Quote of the day: जीवन में इन 4 चीजों को हमेशा दें महत्व, जीवन रहेगा सुखी, पढ़ें आचार्य चाणक्य के अनमोल विचार

Dheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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आचार्य चाणक्य बहुज्ञानी विद्वान थे, जिन्होंने राजनीति, अर्थशास्त्र और जीवन-प्रबंधन जैसे कई विषयों में गहरी समझ विकसित की थी। चाणक्य ने अपनी नीतियों के जरिए मानव जीवन को बहुत ही व्यावहारिक और तार्किक तरीके से समझाया है। आइए जानते हैं उनकी कुछ महत्वपूर्ण बातें, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।

Quote of the day: जीवन में इन 4 चीजों को हमेशा दें महत्व, जीवन रहेगा सुखी, पढ़ें आचार्य चाणक्य के अनमोल विचार

आचार्य चाणक्य बहुज्ञानी विद्वान थे, जिन्होंने राजनीति, अर्थशास्त्र और जीवन-प्रबंधन जैसे कई विषयों में गहरी समझ विकसित की थी। वे एक श्रेष्ठ गुरु, मार्गदर्शक और कुशल रणनीतिकार के रूप में जाने जाते हैं। माना जाता है कि अगर कोई व्यक्ति आज भी उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाए, तो वह सफलता की ओर तेजी से बढ़ सकता है। चाणक्य ने अपनी नीतियों के जरिए मानव जीवन को बहुत ही व्यावहारिक और तार्किक तरीके से समझाया है। आइए जानते हैं उनकी कुछ महत्वपूर्ण बातें, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।

श्लोक 1

“मांसभक्ष्याः सुरापानामूर्खाश्चाक्षरवर्जिताः।
पशुभिः पुरुषाकारेर्भाराक्रान्तास्ति मेदिनी॥

इस श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो लोग मांस खाने वाले, शराब पीने वाले, मूर्ख और अशिक्षित होते हैं, वे मनुष्य के रूप में होते हुए भी पशु समान होते हैं। ऐसे लोगों के कारण धरती बोझिल हो जाती है।

श्लोक 2

“अन्नहीनोददेद् राष्ट्रं मन्त्रहीनश्च ऋत्विजः।
यजमानं दानहीनो नास्ति यज्ञसमो रिपुः॥”

इस श्लोक का अर्थ है कि जिस यज्ञ में अन्न न हो, वह पूरे राष्ट्र को नुकसान पहुंचाता है। जिस यज्ञ में सही मंत्र न हों, वह पुजारियों (ऋत्विजों) को कष्ट देता है। और जिसमें दान न दिया जाए, वह यजमान (करने वाले) को ही हानि पहुंचाता है। इसलिए गलत तरीके से किया गया यज्ञ सबसे बड़ा शत्रु समान होता है।

श्लोक 3

“मुक्तिमिच्छसि चेत् तात विषयान् विषवत् त्यज।
क्षमार्जवदयाशौचं सत्यं पीयूषवत् पिब॥”

इस श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि यदि तुम मुक्ति यानी मोक्ष चाहते हो, तो भोग-विलास को विष की तरह त्याग दो। इसके अलावा जीवन में क्षमा, सरलता, दया, पवित्रता और सत्य को अमृत की तरह अपनाओ। इससे ना सिर्फ अपना उद्धार करेंगे, बल्कि जग भी कल्याण होगा।

श्लोक 4

“परस्परस्य मर्माणि ये भाषन्ते नराधमाः।
ते एव विलयं यान्ति वल्मीकोदर सर्पवत्॥”

इस श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो लोग दूसरों के रहस्य (कमजोरियां) उजागर करते हैं, वे नीच होते हैं। ऐसे लोग अंत में उसी तरह नष्ट हो जाते हैं, जैसे बिल में रहने वाला सांप खुद ही मर जाता है।

श्लोक 5

गंधः सुवर्णफलमिश्नुदंडेना कारिपुव्यंखलुचंदन स्य ॥
विद्वान्नूधनीभूपतिर्दीर्घजीवीधातुः पुरा कोऽपिनबुडिडोऽभूत्

इस श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि अगर सोने में सुगंध होती, फूल में फल होता, चंदन में फूल होते, विद्वान व्यक्ति धनी होता और राजा अमर (लंबे समय तक जीवित) होता, तो यह सब बहुत अच्छा होता। लेकिन ऐसा नहीं है, इससे यह समझ आता है कि सृष्टि बनाने वाले ने सब कुछ बराबर नहीं दिया है। हर चीज में कुछ न कुछ कमी छोड़ी है।

श्लोक 6

सर्वोपधीनाममृता प्रधानासर्वेतुसौख्येप्वशनंप्र धानम् ॥
सर्वेदैयिन्णांनयनं प्रधानंसर्वेषुगात्रेषु शिरः प्रधानम्।।

आचार्य चाणक्य कहते है कि सभी औषधियों में अमृत सबसे महत्वपूर्ण है। सभी सुखों में भोजन (खाना) सबसे जरूरी है। सभी इंद्रियों में दृष्टि सबसे श्रेष्ठ है। और शरीर के सभी अंगों में सिर सबसे महत्वपूर्ण है। बिना भोजन के सुख अधूरा है, बिना आंख के इंद्रियों का महत्व कम हो जाता है और बिना सिर के शरीर का कोई महत्व नहीं रहता। इसका अर्थ है कि जीवन में हमेशा उस चीज को पहचानो जो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है और उसे प्राथमिकता दो।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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परिचय और अनुभव

धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
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