Hindi Newsधर्म न्यूज़2026 Me Kab Lagega Surya-Chandra Grahan? Date, Time Aur Sutak (Solar & Lunar Eclipse)
फरवरी-मार्च में लगेगा सूर्य और चंद्र ग्रहण? नोट कर लें सही डेट, समय, सूतक का समय

फरवरी-मार्च में लगेगा सूर्य और चंद्र ग्रहण? नोट कर लें सही डेट, समय, सूतक का समय

संक्षेप:

Solar & Lunar Eclipse : कुछ ही दिनों में दो बड़े ग्रहण लगने वाले हैं। पहला सूर्य ग्रहण फरवरी में लगेगा और उसके करीब 15 दिन बाद पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। इस बार सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, लेकिन चंद्र ग्रहण भारत में साफ नजर आएगा।

Feb 06, 2026 04:19 pm ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान
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Surya Chandra Grahan 2026: सूर्य ग्रहण का वैज्ञानिक के साथ ही बहुत अधिक धार्मिक महत्व भी होता है। सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी कुछ समय के लिए ढक जाती है, जबकि चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या के दिन और चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन ही लगता है, लेकिन हर अमावस्या और पूर्णिमा पर ग्रहण नहीं लगता, क्योंकि चंद्रमा की कक्षा तिरछी होती है और हर बार तीनों एक सीध में नहीं आते। धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण को राहु-केतु से जोड़ा गया है और इस दौरान सूतक काल मानने की परंपरा है, जिसमें पूजा-पाठ से बचा जाता है और ग्रहण के बाद स्नान किया जाता है, जबकि विज्ञान के अनुसार ग्रहण से शरीर पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता, बस सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से देखना आंखों के लिए नुकसानदेह हो सकता है, इसलिए इसे सीधे देखने से बचना चाहिए। कुछ ही दिनों में दो बड़े ग्रहण लगने वाले हैं। पहला सूर्य ग्रहण फरवरी में लगेगा और उसके करीब 15 दिन बाद पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। इस बार सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, लेकिन चंद्र ग्रहण भारत में साफ नजर आएगा। ऐसे में जान लेते हैं कि 2026 में ग्रहण कब लगेगा, किस समय रहेगा, सूतक कब से लगेगा।

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17 फरवरी 2026 को लगेगा सूर्य ग्रहण- साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को लगेगा। यह वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। इस तरह के ग्रहण में सूर्य का पूरा हिस्सा नहीं ढकता, बल्कि चारों ओर से एक छल्ले जैसा दिखाई देता है।

कहां दिखेगा सूर्य ग्रहण?-

यह ग्रहण अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका समेत कुछ इलाकों में दिखाई देगा। भारत में यह सूर्य ग्रहण नजर नहीं आएगा।

भारतीय समय के अनुसार ग्रहण का समय:

शाम 5:31 बजे से 7:57 बजे के बीच सूर्य ग्रहण रहेगा।

भारत में सूतक लगेगा या नहीं?- यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा। यानी पूजा-पाठ, रसोई या मंदिर जाने पर कोई धार्मिक रोक नहीं मानी जाएगी।

3 मार्च 2026 को लगेगा पूर्ण चंद्र ग्रहण- सूर्य ग्रहण के करीब 15 दिन बाद 3 मार्च 2026 को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। इसे ब्लड मून भी कहा जाता है। यह चंद्र ग्रहण भारत में साफ दिखाई देगा।

कहां-कहां दिखेगा चंद्र ग्रहण?- यह चंद्र ग्रहण भारत, एशिया, यूरोप और अमेरिका के कई हिस्सों में नजर आएगा। पूर्वी भारत में यह ग्रहण ज्यादा साफ दिखाई देगा।

भारतीय समय के अनुसार ग्रहण का समय: दोपहर 3:22 बजे से शाम 6:47 बजे तक चंद्र ग्रहण रहेगा।

चंद्र ग्रहण का सूतक कब से लगेगा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण से करीब 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है। ऐसे में 3 मार्च को लगने वाले चंद्र ग्रहण का सूतक 3 मार्च की सुबह करीब 6:22 बजे से माना जाएगा और ग्रहण खत्म होने तक रहेगा।

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सूतक के दौरान क्या करें और क्या न करें?

ग्रहण के दौरान भोजन करने से बचें।

मंदिर में पूजा-पाठ न करें।

गर्भवती महिलाएं विशेष सावधानी रखें।

खुले आसमान के नीचे ज्यादा देर न रहें।

ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर लें।

ग्रहण का राशियों पर असर

ज्योतिष के अनुसार, 2026 में लगने वाले इन दोनों ग्रहणों का असर कुछ राशियों पर ज्यादा देखने को मिल सकता है। खास तौर पर मेष, मिथुन, तुला और धनु राशि वालों के जीवन में बदलाव के संकेत बताए जा रहे हैं। इन राशियों के जातकों को इस समय अपने फैसलों में सावधानी रखने, गुस्से और जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जाती है।

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डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


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योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


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