Quote Of The Day: जीवन, मृत्यु, सुख-दुख... सब कुछ समय के अधीन है,पढ़ें आचार्य चाणक्य के विचार

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aaj ka vichar: चाणक्य की शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक और उपयोगी मानी जाती हैं। माना जाता है कि जो व्यक्ति इन बातों को अपने जीवन में उतार लेता है, उसके लिए आगे बढ़ना और सफलता हासिल करना अधिक सहज हो जाता है।

Quote Of The Day: जीवन, मृत्यु, सुख-दुख... सब कुछ समय के अधीन है,पढ़ें आचार्य चाणक्य के विचार

Aaj Ka Suvichar: चाणक्य की शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक और उपयोगी मानी जाती हैं। उन्होंने रिश्तों, आचरण और सफलता के मूल सिद्धांतों को बेहद सरल और व्यावहारिक रूप में समझाया है। माना जाता है कि जो व्यक्ति इन बातों को अपने जीवन में उतार लेता है, उसके लिए आगे बढ़ना और सफलता हासिल करना अधिक सहज हो जाता है। नीचे कुछ ऐसे श्लोक दिए गए हैं, जो जीवन को सही दिशा देने और परेशानियों से बचने में सहायक हैं।

श्लोक 1

भ्रमन्सम्पूज्यते राजा भ्रमन्सम्पूज्यते द्विजः।

भ्रमन्संपूज्यते योगी स्त्री भ्रमन्ती विनाश्यति ।।

चाणक्य इस श्लोक में चार प्रकार के लोगों का जिक्र करते हुए भ्रमण के महत्व को समझाते हैं। वे कहते हैं कि जो राजा या शासक अपने राज्य में लगातार भ्रमण करता है, उसे जनता का प्रेम, सम्मान और आदर प्राप्त होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि भ्रमण के माध्यम से वह अपनी प्रजा की समस्याओं को समझ पाता है और उनका समाधान कर उन्हें संतुष्ट करता है, जिससे वह पूजनीय बन जाता है। चाणक्य के अनुसार, यही सिद्धांत ब्राह्मण यानी विद्वान और योगियों पर भी लागू होता है। जब वे अलग-अलग जगहों पर जाकर ज्ञान का प्रसार करते हैं, तभी उन्हें समाज में प्रतिष्ठा और सम्मान मिलता है। एक ही स्थान पर रहने वाला विद्वान अपनी पहचान और उद्देश्य को सीमित कर लेता है, जबकि ज्ञान को फैलाने से उसका जीवन अधिक सार्थक बनता है। इसके विपरीत, चाणक्य कहते हैं कि यदि कोई स्त्री बिना किसी उद्देश्य के इधर-उधर भटकती है, तो समाज में उसकी नकारात्मक छवि बनती है। ऐसे व्यवहार से उसे सम्मान नहीं मिल पाता और आखिर में उसे नुकसान उठाना पड़ सकता है।

श्लोक 2

तादृशी जायते बुद्धिर्व्यवसायोऽपि तादृशः।

सहायास्तादृशा एव यादृशी भवितव्यता ॥

आचार्य चाणक्य इस श्लोक में कहते हैं कि जैसी हमारी नियति होती है, वैसी ही हमारी बुद्धि बनती है, उसी के अनुसार हमारे कर्म होते हैं और वैसे ही हमारे सहयोगी भी मिलते हैं। अर्थात, मनुष्य के जीवन में जो कुछ होने वाला होता है, उसी के अनुसार उसकी सोच, निर्णय और साथ मिलने वाले लोग तय हो जाते हैं। यह श्लोक इस बात की ओर संकेत करता है कि जीवन में होने वाली घटनाएं केवल संयोग नहीं होतीं, बल्कि वे हमारी नियति और कर्मों से जुड़ी होती हैं।

श्लोक 3

कालः पचति भूतानि कालः संहरते प्रजाः।

कालः सुप्तेषु जागर्ति कालो हि दुरतिक्रमः॥

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि समय ही सभी प्राणियों को नष्ट करता है और वही उन्हें उत्पन्न भी करता है। जब सब सो जाते हैं, तब भी काल जागृत रहता है। वास्तव में, समय को कोई पार नहीं कर सकता। इसका भाव यह है कि समय सबसे शक्तिशाली है। हर चीज समय के अधीन है, जीवन, मृत्यु, सुख और दुःख। चाहे कोई कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, वह समय के प्रभाव से बच नहीं सकता। इसलिए मनुष्य को समय का सम्मान करना चाहिए और उसका सदुपयोग करना चाहिए।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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परिचय और अनुभव

धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
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