Rang Panchami 2026: 7 या 8 मार्च कब मनाई जाएगी रंग पंचमी, जानिए महत्व व श्रीकृष्ण की आरती

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रंग पंचमी के दिन देवी-देवता पृथ्वी पर आते हैं और भक्तों के साथ होली खेलते हैं। इसलिए जब रंग पंचमी के दिन भक्त होली खेलते हैं, तो आसमान की तरफ गुलाल-रंग उड़ाते हैं। साथ ही यह पर्व द्वापर युग से जुड़ा हुआ है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की पूजा अर्चना की जाती है।

Rang Panchami 2026: 7 या 8 मार्च कब मनाई जाएगी रंग पंचमी, जानिए महत्व व श्रीकृष्ण की आरती

हिंदू धर्म में रंग पंचमी के पर्व का खास महत्व होता है। यह पर्व हर साल होली के पांचवें दिन यानी चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस पर्व को देव पंचमी भी कहा जाता है। क्योंकि मान्यता है कि इस दिन देवी-देवता पृथ्वी पर आते हैं और भक्तों के साथ होली खेलते हैं। इस लिए जब रंग पंचमी के दिन भक्त होली खेलते हैं, तो आसमान की तरफ गुलाल-रंग उड़ाते हैं। साथ ही यह पर्व द्वापर युग से जुड़ा हुआ है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की पूजा अर्चना की जाती है। चलिए जानते हैं कि इस बार रंग पंचमी का पर्व किस दिन मनाया जाएगा और इस त्योहार का महत्व भी जानेंगे।

7 या 8 मार्च, कब है रंग पंचमी 2026
हिंदू पंचांग के मुताबिक इस बार रंग पंचमी का त्योहार 8 मार्च को मनाया जाएगा। क्योंकि चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 7 मार्च को शाम 7 बजकर 17 मिनट से होगी और इसका समापन 8 मार्च 2026 को रात 9 बजकर 10 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि के मुताबिक 8 मार्च को रंग पंचमी का त्योहार मनाया जाएगा।

रंग पंचमी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रंग पंचमी के दिन भगवान श्री श्रीकृष्ण ने राधा-रानी के साथ होली खेली थी। तब से यह त्योहार मनाया जाता हैष इतना ही नहीं राधा और कृष्ण को होली खेलते देख देवी-देवताओं ने उनपर पुष्पों की वर्षा की थी।

रंग पंचमी पूजन सामग्री
रंग पंचमी की पूजा के लिए विशेष सामग्री का उपयोग किया जाता है। जिसमें मुख्य रूप से लाल, पीला, हरा, नीला, और सफेद रंग के फूलों का समावेश होता है। इसके अलावा, पूजा में ताम्बे का पानी, गंगाजल, दीया, अगरबत्ती, चंदन, मिष्ठान, तथा हल्दी-कुमकुम का उपयोग भी किया जाता है। पूजा के दौरान देवी-देवताओं की तस्वीर या प्रतिमा के सामने इन रंगों के फूलों से सजावट की जाती है। साथ ही, भक्तों को रंग खेलने के लिए विभिन्न प्रकार के रंगों की पिचकारियां, गुलाल, और रंगीन पानी का भी इस्तेमाल किया जाता है।

रंग पंचमी पूजा विधि
- रंग पंचमी के दिन पूजा की शुरुआत भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के ध्यान से करनी चाहिए।
- सबसे पहले स्नान करना चाहिए और स्वच्छ कपड़े पहनने चाहिए।
- स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है।
- सूर्य देवता जीवन के स्रोत माने जाते हैं, और उन्हें अर्घ्य देने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- इसके बाद चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान कृष्ण और राधा रानी की प्रतिमा को स्थापित करें।
- लाल और पीला रंग शुभता और समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं, और इन रंगों का इस्तेमाल पूजा में शांति और सकारात्मकता को बढ़ाता है।
- फिर भगवान की विधिपूर्वक अभिषेक करना चाहिए। अभिषेक के दौरान पानी, दूध, शहद, - गुलाब जल आदि का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
- इसके बाद, चंदन, अक्षत और गुलाब के फूलों से भगवान को अर्पित करें। यह फूल और चंदन भगवान को प्रिय होते हैं, और इनसे पूजा का माहौल और भी शुद्ध होता है।
-पूजा के दौरान मंत्र और श्री कृष्ण की आरती जरूर करें।
- आप पूजा के दौरान "ॐ श्री कृष्णाय नमः" के मंत्र का जाप कर सकते हैं।
-इसके बाद, खीर, पंचामृत और फल आदि का भोग भगवान को अर्पित करें।
-पूजा के अंत में प्रसाद का वितरण करना न भूलें।

श्री कृष्ण की आरती
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली
भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै,
देवता दरसन को तरसैं ।
गगन सों सुमन रासि बरसै ।
बजे मुरचंग,
मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

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धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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