Quote Of The Day: शेर से 1, कुत्ते से 5 और गधे से 3 गुण इंसानों को सीखनी चाहिए...पढ़ें आचार्य चाणक्य के विचार

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चाणक्य ने इंसानों को कौआ, कुत्ता और गधे जैसे जानवरों से भी गुण सीखने की प्रेरणा दी है। इन गुणों को अपनाकर व्यक्ति न केवल सफलता हासिल कर सकता है, बल्कि एक बेहतर और संतुलित जीवन भी जी सकता है। आइए जानते हैं चाणक्य के उन श्लोकों के बारे में, जिनमें उन्होंने इन जानवरों के गुणों का वर्णन किया है।

Quote Of The Day: शेर से 1, कुत्ते से 5 और गधे से 3 गुण इंसानों को सीखनी चाहिए...पढ़ें आचार्य चाणक्य के विचार

Aaj Ka Vichar:आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक मानी जाती हैं। उन्होंने अपने श्लोकों के माध्यम से जीवन को सफल और संतुलित बनाने की कई महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। खास बात यह है कि उन्होंने इंसानों को कौआ, कुत्ता और गधे जैसे जानवरों से भी गुण सीखने की प्रेरणा दी है। इन गुणों को अपनाकर व्यक्ति न केवल सफलता हासिल कर सकता है, बल्कि एक बेहतर और संतुलित जीवन भी जी सकता है। आइए जानते हैं चाणक्य के उन श्लोकों के बारे में, जिनमें उन्होंने इन जानवरों के गुणों का वर्णन किया है।

सिंहादेकं वकादेकं शिक्षेच्चत्वारि कुक्कुटात्।
वायसात्पञ्च शिक्षेच्चष्ट्र शुनस्त्रीणिगर्दभात् ॥

आचार्य चाणक्य ने इस श्लोक में बताया है कि इंसान को अलग-अलग जीवों से अच्छे गुण सीखने चाहिए। वो कहते हैं कि सिंह यानी शेर से 1 गुण, बगुले से 1 गुण, मुर्गे से 4 गुण, कौए से 5 गुण, कुत्ते से 6 गुण और गधे से 3 गुण सीखने चाहिए। वो आगे कहते हैं कि-

शेर से 1 गुण सीखे

प्रभूतं कार्यमपि वा तन्नरः कर्तुमिच्छति।
सर्वारम्भेण तत्कार्यं सिंहादेकं प्रचक्षते॥

इस श्लोक में आचार्य चाणणक्य ने शेर के उस गुण का वर्णन किया है जो इंसानों को सिखना चाहिए। वो कहते हैं कि कोई काम छोटा हो या बहुत बड़ा, समझदार व्यक्ति उसे पूरी ताकत और पूरे प्रयास से करता है। यही एक गुण हमें शेर से सीखना चाहिए। अगर हम हर काम को शेर की तरह पूरी ताकत और आत्मविश्वास से करेंगे, तो सफलता मिलने के संभावना बहुत बढ़ जाती है। वो आगे कहते हैं कि -

बगुले से 1 गुण सीखें

इन्द्रियाणि च संयम्य वकवत् पण्डितो नरः।
देशकालबलं ज्ञात्वा सर्वकार्याणि साधयेत् ॥

इस श्लोक में बगुले के गुण को बताया है। वो कहते हैं कि बुद्धिमान व्यक्ति को अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए और बगुले की तरह धैर्य और एकाग्रता से काम करना चाहिए। साथ ही, सही समय, स्थान और अपनी क्षमता को समझकर ही काम करना चाहिए, तभी सफलता मिलती है।

मुर्गे से 4 गुण सीखें

प्रत्युत्थानञ्च युध्च संविभागञ्च बन्धुषु।
स्वयमाक्रम्यभुक्तञ्चशिक्षेच्चत्वारिकुक्कुटात् ॥

इस श्लोक में आचार्य चाणक्य ने इंसानों को मुर्गे से कौन से 4 गुण सीखने चाहिए, उसका वर्णन किया है। वो कहते हैं कि मनुष्य को मुर्गे से चार बातें सीखनी चाहिए-

1. समय पर उठना

2. जरूरत पड़ने पर लड़ने के लिए तैयार रहना

3. अपने लोगों के साथ बांटकर खाना

4. खुद मेहनत करके भोजन प्राप्त करना

कौए से 5 गुण सीखें

गूढ मैथुनचारित्वं काले काले च संग्रहम्।
अप्रमत्तमविश्वासं पञ्च शिक्षेच्च वायसात्॥

इस श्लोक में आचार्य चाणक्य ने बताया है कि कौए से कौन से 5 गुण सीखनी चाहिए।

1. निजी बातों को गुप्त रखना

2.समय-समय पर बचत करना

3. हमेशा सतर्क रहना

4. आलस्य न करना

5. किसी पर जल्दी भरोसा न करना

कुत्ते से 6 गुण सीखे

बह्वाशी स्वल्प सन्तुष्टः सनिद्रो लघुचेतनः।
स्वामिभक्तश्च शूरश्च षडेतो श्वानतो गुणाः ॥

इस श्लोक में आचार्य चाणक्य ने बताया है कि कुत्ते से 6 गुण कौन से सीखने चाहिए।

1. ज्यादा खाने की क्षमता, लेकिन कम में भी संतोष करना

2. गहरी नींद लेना, लेकिन तुरंत जाग जाना

3. सतर्क और समझदार रहना

4. अपने मालिक और परिवार के प्रति वफादार रहना

5. बहादुर होना

6. हमेशा तैयार रहना

गधे से 3 गुण सीखें

सुश्रान्तोऽपि वहेत भारं शीतोष्णं न च पश्यति।

सन्तुष्टश्वरते नित्यं त्रीणि शिक्षेच्च गर्दभात् ॥

इस श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य को गधे से 3 गुण सीखने चाहिए-

1. थकने के बाद भी काम करना

2. सर्दी-गर्मी की परवाह न करना

3. हमेशा संतुष्ट रहना

गधा बहुत मेहनती होता है। थकने के बाद भी बोझ उठाता रहता है। गधा मौसम की ज्यादा चिंता नहीं करता, हर हाल में काम करता है। गधा जो भी मिलता है, उसमें संतुष्ट रहता है।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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