Aaj ka suvichar: मनुष्य को सीधा नहीं होना चाहिए, आचार्य चाणक्य ने क्यों कही थी यह बात, पढ़ें कोट्स ऑफ द डे

May 07, 2026 07:57 am ISTAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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aaj ka suvichar, Chanakya niti in hindi: आचार्य चाणक्य की उस समय दी हुई सीख आज भी काम आ रही है। यहां श्लोक के जरिए आपको ज्ञान की बातें पता चलेंगी। आइए पढ़ें उनके कोट्स

Aaj ka suvichar: मनुष्य को सीधा नहीं होना चाहिए, आचार्य चाणक्य ने क्यों कही थी यह बात, पढ़ें कोट्स ऑफ द डे

आचार्य चाणक्य की बातों का आज के जीवन में भी बहुत खास महत्व है। उन्होंने आम जीवन से उदाहरण देकर लोगों को इतनी ज्ञान की बातें समझाई हैं, जो लोगों के बहुत काम आने वाली है। आप किसी बात को उदाहरण के जरिए कैसे समझते हैं, ये आचार्य चाणक्य बहुत अच्छे से जानते थे। उनकी उस समय कही हुई बातें आज भी बहुत मायने रखती हैं और लोगों के लिए प्रकाश पुंज का कार्य करती हैं। यहां पढ़ें उनके श्लोक, जिनसे आप आसानी से आचार्य चाणक्य की बातों को समझ सकते हैं।

नात्यन्तं सरलैर्भाव्यं गत्वा पश्य वनस्थलीम्‌। छिद्यन्ते सरलास्तत्र कुब्जास्तिष्ठन्ति पादपाः | |१२।।

मनुष्यों को बहुत अधिक सीधा नहीं होना चाहिए। आचार्य ने यह बात उन लोगों के लिए लिखी है जो बहुत सीधे और उन्हें कोई भी आसानी से ठग कर चला जाता है। इसके लिए उन्होंने उदाहरण दिया है कि जंगल में जा कर देखो। सीधे यानी चीड़ के वृक्ष तो हीं वहां काटे जाते हैं और टेढ़े-मेढ़े खड़े रहते हैं।, क्योंकि सीधे पेड़ को काटना आसान है और टेढ़े-मेढ़े पेड़ को काटना मश्किल है।

तुष्यन्ति भोजने विप्रा मयूरा घनगर्जिते |

साधवः परसम्पत्तौ खलः परविपत्तिषु | |

यहां आचार्य सभी इंसानों की प्रवृत्ति के बारे में बता रहे हैं। उन्होंने बताया है कि ब्राह्मणों को भोजन में सन्तोष मिलता है, मोरों को बादलों के गर्जन में, सज्जनों को दूसरों की खुशहाली में और दुष्टों को दूसरों की बेहाली में। इसका अर्थ है हर प्राणी की अपनी प्रवृत्ति है, कोईकैसे खुश होता है और कोई कैसे, लेकिन जो बुरी प्रवृत्ति का इंसान है, उसे दूसरों को परेशान करके ही सख मिलता है।

त्रोदक तत्र वसन्ति हंसास्तथैव शुष्कं परिवर्जयन्ति |

न हंसतुल्येन नरेण भाव्यं पुनस्त्यजन्ते पुनराश्रयन्ते |

जल जहां होता है हंस वहां होता हैं और (जल) सूख जाने पर वे उस स्थान को छोड़ देते हैं। मनुष्य को हंस की तरह नहीं होना चाहिये जोकि बार-बार कभी तो छोड़ते हैं और कभी आ जाते हैं। इसका अर्थ है कि हमे मतलबी नहीं बनना चाहिए कि काम हो गया तो टाटा। हमें उस व्यक्ति के काम आना है, जो व्यक्ति हमारे काम आया है।

शुनः पुच्छमिव व्यर्थं जीवितं विद्यया विना।

न गुह्यगोपने शक्तं न च दंशनिवारणे ।।

विद्या के बिना जीवन कुत्ते की पूंछ की तरह बेकार है जोकि न तो गुप्तांग को ही ढक सकती है और न ही मक्खी-मच्छर आदि जीवों को हटा सकती है। यहां आचार्य चाणक्य ने विद्या की कीमत बताई है। उन्होंने बताया है कि कैसे विद्या काम आती है और विद्या के बिना व्यक्ति का जीवन बेकार है। इससे आप अच्छे और बुरे का भेद पाते हैं। इसलिए विद्या कल भी उतनी ही जरूरी थी, जितनी आज है।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

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शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


परिचय और अनुभव

अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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