Quote of the Day:किन लोगों को घमंड नहीं करना चाहिए, पृथ्वी पर रत्नों की कमी नहीं

Anuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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आचार्य चाणक्य ने कई बातों को लेकर ज्ञान दिया है, उनके श्लोक इतने सहज होते हैं कि आसानी से सभी के समझ में आ जाते हैं। यहां भी हम आपको आचार्य चाणक्य के श्लोक के जरिए आपको काफी चीजों के बारे में बताएंगे। 

Quote of the Day:किन लोगों को घमंड नहीं करना चाहिए, पृथ्वी पर रत्नों की कमी नहीं

आचार्य चाणक्य ने कई बातों को लेकर ज्ञान दिया है, उनके श्लोक इतने सहज होते हैं कि आसानी से सभी के समझ में आ जाते हैं। यहां भी हम आपको आचार्य चाणक्य के श्लोक के जरिए आपको काफी चीजों के बारे में बताएंगे।

वित्तं देहि गुणान्वितेषु मतिमन्नान्यत्र देहि क्वचित्‌ प्राप्तं वारिनिधेर्जलं घनमुखे माधुर्ययुक्तं सदा | जीवान्‌ स्थावरजंगमांश्च सकलान्‌ सञ्जीव्य भूमण्डले भूयः पश्य तदेव कोटिगुणितं गच्छन्तमम्भोनिधिम्‌ ।|

बुद्धिमान्‌ लोग जो हैं, वो इस बात को अच्छे से समझ लें कि वो धन सिर्फ गुणी लोगों को दे, अन्य को किसी को नहीं, क्योंकि गुणी व्यक्ति ही धन का सही इस्तेमाल करना जानते हैं। जब समुद्र का जल बादल के मुख में जाता है तो मधुर बन जाता है। भूलोक में सभी प्राणियों और स्थावर और जंगलों को जीवन प्रदान कर पुनः करोड़ गुणा बने हुए उसे समुद्र की ओर जाते हुए देख।

राज्ञि धर्मिणि धर्मिष्ठाः पापे पापाः समे समा: | राजानमनुवर्तन्ते यथा राजा तथा प्रजाः।।७।।

राजा यदि धर्मात्मा होगा तो प्रजा भी वैसी होगी, इसका अर्थ है कि जैसा राजा होता है वैसी प्रदजा भी होती है। अगर राजा पापी है, पाप कर्म करता है तो तो प्रजा भी पापी होगी, यदि बीच की वृत्ति का वह हुआ तो वह भी वैसी होगी। प्रजा राजा का अनुसरण करती है, जैसा राजा वैसी प्रजा। इसलिए राजा को हमेशा अच्छे कार्य करने चाहिए। अंधेर नगरी चौपट राजा की कहावत भी कुछ ऐसी ही है।

दाने तपसि शौर्य वा विज्ञाने विनये नये। विस्मयो* नहि कर्तव्यो बहुरत्ना वसुन्धरा | I

दान, तपस्या, शूरवीरता, विज्ञान, नम्रता तथा नीति को लेकर घमंड नहीं करना चाहिए, ैसा नहीं है कि आपके पास ही ये चीजे हैं, ये चीजें सभी के पास हैं। पृथ्वी पर बहुत रत्न हैं, इसका मतलब है कि आप ही सिर्फ गणवान नहीं है. पृथ्वी पर एक से बढ़ कर एक दानी, तपस्वी आदि विद्यमान हैं।

हस्ती दानविवर्जितः श्रुतिपुटौ सारस्वतद्रोहिणौ नेत्रे साधुविलोकनेन रहिते पादौ न तीर्थ गतौ | अन्यायार्जितवित्तपूर्णमुदरं गर्वेण तुंगं शिरो रे रे जम्बुक! मुञ्च मुञ्च सहसा नीचं सुनिन्द्यं वपुः ।।

मदजल रहित हाथी, वेद-शास्त्रों से द्रोह करने वाले कान, सज्जनों को न देखने वाले नेत्र, पांव जो तीर्थो में गाए नहीं, अन्याय से कमाए हुए धन से भरा पेट, अहंकार से ऊंचा सिर, अरे गीदड़! अपने अति निन्दनीय शरीर को तुरन्त छोड़ दे, छोड़ दे। इसका अर्थ है कि जो भी व्यक्ति ऐसा है, वो निदंनीय है, ऐसे व्यक्ति को इन कामों को तुरंत छोड़ना चाहिए। इस लिए वेदों को पढ़ेंष अन्याय से पैसा ना कमाएं, घमंड ना करें।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey

शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


परिचय और अनुभव

अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर सफर

अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।


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अनुराधा का उद्देश्य एस्ट्रोलॉजी (धर्म) के माध्यम से राशियों पर ग्रहों के प्रभाव, कुंडली, ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र, भाव और दशा-विश्लेषण को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना है। ग्रहों का व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर क्या असर पड़ता है, इन जटिल ज्योतिषीय अवधारणाओं को आम पाठकों के लिए सुलभ बनाना उनकी प्राथमिकता है। इसके साथ ही टीम का कुशल मार्गदर्शन और कंटेंट की क्वालिटी सुनिश्चित करना भी उनके विजन का अहम हिस्सा है।


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कुंडली एवं ग्रह-दशा के माध्यम से राशियों पर ग्रहों का प्रभाव, नक्षत्रों का आम लोगों की जिंदगी पर असर और इससे जुड़ी एक्सपर्ट से वेरिफाइड सलाह पाठकों तक पहुंचाना उनका प्रमुख कार्य क्षेत्र है। वे धार्मिक और समसामयिक विषयों पर गहराई से अध्ययन कर तथ्यपरक जानकारी प्रस्तुत करती हैं। उनका अनुभव सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यावहारिक और निरंतर शोध पर आधारित है। जन्म कुंडली विश्लेषण, ग्रह-नक्षत्रों की चाल और वैदिक ज्योतिष पर उनकी गहरी पकड़ उनके लेखों को विश्वसनीय बनाती है। खबरों की दुनिया से इतर, अनुराधा जी को किताबें पढ़ना पसंद है, जो उनके शोधपरक लेखन को और समृद्ध बनाता है।


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