Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीय के दिन गलती से ना खरीदें ये 5 चीजें, वरना फायदे की जगह होगा नुकसान

Apr 14, 2026 03:38 pm ISTNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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हिंदू धर्म में मान्यता है कि अक्षय तृतीया का पर्व अक्षय फल देता है। इस दिन किए गए कोई भी शुभ काम अक्षय होते हैं। ऐसे में लोग सोना-चांदी से लेकर कई तरह की चीजें खरीदते हैं। हालांकि, अक्षय तृतीया पर कुछ चीजों को खरीदने से बचना चाहिए। आइए जानते हैं इनके बारे में।

Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीय के दिन गलती से ना खरीदें ये 5 चीजें, वरना फायदे की जगह होगा नुकसान

अक्षय तृतीया हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है, जिसे बेहद शुभ और पुण्यदायी माना गया है। इस दिन किए गए किसी भी शुभ कार्य का फल अक्षय होता है। यही कारण है कि लोग इस दिन सोना, चांदी, वाहन, जमीन और अन्य मूल्यवान चीजें खरीदते हैं। लेकिन कुछ चीजें ऐसी भी हैं, जिन्हें अक्षय तृतीया पर भूलकर भी नहीं खरीदना चाहिए, अन्यथा घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है और फायदे की जगह नुकसान हो सकता है।

अक्षय तृतीया 2026 की तिथि और शुभ योग

साल 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी। तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10:50 बजे शुरू होगी और 20 अप्रैल को सुबह 7:28 बजे समाप्त होगी। इस दिन रोहिणी नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और गजकेसरी योग का दुर्लभ संयोग बनेगा, जो शुभ कार्यों के लिए अत्यंत अनुकूल है।

इस रंग की चीजें ना खरीदें

हिंदू शास्त्रों में काला रंग शनि ग्रह और नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। अक्षय तृतीया जैसे शुभ दिन पर काले कपड़े, काले बर्तन या कोई भी काली वस्तु खरीदना अशुभ होता है। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है और आर्थिक या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां आ सकती हैं।

लोहे और स्टील की चीजें अशुभ

अक्षय तृतीया पर लोहे या स्टील से बनी वस्तुएं (जैसे बर्तन, औजार या फर्नीचर) खरीदने से बचना चाहिए। वास्तु और ज्योतिष के अनुसार, यह घर की सुख-समृद्धि और सकारात्मकता पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। लोहा शनि से जुड़ा होने के कारण इस शुभ तिथि पर इसे खरीदना अशुभ माना जाता है।

प्लास्टिक के सामान ना खरीदें

प्लास्टिक की चीजें (जैसे बर्तन, खिलौने, फर्नीचर आदि) अक्षय तृतीया पर खरीदना वर्जित माना जाता है। प्लास्टिक प्राकृतिक नहीं होता और इसमें सकारात्मक ऊर्जा का अभाव होता है। इससे घर की बरकत प्रभावित हो सकती है और लक्ष्मी का वास कमजोर पड़ सकता है।

धारदार और नुकीली चीजें अशुभ

चाकू, कैंची, ब्लेड या कोई भी धारदार वस्तु अक्षय तृतीया पर खरीदना अशुभ होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि ऐसी वस्तुएं रिश्तों में कटुता, विवाद और कलह बढ़ा सकती हैं। इसलिए इस दिन इन चीजों से पूरी तरह दूर रहें।

कांटेदार पौधे घर ना लाएं

अक्षय तृतीया पर कांटेदार पौधे (जैसे कैक्टस) खरीदकर घर लाना वास्तु दृष्टि से अशुभ माना जाता है। ये पौधे नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं और घर में बाधाएं, स्वास्थ्य समस्या या आर्थिक रुकावटें पैदा कर सकते हैं। इस दिन हरे-भरे और सकारात्मक पौधे ही घर लाना शुभ होता है।

अक्षय तृतीया पर क्या खरीदना शुभ है?

इस दिन सोना, चांदी, हीरा, कपड़े, बर्तन, पूजा सामग्री, मिठाई और दान-पुण्य के लिए सामान खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। इन वस्तुओं को खरीदने से घर में लक्ष्मी का वास बढ़ता है और समृद्धि आती है।

अक्षय तृतीया पर सही चीजें खरीदकर और गलत चीजों से दूर रहकर आप अपने घर में सुख, शांति और बरकत बना सकते हैं। इस शुभ दिन को सकारात्मक कार्यों और भक्ति के साथ मनाएं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

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नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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