जीवन से जुड़ी कई गहरी और उपयोगी बातें बताई हैं। उन्होंने रिश्तों, व्यवहार और सफलता के सिद्धांतों को बहुत ही सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाया है।

Aaj Ka Suvichar: आचार्य चाणक्य ने अपने नीति ग्रंथ में जीवन से जुड़ी कई गहरी और उपयोगी बातें बताई हैं। उन्होंने रिश्तों, व्यवहार और सफलता के सिद्धांतों को बहुत ही सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाया है। उनकी शिक्षाएं आज भी उतनी ही असरदार और प्रासंगिक हैं, जितनी प्राचीन समय में थीं। माना जाता है कि जो व्यक्ति इन नीतियों को अपने जीवन में अपनाता है, उसके लिए सफलता के रास्ते आसान हो जाते हैं। नीचे कुछ ऐसे ही श्लोक दिए गए हैं, जो जीवन की समस्याओं से बचने में मदद कर सकते हैं।
श्लोक 1
मुहूर्तं माप जीवेच्च नरः शुक्लेण कर्मणा।
न कल्पमापि कष्टेन लोकद्वयविरोधिना ॥
अर्थ- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि यदि मनुष्य उज्जवल कर्म करके एक दिन भी जिंदा रहे, तो उसका जीवन सफल हो जाता है। ऐसा जीवन बहुत लंबा जीने से बेहतर है, जो कष्टों से भरा हो और इस लोक व परलोक दोनों के खिलाफ हो। यानी कम समय का अच्छा और सही जीवन, लंबे लेकिन गलत और दुखभरे जीवन से ज्यादा मूल्यवान होता है।
श्लोक 2
गते शोको न कर्तव्यो भविष्यं नैव चिन्तयेत्।
वर्तमानेन कालेन प्रवर्त्तन्ते विचक्षणाः॥
अर्थ- आचार्य चाणक्य इस श्लोक के माध्यम से कहते हैं कि बीती हुई बातों यानी अतीत पर शोक नहीं करना चाहिए, और आने वाले समय यानी भविष्य की ज्यादा चिंता भी नहीं करनी चाहिए। बुद्धिमान लोग हमेशा वर्तमान समय में रहकर ही काम करते हैं।
श्लोक 3
स्वभावेन हि तुष्यन्ति देवाः सत्पुरुषाः पिता।
ज्ञातयः स्नान-पानाभ्यां वाक्यदानेन पंडिताः॥
अर्थ- आचार्य चाणक्य का यह श्लोक बताता है कि अलग-अलग लोगों को प्रसन्न करने के तरीके अलग होते हैं और हमें उसी अनुसार व्यवहार करना चाहिए। देवता, सज्जन पुरुष और पिता ऐसे होते हैं जो स्वभाव से ही सरल और दयालु होते हैं। उन्हें खुश करने के लिए ज्यादा दिखावा या विशेष प्रयास की जरूरत नहीं होती। अगर आप सच्चे मन से, श्रद्धा और सम्मान के साथ व्यवहार करते हैं, तो ये लोग आसानी से प्रसन्न हो जाते हैं। रिश्तेदारों को खुश करने के लिए अच्छा सत्कार, भोजन और आदर देना जरूरी होता है। विद्वान लोग मीठे, सम्मानजनक और समझदारी भरे शब्दों से खुश होते हैं। इसलिए हमें समझदारी से हर व्यक्ति के अनुसार व्यवहार करना चाहिए, तभी रिश्ते मजबूत और अच्छे बनते हैं।
श्लोक 4
आयुः कर्म च वित्तञ्च विद्या निधनमेव च।
पञ्चैतानि च सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः ॥
अर्थ- जीव जब गर्भ में होता है, उस समय उसकी आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु, ये पांच बातें निश्चित हो जाती हैं । चाणक्य का मनाना था कि एक मनुष्य के जीवन में लगभग एक सौ एक बार मृत्यु का योग बनता है। जिसमें एक बार काल मृत्यु और बाकी अकाल मृत्यु होती हैं। इन अकाल मृत्यु को कर्म और भोग से बदला जा सकता है। इसके अलावा चाणक्य ने बताया कि गर्भ में ही उस बच्चे के कर्म, भोग, धन और विद्या तय हो जाती है। चाणक्य के अनुसार ये सब बातें पिछले जन्म के कर्म ओर माता के कर्मों को मिलाकर तय हो जाती है।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
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परिचय और अनुभव
धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
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