मेहनत के बाद भी नहीं मिल रही सफलता, सुंदरकांड की इन 3 चौपाइयों के पाठ से जाग उठेगी सोई किस्मत
मेहनत करने के बावजूद भी नहीं मिल रही है मनचाही सफलता? सुंदरकांड की इन 3 खास चौपाइयों के नियमित पाठ से जाग उठेगी आपकी सोई किस्मत। श्री राम और हनुमान जी की कृपा पाने का प्रभावी उपाय, जानिए पूरी विधि और चमत्कारी फायदे।

जीवन में कई बार मेहनत करने के बावजूद सफलता हाथ नहीं लगती है। ऐसे समय में आस्था और मंत्र शक्ति बहुत काम आती है। सुंदरकांड की कुछ खास चौपाइयां ऐसी हैं, जो बिगड़े काम बनाती हैं और किस्मत को जगाती हैं। इन चौपाइयों का नियमित पाठ करने से श्री राम और हनुमान जी की कृपा मिलती है। आइए इन तीन महत्वपूर्ण चौपाइयों को समझते हैं।
चौपाई 1: असंभव को संभव बनाने वाली शक्ति
कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥
राम काज लगि तव अवतारा। सुनतहिं भयउ पर्बताकारा॥
यह चौपाई हनुमान जी को संबोधित करते हुए कही गई है। इसका अर्थ है कि इस संसार में ऐसा कौन सा काम है, जो आपसे नहीं हो सकता। श्री राम के कार्य को पूरा करने के लिए ही आपका अवतार हुआ है। इस चौपाई का पाठ करने से मन में विश्वास जागता है कि कोई भी काम असंभव नहीं है। जब हम हार मानने लगते हैं, तब यह चौपाई हमें याद दिलाती है कि सच्ची श्रद्धा और मेहनत से कुछ भी संभव है। नियमित पाठ से बाधाएं दूर होती हैं और सफलता मिलने लगती है।
चौपाई 2: भगवान की कृपा का भरोसा जगाती चौपाई
तामस तनु कछु साधन नाहीं। प्रीत न पद सरोज मन माहीं॥
अब मोहि भा भरोस हनुमंता। बिनु हरिकृपा मिलहिं नहिं संता॥
इस चौपाई में विभीषण कहते हैं कि मेरे पास कोई साधन नहीं है, शरीर भी तमोगुणी है और प्रभु के चरणों में प्रेम भी नहीं है। फिर भी हे हनुमान जी, अब मुझे पूरा भरोसा हो गया है कि भगवान मुझ पर कृपा करेंगे, क्योंकि उनकी कृपा बिना सत्पुरुष नहीं मिलता है। यह चौपाई हमें सिखाती है कि भगवान की कृपा बिना कुछ नहीं होता है। पाठ करने से मन में भरोसा बढ़ता है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं।
चौपाई 3: हर काम में विजय दिलाती चौपाई
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई॥
इस चौपाई का अर्थ है कि प्रभु श्री राम को हृदय में रखकर किसी भी कार्य को करने से सफलता मिलती है। विष अमृत बन जाता है, शत्रु मित्र बन जाते हैं और समुद्र गाय के खुर के समान छोटा हो जाता है। अग्नि भी शीतल हो जाती है। यह चौपाई हमें याद दिलाती है कि प्रभु का स्मरण करने से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। नियमित पाठ से बाधाएं दूर होती हैं और रास्ते खुद खुलने लगते हैं।
इन चौपाइयों के पाठ का सही तरीका
इन चौपाइयों का पाठ रोज सुबह या शाम को शुद्ध मन से करें। पाठ करते समय हनुमान जी या राम जी की तस्वीर सामने रखें। धूप-दीप जलाकर पाठ शुरू करें। शुरुआत में 11 बार और धीरे-धीरे 108 बार तक बढ़ाएं। पाठ के बाद हनुमान चालीसा का पाठ भी जरूर करें। इससे मन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और मेहनत का फल जल्दी मिलने लगता है।
इन चौपाइयों से मिलने वाले लाभ
नियमित पाठ करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं। बिगड़े काम बनने लगते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। श्री राम और हनुमान जी की कृपा सदैव बनी रहती है। जो लोग हार मान चुके हैं उनके लिए ये चौपाइयां नई उम्मीद जगाती हैं। मेहनत के साथ इनका पाठ करने से सफलता जरूर मिलती है।
सुंदरकांड की ये 3 चौपाइयां जीवन की हर मुश्किल में साथ देती हैं। नियमित पाठ से सोई किस्मत जाग उठेगी और हर काम में विजय मिलेगी।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Navaneet Rathaurसंक्षिप्त विवरण
नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।
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