Quote Of The Day: अकेले में तप, 2 लोगों के साथ पठन, 3 के साथ गायन... जीवन बदल देंगी चाणक्य की ये बातें

Dheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
share

 आचार्य चाणक्य एक श्लोक के माध्यम से वो समझाते हैं कि कौन-सा काम अकेले करना चाहिए और कौन-सा लोगों के साथ मिलकर। उनकी यही व्यावहारिक और तार्किक सोच उन्हें आज भी प्रासंगिक बनाती है। आइए जानते हैं उनकी कुछ ऐसी महत्वपूर्ण बातें, जो आज के समय में भी उतनी ही उपयोगी हैं।

Quote Of The Day: अकेले में तप, 2 लोगों के साथ पठन, 3 के साथ गायन... जीवन बदल देंगी चाणक्य की ये बातें

आचार्य चाणक्य एक महान विद्वान थे, जिन्होंने राजनीति, अर्थशास्त्र और जीवन-प्रबंधन जैसे विषयों में गहरी समझ विकसित की। वे न केवल एक श्रेष्ठ गुरु और मार्गदर्शक थे, बल्कि एक कुशल रणनीतिकार भी माने जाते हैं। उनकी नीतियां आज भी जीवन को सही दिशा देने में बेहद उपयोगी साबित होती हैं। चाणक्य ने अपने श्लोकों और विचारों के माध्यम से यह बताया कि हर कार्य को करने का एक सही तरीका और सही परिस्थिति होती है। एक श्लोक के माध्यम से वो समझाते हैं कि कौन-सा काम अकेले करना चाहिए और कौन-सा लोगों के साथ मिलकर। उनकी यही व्यावहारिक और तार्किक सोच उन्हें आज भी प्रासंगिक बनाती है। आइए जानते हैं उनकी कुछ ऐसी महत्वपूर्ण बातें, जो आज के समय में भी उतनी ही उपयोगी हैं।

श्लोक 1

एकाकिना तपो द्वाभ्यां पठनं गायनं त्रिभिः।
चतुर्भिगमन क्षेत्रं पञ्चभिर्बहुभि रणम्॥

अर्थ
- इस श्लोक के माध्यम से आचार्य चाणक्य कहते हैं कि तप, ध्यान या आत्मचिंतन यह एक ऐसा काम है, जिसे अकेले में ही करना अच्छा होता है। अगर आसपास लोग होंगे तो मन भटक सकता है।
- वो कहते हैं कि पढ़ाई हमेशा 2 लोगों के साथ करनी चाहिए। जब दो लोग साथ पढ़ते हैं, तो वे एक-दूसरे की मदद करते हैं, सवाल पूछते हैं और गलतियां सुधारते हैं। यानी कि डिस्कशन से समझ गहरी होती है।
- साथ ही 3 लोगों के साथ गायन का कार्य करना चाहिए। क्योंकि संगीत या गायन में तालमेल जरूरी होता है। तीन लोग मिलकर गाते हैं तो सुर और ताल बेहतर बनते हैं।
- 4 लोगों के साथ यात्रा करना चाहिए। यात्रा में अगर आप अकेले हैं तो जोखिम ज्यादा होता है। चार लोग साथ हों तो सुरक्षा, सहयोग और आनंद तीनों मिलते हैं।
- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि 5 लोगों के साथ खेती करना चाहिए। खेती या बड़ा काम अकेले नहीं हो सकता। ज्यादा लोगों के साथ काम जल्दी और बेहतर होता है। इससे यह सीख मिलती है कि बड़े काम के लिए टीम जरूरी होती है।
- 5 या उससे अधिक लोगों के साथ युद्ध करना चाहिए। युद्ध यानी कोई भी बड़ी चुनौती, उसे जीतने के लिए अकेले नहीं, बल्कि मजबूत टीम चाहिए।

श्लोक 2

त्यजेद्धर्मं दयाहीनं विद्याहीनं गुरुं त्यजेत्।
त्यजेत्क्रोधमुखीं भार्यां निःस्नेहान्बान्धवांस्त्यजेत् ॥

अर्थ
चाणक्य इस श्लोक के माध्यम से यह बताते हैं कि कि जीवन में केवल नाम या रिश्ते महत्वपूर्ण नहीं होते, बल्कि उनका स्वभाव और गुण ज्यादा मायने रखते हैं। वो कहते हैं कि धर्म तभी सार्थक है जब उसमें दया और मानवता हो। गुरु तभी योग्य है जब वह ज्ञान देने में सक्षम हो। संबंध तभी टिकते हैं जब उनमें सम्मान और शांति हो। और रिश्ते तभी अच्छे हैं जब उनमें स्नेह और अपनापन हो।

श्लोक 3

अग्निर्देवो द्विजातीनां मुनीनां हृदि दैवतम्।
प्रतिमा त्वल्पबुध्दीनां सर्वत्र समदर्शिनाम् ॥

अर्थ
यह श्लोक हमें बताता है कि व्यक्ति की समझ और ज्ञान के स्तर के अनुसार उसकी पूजा करने की विधि बदलती है। कुछ लोग बाहरी साधनों (जैसे अग्नि, पूजा) के माध्यम से भगवान को मानते हैं। कुछ लोग अंदर की साधना (ध्यान, आत्मचिंतन) से ईश्वर को अनुभव करते हैं। कुछ लोग केवल मूर्ति तक सीमित रहते हैं। लेकिन जो सच्चे ज्ञानी होते हैं, वे समझते हैं कि ईश्वर हर जगह है, हर जीव, हर वस्तु में।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Dheeraj Pal

लेखक के बारे में

Dheeraj Pal

संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव

धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
न्यूमरोलॉजी
रत्न विज्ञान

और पढ़ें
जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!