Quote Of The Day: ये 5 आदतें इंसान को बनाती है ज्ञानवान और सफल,पढ़ें आचार्य चाणक्य के विचार
aaj ka vichar: चाणक्य की शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक और उपयोगी मानी जाती हैं। उन्होंने रिश्तों, व्यवहार और सफलता के मूल सिद्धांतों को बेहद सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाया है।

Aaj Ka Vichar: चाणक्य की शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक और उपयोगी मानी जाती हैं। उन्होंने रिश्तों, व्यवहार और सफलता के मूल सिद्धांतों को बेहद सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाया है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इन बातों को अपने जीवन में अपनाता है, उसके लिए आगे बढ़ना और सफलता पाना आसान हो जाता है। नीचे कुछ ऐसे श्लोक दिए गए हैं, जो जीवन को सही दिशा दिखाने और समस्याओं से बचने में मददगार साबित होते हैं।
श्लोक 1
शैले शैले न माणिक्यं मौक्तिकं न गजे गजे।
साधवो नहि सर्वत्र चन्दनं न वने वने॥
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि हर पहाड़ पर मणि यानी रत्न नहीं मिलते, हर हाथी के सिर में मोती नहीं होता। उसी तरह हर जगह सज्जन लोग नहीं होते और हर जंगल में चंदन के पेड़ नहीं पाए जाते। दुनिया में अच्छी और मूल्यवान चीजें हर जगह नहीं मिलतीं। जैसे रत्न, मोती और चंदन दुर्लभ होते हैं, वैसे ही अच्छे और गुणवान लोग भी बहुत कम होते हैं।
श्लोक 2
माता शत्रुः पिता वैरी येन बालो न पाठितः।
न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये वको यथा॥
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जैसे हंसों की सभा में बगुला अच्छा नहीं लगता और उसकी उपस्थिति उसे उपहास का कारण बना देती है, वैसे ही जो व्यक्ति शिक्षित नहीं होता वह विद्वानों की सभा में सम्मान नहीं पाता। ऐसे स्थान पर उसकी कम जानकारी उसे हास्य का पात्र बना सकती है। चाणक्य यह भी कहते हैं कि जो माता-पिता अपने बच्चों को शिक्षा नहीं दिलाते या उनके ज्ञान के विकास पर ध्यान नहीं देते, वे कहीं न कहीं उनके हितैषी नहीं बल्कि अहित करने वाले साबित होते हैं। चाणक्य नीति के अनुसार, शिक्षा से वंचित रहने वाला बच्चा जीवनभर कई कठिनाइयों का सामना करता है और ज्ञान के अभाव में आगे बढ़ने में बाधाओं से घिरा रहता है।
श्लोक 3
श्लोकेन वातदर्द्धन, तदर्द्धाऽर्दाक्षरेण वा।
अवन्ध्यं दिवसं कुर्याद्दानाध्ययनकर्मभिः ॥
मनुष्य को चाहिए कि वह अपने दिन को व्यर्थ न जाने दे। यदि पूरा श्लोक पढ़ने का समय न हो, तो आधा श्लोक ही सही, और यदि वह भी संभव न हो तो एक अक्षर ही पढ़े। साथ ही दान और अध्ययन जैसे अच्छे कार्य करके दिन को सार्थक बनाए। जीवन का कोई भी दिन बेकार नहीं जाना चाहिए। चाहे थोड़ा ही सही, लेकिन हर दिन कुछ न कुछ सीखना और अच्छे कर्म करना जरूरी है। यही आदत व्यक्ति को ज्ञानवान और सफल बनाती है।
श्लोक 4
लालनाद् बहवो दोषास्ताडनाद् बहवो गुणाः,
तस्मात्पुत्रं च शिष्यं च ताडयेन्नतुलालयेत्।।
आचार्य चाणक्य के अनुसार, जरूरत से ज्यादा लाड़-प्यार बच्चों को जिद्दी बना सकता है और उनमें हर बात अपनी मनमर्जी से करने की आदत विकसित हो जाती है। ऐसी प्रवृत्ति आगे चलकर उनके लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। जिद्द की आदत न तो बच्चों के लिए अच्छी होती है और न ही माता-पिता के लिए। इसलिए आवश्यक है कि बच्चों को उनकी गलती पर समय-समय पर समझाया और डांटा जाए, ताकि वे सही और गलत में अंतर समझ सकें। ऐसा करने से उनमें अच्छे गुणों का विकास होता है और उनका भविष्य भी बेहतर बनता है।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव
धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
न्यूमरोलॉजी
रत्न विज्ञान


