आज है सोमवती अमावस्या, पितरों को याद करने और दान-पुण्य के लिए माना जाता है बेहद शुभ दिन
इस साल सोमवती अमावस्या 15 जून, सोमवार यानी आज है। धार्मिक मान्यताओं में इस दिन को काफी खास माना जाता है। इस बार की अमावस्या इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसी दिन अधिक मास खत्म हो रहा है। साथ ही सूर्य देव भी मिथुन राशि में प्रवेश करने वाले हैं।

इस साल सोमवती अमावस्या 15 जून, सोमवार यानी आज है। धार्मिक मान्यताओं में इस दिन को काफी खास माना जाता है। इस बार की अमावस्या इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसी दिन अधिक मास खत्म हो रहा है। साथ ही सूर्य देव भी मिथुन राशि में प्रवेश करने वाले हैं। ज्योतिष के जानकारों का कहना है कि ऐसा संयोग बहुत लंबे समय बाद बन रहा है। पंचांग के मुताबिक अमावस्या तिथि 14 जून को दोपहर 12 बजकर 20 मिनट से शुरू होगी और 15 जून की सुबह 8 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि 15 जून को मिलने की वजह से इसी दिन सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी।
क्यों खास मानी जाती है सोमवती अमावस्या?
जब अमावस्या सोमवार के दिन आती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। सोमवार भगवान शिव का दिन माना जाता है। इसलिए इस दिन शिव पूजा का महत्व और बढ़ जाता है। कई लोग व्रत रखते हैं और मंदिर जाकर भगवान शिव का आशीर्वाद लेते हैं।
मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ, दान और अच्छे काम करने से शुभ फल मिलता है। लोग इसे नई शुरुआत और सकारात्मक सोच से भी जोड़कर देखते हैं। जैसे अमावस्या के बाद चांद फिर से दिखने लगता है, वैसे ही जीवन में भी नए मौके और नई उम्मीदें आने की बात कही जाती है।
पितरों को याद करने का दिन
अमावस्या तिथि को पितरों के लिए भी खास माना जाता है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनकी शांति के लिए तर्पण जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। मान्यता है कि पितरों का आशीर्वाद मिलने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
हालांकि पितरों का सम्मान सिर्फ धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं माना जाता। घर के बुजुर्गों का आदर करना, परिवार को साथ लेकर चलना और अच्छे संस्कारों को आगे बढ़ाना भी पूर्वजों के प्रति सम्मान का ही एक तरीका माना जाता है।
दान और सेवा का भी है महत्व
सोमवती अमावस्या पर दान-पुण्य करने की परंपरा भी है। लोग अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की मदद करते हैं। किसी भूखे को भोजन कराना, प्यासे को पानी पिलाना या किसी जरूरतमंद की सहायता करना भी पुण्य का काम माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सेवा और दान का विशेष महत्व होता है। इसलिए कई लोग इस मौके पर दूसरों की मदद करने की कोशिश करते हैं।
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 4:02 बजे से 4:42 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त - शाम 7:17 बजे से 7:37 बजे तक
लेखक के बारे में
Yogesh Joshiयोगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।
परिचय और अनुभव
योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।
न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।
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