Quote Of The Day: मुक्ति चाहते हो, तो इस चीज को जहर की तरह छोड़ दो, पढ़ें आचार्य चाणक्य के विचार
aaj ka vichar: चाणक्य केवल एक महान शिक्षक और कुशल रणनीतिकार ही नहीं थे, बल्कि मानव स्वभाव और जीवन की गहराइयों को समझने वाले श्रेष्ठ विचारक भी थे। माना जाता है कि जो व्यक्ति उनकी नीतियों को अपने जीवन में अपनाता है, उसके लिए सफलता के रास्ते स्वतः खुलने लगते हैं।

Aaj Ka Suvichar: चाणक्य केवल एक महान शिक्षक और कुशल रणनीतिकार ही नहीं थे, बल्कि मानव स्वभाव और जीवन की गहराइयों को समझने वाले श्रेष्ठ विचारक भी थे। उन्होंने अपनी नीतियों के माध्यम से जीवन, रिश्तों और व्यवहार से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों को बेहद सरल और व्यावहारिक ढंग से समझाया है। उनकी शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी प्राचीन काल में थीं। माना जाता है कि जो व्यक्ति उनकी नीतियों को अपने जीवन में अपनाता है, उसके लिए सफलता के रास्ते स्वतः खुलने लगते हैं। नीचे ऐसे ही कुछ श्लोक दिए गए हैं, जिन्हें अपनाकर जीवन की कई समस्याओं से बचा जा सकता है।
श्लोक 1
मुक्तिमिच्छासि चेत्तात! विषयान् विषवत्त्यज।
क्षमाऽऽर्जवं दया शौचं सत्यं पीयूषवत्पिब॥
अर्थ- आचार्य चाणक्य के मुताबिक अगर तुम मुक्ति चाहते हो, तो विषय-वासनाओं यानी भौतिक सुखों को जहर की तरह छोड़ दो। और क्षमा, सरलता , दया, पवित्रता और सत्य को अमृत की तरह अपनाओ। इससे आपको मुक्ति मिल जाएगी।
श्लोक 2
गन्धः सुवर्णे फलमिक्षुदण्डे नाकारि पुष्पं खलु चन्दनेषु।
विद्वान् धनाढ्यो न तु दीर्घजीवी धातुः पुरा कोपि न बुद्धिदोभूत।।
अर्थ- चाणक्य के अनुसार, जैसे सोने में खुशबू नहीं होती, गन्ने में फल नहीं लगते और चंदन के पेड़ पर फूल नहीं होते, उसी तरह हर गुण एक साथ नहीं मिलता। विद्वान व्यक्ति हमेशा धनी नहीं होता और राजा हमेशा लंबी उम्र नहीं पाता। सृष्टि के रचयिता ने जैसा उचित समझा, वैसा ही नियम बनाया है और इन नियमों में बदलाव संभव नहीं है।
श्लोक 3
परस्परस्य मर्माणि ये भाषन्ते नराधमाः।
त एव विलयं यान्ति वल्मीकोदरसर्पवत् ।।
अर्थ- चाणक्य के अनुसार, जो लोग दूसरों के गुप्त रहस्यों को उजागर करते हैं, वे पतित, अधम और दुष्ट स्वभाव के होते हैं। ऐसे लोग दूसरों को अपमानित करके पहले तो खुशी महसूस करते हैं, लेकिन अंत में उनका स्वयं ही नाश हो जाता है, जैसे बांस में फंसा सर्प खुद को नहीं बचा पाता। आचार्य का संदेश है कि मनुष्य को ऐसे लोगों से हमेशा दूर रहना चाहिए, क्योंकि वे अवसर मिलने पर आपके धन और जीवन, दोनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
श्लोक 4
यस्मिन रुष्टे भयं नास्ति तुष्टे नैव धनागमः।
निग्रहाऽनुग्रहोनास्ति स रुष्टः किं करिष्यति ॥
अर्थ- चाणक्य के अनुसार, जिस व्यक्ति के क्रोधित होने पर कोई डर नहीं लगता और प्रसन्न होने पर भी कोई लाभ नहीं मिलता, ऐसे व्यक्ति की नाराजगी या खुशी का कोई विशेष महत्व नहीं होता। अर्थात, जिस इंसान के पास न दंड देने की शक्ति है और न ही किसी को पुरस्कार देने की क्षमता, उसके गुस्सा होने या खुश होने से किसी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
श्लोक 5
दरिद्रता धीरतया विराजते। कुवस्त्रता शुभ्रतया विराजते ॥
कदन्नता चोष्णतया विराजते। कुरूपता शीलतया विराजते ॥
अर्थ- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति गरीब है, लेकिन उसके अंदर सब्र है, तो उसकी गरीबी भी सम्मानजनक लगती है। अगर कपड़े साधारण या पुराने हैं, लेकिन साफ-सुथरे हैं, तो वे भी अच्छे लगते हैं। साधारण या कम स्वाद वाला भोजन भी अगर गरम और ताजा हो, तो अच्छा लगता है। अगर कोई व्यक्ति सुंदर नहीं है, लेकिन उसका स्वभाव अच्छा है, तो वह आकर्षक लगता है।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
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परिचय और अनुभव
धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
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