Quote of the Day: सगे-संबंधी से लेकर दोस्त भी नहीं देते हैं ऐसे लोगों का साथ, समाज में झेलना पड़ सकता है अपमान

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Aaj Ka Suvichar 12 June 2026: चाणक्य नीति के अनुसार, बार-बार मांगने की आदत से सगे-संबंधी और दोस्त भी दूर हो जाते हैं। जानें चाणक्य-विदुर नीति में इस बुरी आदत के परिणाम और अपमान से कैसे बचें।

Quote of the Day: सगे-संबंधी से लेकर दोस्त भी नहीं देते हैं ऐसे लोगों का साथ, समाज में झेलना पड़ सकता है अपमान

आज 12 जून 2026 सुबह हमें याद दिलाती है कि मांगना जिंदगी का आखिरी सहारा नहीं होना चाहिए। सम्मान और स्वाभिमान बनाए रखना ही सच्ची सफलता की नींव है। सच्चा सम्मान वह नहीं जो भीख में मिले, बल्कि वह है जो अपनी मेहनत और आत्मसम्मान से हासिल किया जाए। ऐसे में तय कर लें कि कभी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाएंगे, क्योंकि मांगने वाला कभी सम्मान नहीं पा सकता है।

चाणक्य नीति के सोलहवें अध्याय के पंद्रहवें श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं:

तृणं लघु तृणात्तूलं तूलादपि च याचकः।

वायुना किं ना नीतोऽसौ मामयं याचयिष्यति॥

इसका अर्थ है - तिनका हल्का है, तिनके से भी हल्की रुई है, लेकिन इन दोनों से भी ज्यादा हल्का याचक (मांगने वाला) है। हवा भी याचक को इसलिए नहीं उड़ा ले जाती, क्योंकि उसे डर है कि कहीं यह उससे भी कुछ मांग ना ले।

याचक की दयनीय स्थिति

चाणक्य नीति में याचक को सबसे हल्का और निंदनीय बताया गया है। जो व्यक्ति बार-बार दूसरों से कुछ मांगता रहता है, वह ना सिर्फ अपनी इज्जत खोता है, बल्कि लोगों के मन में भी अपनी जगह खो देता है। शुरू-शुरू में लोग मदद कर देते हैं, लेकिन जब मांगने की आदत बन जाती है, तो सगे-संबंधी और दोस्त भी उससे दूर होने लगते हैं।

मांगने की आदत क्यों खतरनाक है?

जब कोई व्यक्ति बार-बार दूसरों के सामने हाथ फैलाता है, तो उसका स्वाभिमान धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। चाणक्य कहते हैं कि याचक तिनके और रुई से भी हल्का होता है। हवा तिनके को उड़ा ले जाती है, लेकिन याचक को नहीं, क्योंकि हवा को भी डर होता है कि यह उससे कुछ मांग ना ले। यह व्यंग्य उन लोगों पर है जो बिना मेहनत किए दूसरों पर निर्भर रहते हैं।

संबंधों पर बुरा प्रभाव

सगे-संबंधी और मित्र भी ऐसे लोगों का साथ छोड़ देते हैं। शुरू में लोग मदद करते हैं, लेकिन जब मांगने की आदत बन जाती है, तो वे भी दूर हो जाते हैं। चाणक्य नीति स्पष्ट कहती है कि याचक की वजह से रिश्तों में तनाव आता है और अपमान का सामना करना पड़ता है।

स्वाभिमान बनाए रखना क्यों जरूरी है?

आचार्य चाणक्य हमें सिखाते हैं कि चाहे कितनी भी कठिनाई हो, दूसरों के सामने हाथ फैलाने की बजाय मेहनत करनी चाहिए। स्वाभिमान बनाए रखने वाला व्यक्ति भले ही धीरे-धीरे आगे बढ़े, लेकिन उसका सम्मान बना रहता है। मांगने की आदत ना सिर्फ इज्जत खोती है, बल्कि आत्मविश्वास भी कम करती है।

सफलता का सच्चा मार्ग

सफलता मेहनत, धैर्य और स्वाभिमान से आती है। जो व्यक्ति दूसरों पर निर्भर रहने की बजाय खुद पर भरोसा करता है, वही लंबे समय में सम्मान और सफलता पाता है। मांगने की आदत छोड़कर मेहनत करने की आदत अपनानी चाहिए।

चाणक्य नीति हमें चेतावनी देती है कि मांगने वाला व्यक्ति समाज में अपमानित होता है। 12 जून 2026 का यह दिन हमें याद दिलाता है कि स्वाभिमान बनाए रखें, मेहनत करें और दूसरों पर निर्भर ना रहें। यही सच्ची सफलता और सम्मान का मार्ग है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण

नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


विस्तृत बायो परिचय और अनुभव

डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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