Quote Of The Day: इन 4 चीजों से बना लें दूरी, जीवन होगा सुखी, पढ़ें आचार्य चाणक्य के विचार

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aaj ka vichar: जीनव को सुखी बनाने के लिए इंसान को सही मार्गदर्शन की बहुत जरुरत होती है। आचार्य चाणक्य की शिक्षाएं आज भी लोगों को सही दिशा दिखाती हैं। चाणक्य नीति में जीवन के हर पहलू-जैसे परिवार, समाज, रिश्ते, करियर और सफलता से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं।

Chanakya niti

Aaj Ka Suvichar: जीनव को सुखी बनाने के लिए इंसान को सही मार्गदर्शन की बहुत जरुरत होती है। आचार्य चाणक्य की शिक्षाएं आज भी लोगों को सही दिशा दिखाती हैं। चाणक्य नीति में जीवन के हर पहलू-जैसे परिवार, समाज, रिश्ते, करियर और सफलता से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। उनका मानना था कि हर व्यक्ति जीवन में सफल होना चाहता है, और सही सोच व व्यवहार से यह संभव है। आज हम आपके लिए चाणक्य नीति के कुछ ऐसे श्लोक लेकर आए हैं, जो जीवन के महत्वपूर्ण सूत्र हैं और जिन्हें अपनाकर आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

श्लोक 1

धर्मार्थ काम मोक्षेषु यस्यैकोऽपि न विद्यते।
जन्मजन्मनि मर्येष मरणं तस्य केवलम् ॥

अर्थ- श्लोक में चाणक्य कहते हैं कि जिस व्यक्ति के जीवन में धर्म यानी सही आचरण, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों में से एक भी नहीं होता, उसका जीवन बार-बार जन्म और मृत्यु के चक्र में ही बीतता है। अगर इंसान अपने जीवन में इन चार मुख्य उद्देश्यों में से किसी पर भी ध्यान नहीं देता, तो उसका जीवन व्यर्थ चला जाता है और उसे केवल जन्म-मरण का चक्र ही मिलता है।

श्लोक 2

त्यजेद्धर्म दयाहीनं विद्याहीनं गुरुं त्यजेत् ।
त्यजेत्क्रोधमुखीं भार्यान्निः स्नेहानबंधवांस्त्यजेत् ॥

अर्थ- श्लोक में चाणक्य कहते हैं कि जिस धर्म में दया न हो, उसे छोड़ देना चाहिए। जिस गुरु के पास ज्ञान न हो, उसे भी त्याग देना चाहिए। क्रोध करने वाली पत्नी को त्याग देना चाहिए, और ऐसे रिश्तेदारों को भी छोड़ देना चाहिए जिनमें स्नेह न हो। जीवन में वही चीजें और रिश्ते रखने चाहिए जो अच्छे, समझदार और प्रेम से भरे हों। जहां दया, ज्ञान और स्नेह न हो, वहां से दूर रहना ही बेहतर है।

श्लोक 3

अध्वा जरा मनुष्याणां वाजिनां बंधनं जरा।
अमैथुनं जरा स्त्रीणां वस्त्राणामातपं जरा॥

अर्थ- श्लोक में चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति हमेशा यात्रा पर रहते हैं या अपना क्षमता से अधिक चलते हैं उनकी उम्र जल्द ढलने लग जाती है। यात्रा की थकान और अनियमित रूटीन के कारण लोग जल्द बुढ़ापे का शिकार हो जाते हैं। जो स्त्री अपने पति से शारीरिक सुख नहीं पाती वह जल्दी बुढ़ापे की श्रेणी में आने लगती है। चाणक्य ने श्लोक में ये भी बताया है कि जिस घोड़े को ज्यादातर बांधकर रखा जाए वह जल्द बूढ़ा हो जाता है।

श्लोक 4

यथा चतुर्भिः कनकं पराक्ष्यते निघर्षणं छेदनतापताडनैः।
तथा चतुर्भिः पुरुषः परीक्ष्यते त्यागेन शीलेन गुणेन कर्मणा ॥

अर्थ- चाणक्य कहते हैं कि जिस तरह से सोने को चार तरीकों से परखा जाता है, घिसकर, काटकर, गर्म करके और पीटकर, ठीक वैसे ही इंसान की पहचान भी चार बातों से होती है- त्याग, आचरण (शील), गुण और कर्म से।

श्लोक 5

तावद्भयेन भेतव्यं यावद् भयमनागतम्।
आगतं तु भयं वीक्ष्यं प्रहर्तव्यमशंकया ॥

अर्थ- आचार्य चाणक्य इस श्लोक में कहते हैं कि डर तब तक ही रखना चाहिए, जब तक खतरा सामने न आया हो। लेकिन जब खतरा सामने आ जाए, तो बिना घबराए उसका सामना करना चाहिए।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Dheeraj Pal

लेखक के बारे में

Dheeraj Pal

संक्षिप्त विवरण: धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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