आज है तीसरा बड़ा मंगल, जानें सुबह-शाम का पूजा मुहूर्त, क्या करें दान, मंत्र, उपाय, भोग, आरती
Aaj hai Teesra Bada Mangal 2026 : आज ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि में बड़ा मंगल है। ज्येष्ठ माह के बड़े मंगल के दिन व्रत रखने और हनुमान जी की आराधना करने से जीवन के समस्त संकट दूर होते हैं और बजरंगबली की कृपा बनी रहती है।

Aaj hai Teesra Bada Mangal 2026, बड़ा मंगल : आज ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि में बड़ा मंगल है। 19 मई 2026 को धृति और रवि योग में ज्येष्ठ मास का तीसरा बड़ा मंगल मनाया जा रहा है, जिसे बुढ़वा मंगल भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगलवार को ही हनुमान जी की मुलाकात प्रभु श्री राम से हुई थी। इसलिए इस पूरे महीने बजरंगबली की विशेष पूजा का विधान है। बड़े मंगल के दिन व्रत रखने और हनुमान जी की आराधना करने से जीवन के समस्त संकट दूर होते हैं और बजरंगबली की कृपा बनी रहती है। आइए जानते हैं आज के दिन की पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, भोग, उपाय, मंत्र और दान क्या करें-
आज है तीसरा बड़ा मंगल, जानें सुबह-शाम का पूजा मुहूर्त, क्या करें दान, मंत्र, उपाय, भोग, आरती
सुबह और शाम का पूजा मुहूर्त
आज के दिन बजरंगबली की पूजा के लिए बेहद शुभ मुहूर्त बन रहे हैं-
- सुबह की पूजा का उत्तम समय- सुबह 05:30 बजे से सुबह 09:00 बजे तक।
- अभिजीत मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ समय)- दोपहर 11:50 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक।
- शाम की पूजा का समय- शाम को सूर्यास्त के बाद यानी 06:45 बजे से रात 08:30 बजे तक (यह समय हनुमान चालीसा या सुंदरकांड के पाठ के लिए सर्वोत्तम है)।
- अमृत काल- रात 09:14 बजे से रात 09:40 बजे तक।
प्रिय भोग- बूंदी या बेसन के लड्डू, गुड़ और चना
बड़े मंगल पर क्या करें दान?
शीतल जल या शरबत- राहगीरों और प्यासों को पानी या बेल/गुलाब का शरबत पिलाएं।
भंडारा/भोजन दान- जरूरतमंदों को पूड़ी-सब्जी, हलवा या बूंदी का प्रसाद बांटें।
पक्षियों के लिए- अपने घर की छत या खुली जगह पर पक्षियों के लिए पानी और दाना रखें।
बड़े मंगल पर कैसे करें पूजा?
- स्नान और संकल्प- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ (अगर संभव हो तो लाल या पीले) वस्त्र पहनें। व्रत या विशेष पूजा का संकल्प लें।
- स्थान पवित्र करें- घर के मंदिर या चौकी को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें और वहां लाल कपड़ा बिछाकर हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- चोला और श्रृंगार- चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर हनुमान जी को चोला चढ़ाएं। उन्हें गेंदे या लाल फूलों की माला अर्पित करें।
- दीपक और पाठ- चमेली के तेल या शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इसके बाद हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करें।
- भोग और आरती- हनुमान जी को लड्डू या गुड़-चने का भोग लगाएं और अंत में धूप-दीप से उनकी आरती करें। प्रसाद को परिवार और अन्य लोगों में वितरित करें।
बड़े मंगल पर क्या करें उपाय
आज शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि दोष और राहु-केतु के बुरे प्रभाव से भी मुक्ति मिलती है।
मंत्र
भय और संकट मुक्ति के लिए- ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमित विक्रमाय प्रकटपराक्रमाय महाबलाय सूर्य कोटिसमप्रभाय रामदूताय स्वाहा।
धन, सुख और समृद्धि के लिए- ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय भक्तजनमनः कल्पनाकल्पद्रुमायं दुष्टमनोरथस्तंभनाय प्रभंजनप्राणप्रियाय महाबलपराक्रमाय महाविपत्तिनिवारणाय पुत्रपौत्रधनधान्यादिविधिसम्पत्प्रदाय रामदूताय स्वाहा।
श्री हनुमान जी की आरती
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांपे॥
अंजनि पुत्र महा बलदायी। संतन के प्रभु सदा सहाई॥
दे बीरा रघुनाथ पठाये। लंका जारि सिया सुधि लाये॥
लंका सो कोट समुद्र-सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥
लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सवारे॥
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि सजीवन प्रान उबारे॥
पैठि पाताल तोरि जम-कारे। अहिरावन की भुजा उखारे॥
बाएं भुजा असुर दल मारे। दहिने भुजा संतजन तारे॥
सुर नर मुनि आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरति करत अंजना माई॥
जो हनुमानजी की आरति गावै। बसि बैकुंठ परम पद पावै॥
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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