Quote Of The Day: जो दूसरों के गुणों की पहचान नहीं कर पाता, वो अच्छे लोगों की निंदा करता है, पढ़ें आज के विचार
माना जाता है कि जो व्यक्ति इन बातों को अपने जीवन में अपनाता है, उसके लिए आगे बढ़ना और सफलता पाना आसान हो जाता है। नीचे कुछ ऐसे श्लोक दिए गए हैं, जो जीवन में सही दिशा दिखाने और समस्याओं से बचने में मदद करते हैं।

Aaj Ka Suvichar: आचार्य चाणक्य की शिक्षाएं आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। उन्होंने रिश्तों, व्यवहार और सफलता के सिद्धांतों को बहुत ही सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाया है। माना जाता है कि जो व्यक्ति इन बातों को अपने जीवन में अपनाता है, उसके लिए आगे बढ़ना और सफलता पाना आसान हो जाता है। नीचे कुछ ऐसे श्लोक दिए गए हैं, जो जीवन में सही दिशा दिखाने और समस्याओं से बचने में मदद करते हैं।
श्लोक 1
न वेत्ति तो यस्य गुण प्रकर्ष, सतं सदा निन्दति नाऽत्र चित्रम्।
यथा किराती करिकुम्भलब्धां, मुक्तां परित्यज्य बिभर्ति गुञ्जाम्।।
अर्थ- आचार्य चाणक्य के मुताबिक जो व्यक्ति दूसरों के गुणों और श्रेष्ठता को पहचान नहीं पाता, वह हमेशा अच्छे लोगों की निंदा करता है, इसमें कोई आश्चर्य नहीं है। जैसे कोई अनपढ़ या अज्ञान व्यक्ति हाथी के मस्तक से मिली अनमोल मोती को छोड़कर साधारण गुंजा यानी छोटा बीज को ही संभाल कर रखता है। मूर्ख या अज्ञान व्यक्ति अच्छे गुणों की कद्र नहीं कर पाता। वह कीमती चीज छोड़कर बेकार चीज को महत्व देता है और अच्छे लोगों की आलोचना करता रहता है।
श्लोक 2
ये तु संवत्सरं पूर्ण नित्यं मौनेन भुंजते।
युगकोटि सहस्त्रन्तु स्वर्गलोके महीयते ।।
अर्थ- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति पूरे एक साल तक रोज मौन रहकर भोजन करता है, वह स्वर्ग लोक में करोड़ों युगों तक सम्मानित होता है। यह श्लोक हमें सिखाता है कि भोजन करते समय शांति, संयम और सजगता बहुत महत्वपूर्ण है। जो व्यक्ति बिना बोलचाल के, ध्यानपूर्वक भोजन करता है, उसे आध्यात्मिक लाभ और सम्मान प्राप्त होता है।
श्लोक 3
कामं क्रोधं तथा लोभं स्वादुश्रृंगारकौतुकम्।
अतिनिद्राऽतिसेवा च विद्यार्थी ह्यष्ट वर्जयेत् ।।
अर्थ- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि विद्यार्थी को काम, क्रोध, लोभ, स्वाद, शृंगार, कौतुक, अधिक नींद और दूसरों की अधिक सेवा, इन आठ चीजों से दूर रहना चाहिए। पढ़ाई करने वाले छात्र को अनुशासन में रहना चाहिए। जो चीजें ध्यान भटकाती हैं या समय बर्बाद करती हैं, उनसे दूरी बनाकर ही सफलता पाई जा सकती है।
श्लोक 4
परकार्यविहन्ता च दाम्भिकः स्वार्थसाधकः।
छली द्वेषी मृदुक्रूरो विप्रो मार्जार उच्यते।।
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति दूसरों के काम में बाधा डालता है, दिखावा करता है, सिर्फ अपना स्वार्थ साधता है, छल-कपट करता है, द्वेष रखता है और ऊपर से मीठा लेकिन अंदर से कठोर होता है, ऐसा व्यक्ति ‘बिल्ली के समान’ कहा जाता है। यह श्लोक ऐसे लोगों से सावधान रहने की सीख देता है जो बाहर से बहुत अच्छे और नरम दिखते हैं, लेकिन अंदर से स्वार्थी और नुकसान पहुंचाने वाले होते हैं। ऐसे लोग भरोसे के योग्य नहीं होते।
श्लोक 5
सानन्दं सदनं सुतास्तु सधियः कांता प्रियालापिनी इच्छापूर्ति धनं स्वयोषितिरतिः
स्वाज्ञापराः सेवकाः आतिथ्यं शिवपूजनं प्रतिदिनं मिष्टान्नपानं गृहे साधोः
सुङ्गमुपासते च सततं धन्यो गृहस्थाश्रमः ॥
अर्थ- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिस घर में हमेशा आनंद बना रहता है, बुद्धिमान बच्चे होते हैं, पत्नी मधुर बोलने वाली और प्रिय होती है, जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन होता है, पति-पत्नी में प्रेम रहता है, सेवक आज्ञाकारी होते हैं, मेहमानों का सम्मान किया जाता है, रोज भगवान शिव की पूजा होती है, घर में अच्छा भोजन-पान मिलता है और अच्छे लोगों का साथ बना रहता है, वह गृहस्थ जीवन वास्तव में धन्य होता है।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव
धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
न्यूमरोलॉजी
रत्न विज्ञान


