Quote Of The Day: लोभी के लिए मांगने वाला होता है शत्रु, चोरों के लिए लिए चांदनी, पढ़ें आज के अनमोल विचार
aaj ka vichar: आचार्य चाणक्य केवल एक महान शिक्षक और कुशल रणनीतिकार ही नहीं थे, बल्कि मानव स्वभाव और जीवन के गहरे ज्ञाता भी थे। उन्होंने अपनी नीतियों के जरिए जीवन के कई पहलुओं, विशेष रूप से रिश्तों और व्यवहार को बेहद सरल और तार्किक तरीके से समझाया है।

Aaj Ka Suvichar: आचार्य चाणक्य केवल एक महान शिक्षक और कुशल रणनीतिकार ही नहीं थे, बल्कि मानव स्वभाव और जीवन के गहरे ज्ञाता भी थे। उन्होंने अपनी नीतियों के जरिए जीवन के कई पहलुओं, विशेष रूप से रिश्तों और व्यवहार को बेहद सरल और तार्किक तरीके से समझाया है। उनकी शिक्षाएं आज भी उतनी ही उपयोगी हैं जितनी प्राचीन समय में थीं। माना जाता है कि जो व्यक्ति उनकी नीतियों को सही ढंग से अपनाता है, उसके जीवन में सफलता के रास्ते खुद खुलने लगते हैं। नीचे उनके कुछ ऐसे श्लोक दिए गए हैं, जिन्हें अपनाकर हम जीवन की कई समस्याओं से बच सकते हैं।
श्लोक 1
यस्मिन रुष्टे भयं नास्ति तुष्टे नैव धनागमः।
निग्रहाऽनुग्रहोनास्ति स रुष्टः किं करिष्यति।।
अर्थ- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिस व्यक्ति के नाराज होने पर कोई भय नहीं होता, और प्रसन्न होने पर भी कोई धन लाभ नहीं मिलता और जो न दंड दे सकता है न ही कृपा कर सकता है, उसके नाराज होने से क्या फर्क पड़ता है? इसका मतलब है कि जिस इंसान के पास न सजा देने की शक्ति है और न ही इनाम देने की क्षमता, उसके गुस्सा होने या खुश होने का कोई महत्व नहीं होता।
श्लोक 2
"न स्नेहात् कृत्वा विघ्नं न द्वेषात् न च लोभतः।
न मोहत् कार्यमत्यन्तं कार्यं कार्यवदाचरेत्"
अर्थ- इस श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि किसी भी काम को प्रेम, नफरत लालच या मोह में यानी भ्रम में आकर नहीं करना चाहिए। हमेशा अपने कार्य को कर्तव्य समझकर, निष्पक्ष और विवेकपूर्ण तरीके से करना चाहिए। यानी जैसे कार्य आवश्यक है, उसे वैसे ही करना चाहिए।
श्लोक 3
धनहीनो न हीनश्च धनिकः स सुनिश्चयः।
विद्यारत्नेन हीनो यः स हीनः सर्ववस्तुषु ॥ १०:१॥
अर्थ- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि गरीबी किसी इंसान को छोटा नहीं बनाती, लेकिन शिक्षा और ज्ञान की कमी इंसान को सच में कमजोर और पीछे बना देती है। विद्या रूपी ज्ञान जिसके पास है, वह सबसे धनी है, चाहे उसके पास बाहरी धन न हो।
श्लोक 4
लुब्धानां याचकः शत्रुमूर्खाणां बोधको रिपुः ।
जारस्त्रीणां पतिः शत्रुश्चौराणां चन्द्रमा रिपुः ॥
अर्थ-
लोभी लोगों के लिए मांगने वाला शत्रु होता है, मूर्खों के लिए समझाने वाला व्यक्ति शत्रु होता है। व्यभिचारी स्त्रियों के लिए उनका पति शत्रु होता है और चोरों के लिए चंद्रमा शत्रु होता है। क्योंकि चांदनी यानी रोशनी में चोरी छिप नहीं सकती।
श्लोक 5
गुणैरुत्तमतां याति नोच्चैरासनसंस्थितः।
प्रासादशिखरस्थोऽपि काकः किं गरुडायते॥
अर्थ-इस श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य की श्रेष्ठता उसके पद या स्थिति से नहीं, बल्कि उसके गुणों से तय होती है। केवल ऊंचे स्थान पर पहुंच जाना किसी को महान नहीं बना देता। जैसे महल की चोटी पर बैठा कौआ भी गरुड़ नहीं बन सकता, उसी प्रकार बिना उत्कृष्ट गुणों के कोई व्यक्ति श्रेष्ठ नहीं कहलाता।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण:
धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।


