Aaj Ka Suvichar: बार-बार हो रहे हैं असफल, तो कर लें ये काम, पढ़ें प्रेमामंद महाराज के विचार
आज हर कोई सफल होना चाहता है। लेकिन कई बार कड़ी मेहनत और अथक प्रयास के बावजूद भी वो सफल नहीं हो पाता है। इससे वो निराश हो जाता है। ऐसे में लोगों को सही मार्गदर्शन की जरुरत होती है। ऐसे में कई लोग संत प्रेमानंद महाराज के पास जाते हैं और वो लोगों को अच्छे विचारों के साथ प्रेरित करते हैं।

aaj ka vichar quote of the day: आज हर कोई सफल होना चाहता है। लेकिन कई बार कड़ी मेहनत और अथक प्रयास के बावजूद भी वो सफल नहीं हो पाता है। इससे वो निराश हो जाता है। ऐसे में लोगों को सही मार्गदर्शन की जरुरत होती है। ऐसे में कई लोग मथुरा-वृंदावन के फेमस संत प्रेमानंद महाराज के पास जाते हैं और वो लोगों को अच्छे विचारों के साथ प्रेरित करते हैं। ऐसे ही एक भक्त ने महाराज जी से पूछा कि वर्षों से मिली असफलता के कारण मेरा जीवन दिशाहीन हो चुका है। जो भी करता हूं वो गलत ही हो जाता है। इससे आत्मविश्वास डमगमगा सा गया है। इसे भय दुख अनिद्रा बढ़ गई है। ऐसे में जीवन को सफल बनाने के लिए प्रेमानंद महाराज ने कई अहम बातें बताई है।
प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि जब तक तुम्हारे पूर्व पाप नष्ट नहीं हो जाते हैं, तब तक हमें कोई सफलता नहीं मिलती है। हम बहुत सकारात्मक सोच सोच रखना चाहेंगे, लेकिन हमें नेगेटिव सोच में पहुंचा देंगे। यह है पाप का परिणाम और पाप को नष्ट किए बिना हम सुखी नहीं हो सकते हैं।
पाप को नष्ट करने के लिए उपाय
महाराज जी कहते हैं कि पाप को नष्ट करने के लिए हमें कुछ उपाय करने चाहिए। इसके लिए तीर्थ यात्रा पर जाएं, गंगा स्नान करें। लेकिन सही सटीक, पाप की जड़ का नाश कर दे नाम है। महाराज जी कहते हैं कि आधा घंटा नाम कीर्तन करो जोर-जोर से और चलते फिरते नाम जप करो। देखो सब पॉजिटिव हो जाएगा।
जो प्रिय हो वो नाम जप करो
प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि आधा घंटा कोई भी नाम जप करो, जो आपको प्रिय हो। हरे कृष्ण-हरे कृष्ण, श्रीराम जय राम जय जय राम या फिर राधा-राधा। खूब जोर-जोर से भगवन नाम का कीर्तन करो और चलते-फिरते नाम जप करो। फिर देखो परिणाम। लेकिन ये लंबे समय तक करें। 2 से 4 दिन तक नहीं। पता चले 2 से 4 दिन किया और फिर पाप कर लिया, तो ऐसा नहीं है। पाप आचरण रोक करके लंबे समय तक करो तो तुम्हारे पाप नष्ट हो जाएंगे और सफलता हाथ लग जाएगी।
महाराज जी कहते हैं कि सबको सफलता क्यों प्राप्त नहीं होती है और सबको सुख प्राप्त क्यों नहीं होता है? महाराज जी कहते हैं कि इसके लिए भजन और बढ़ाओ। महाराज जी कहते हैं कि इसके लिए हमने कई बार कहा कि जैसे हमारा पूर्व का पाप 500 ग्राम हैऔर हमारा भजन 50 ग्राम है, तो 450 ग्राम अभी ऊपर लदा है। महाराज जी कहते हैं कि जब हम इतना भजन करें कि भजन 500 ग्राम के पार कर जाए। तब हमारा चमत्कार दिखाई देगा।
वो कहते हैं कि ऐसे में हमें डटकर भजन करना चाहिए। असफलता में निराश नहीं होना चाहिए। हमारे ही कर्मों का परिणाम हमें असफल कर रहा है। भजन जितना बढ़ाओगे, उतना ही सफलता मिलता चला जाएगा। प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, सफलता पाने के लिए कई चीजें आवश्यक हैं। सफलता का सबसे बड़ा कारण लगन और निरंतर प्रयास है। कोई भी व्यक्ति अगर सच्चे मन से, सही दिशा में मेहनत करता है, तो उसे सफलता जरूर मिलेगी।
सफलता और असफलता किस पर निर्भर है?
उनके अनुसार, सफलता या असफलता बहुत हद तक हमारे कर्मों पर निर्भर करती है, न कि भाग्य पर। वो उदाहरण देते हुए कहते हैं कि जैसे एक शिक्षक की नजर में सभी छात्र सामान हैं लेकिन क्लास में प्रथम वही आता है जो मेहनती होता है।
ईश्वर की नजर
वो आगे कहते हैं कि ठीक वैसे ही ईश्वर की नजर में हम सभी समान हैं, लेकिन हम सब में जो सबसे ज्यादा मेहनत करता है, वही सफल होता है। उसे ईश्वर या भाग्य का सहारा न के बराबर मिलता है।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
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परिचय और अनुभव
धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
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