Solar Eclipse: सालों बाद 2 अगस्त 2027 को दिखेगा दिन में रात जैसा नजारा, जानिए क्यों होगा ऐसा?
Surya Grahan 2026 Date and Time: जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच से होकर गुजरता है, तो यह खगोलीय घटना सूर्य ग्रहण कहलाती है। 2 अगस्त 2027 को लगने वाला सूर्य ग्रहण बहुत खास रहने वाला है। जानें इस ग्रहण से जुड़ी जरूरी बातें।

Surya grahan 2 August 2027 date and time: श्रावण माह के कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि 2 अगस्त 2027 को सूर्य ग्रहण लगेगा। यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, जिसे सदी की सबसे असाधारण खगोलीय अघटनाओं में से एक माना जा रहा है। खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार, 100 साल में पहली बार अगले साल 2 अगस्त को लगने वाले पूर्ण सूर्य ग्रहण के समय 1-2 मिनट के लिए दिन में अंधेरा छा जाएगा। ग्रहण के दौरान तापमान में भी गिरावट देखने को मिल सकती है, साथ ही सूर्य का कोरोना यानी सूर्य का बाहरी भाग साफ तौर पर नजर आएगा। जानें 2 अगस्त 2027 को लगने वाले सूर्य ग्रहण का समय और इससे पहले कब लगेंगे दुर्लभ सूर्य ग्रहण।
2 अगस्त को लगने वाले सूर्य ग्रहण का समय:
2 अगस्त 2027 को लगने वाला सूर्य ग्रहण (भारतीय समयानुसार) दोपहर 12:01 बजे से शाम 05:40 बजे तक रहेगा। सूर्य ग्रहण की मुख्य अवधि करीब 06 मिनट 23 सेकेंड की होने के कारण इसे लंबी अवधि वाला ग्रहण माना जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार इतनी लंबी अवधि का सूर्य ग्रहण बहुत कम देखने को मिलता है। इससे पहले 29 मई 1919 को ऐसा लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण देखा गया था। 2 अगस्त के बाद ऐसा पूर्ण सूर्य ग्रहण 22वीं सदी में यानी साल 2114 में देखने को मिलेगा।
सूर्य ग्रहण कहां नजर आएगा:
2 अगस्त 2027 को लगने वाला सूर्य ग्रहण स्पेन, जिब्राल्टर, मोरक्को, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, लीबिया, मिस्र, सऊदी अरब, यमन और सोमालिया के साथ-साथ अटलांटिक और हिंद महासागर में नजर आएगा।
सूर्य ग्रहण भारत में दिखेगा या नहीं:
यह सूर्य ग्रहण भारत में पूर्ण नहीं बल्कि आंशिक तौर पर नजर आएगा। भारत के दक्षिणी हिस्सों में सूर्य का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा ढका हुआ नजर आएगा।
भारत में मान्य होगा सूतक काल या नहीं:
भारत में यह ग्रहण पूर्ण रूप से नजर नहीं आने के कारण इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। ज्योतिष मान्यता के अनुसार, पूर्ण सूर्य ग्रहण का ही सूतक मान्य होता है। सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण के 12 घंटे पहले से शुरू हो जाता है।
दिन में हो जाएगी रात-
खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार, 2 अगस्त 2027 को लगने वाले ग्रहण के दौरान कुछ मिनटों के लिए दिन में ही रात जैसा अंधेरा हो जाएगा। दरअसल ग्रहण के समय चांद सूरज को पूर्ण रूप से ढक लेगा, जिससे हर उस जगह पर अंधेरा छा जाएगा आसमान में तारे नजर आने लगेंगे और तापमान में भी कमी आ सकती है।
अबतक के 10 सबसे दुर्लभ सूर्य ग्रहण:
22 अक्टूबर, 2137 ईसा पूर्व का सूर्य ग्रहण इतिहास में खास जगह रखता है। कहा जाता है कि दो चीनी शाही खगोलशास्त्रियों की गर्दन काट दी गई थी क्योंकि वे शराब के नशे में धुत हो गए थे और ग्रहण की भविष्यवाणी नहीं कर पाए थे। 19 जुलाई, 418 के पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान यूनानी चर्च के इतिहासकार फिलोस्टोर्जियस ने तारों और एक धूमकेतु का चित्र बनाया। कहा जाता है कि यह ग्रहण के दौरान ही खोजा गया था, इसे उस वक्त तक का पहला धूमकेतु कहा जाता है। 17 जुलाई 334 का ग्रहण भी खास माना जाता है। कहा जाता है कि इस ग्रहण के दौरान 'प्रोमिनेंस' (जिन्हें सूर्य की सतह से उठने वाली लपटें कहा गया) का सबसे पहली सटीक जानकारी मिली थी।
28 जुलाई 1851 के पूर्ण सूर्य ग्रहण की पहली सफल फोटो रूसी फोटोग्राफर बर्कोव्स्की ने खींची थी। इसके बाद 20 मार्च, 71 का सूर्य ग्रहण और 22 मई 1724 का सूर्य ग्रहण भी इतिहास के सूर्य ग्रहण में खास अहमियत रखते हैं। इसके बाद 18 अगस्त 1868 को फ्रांसीसी खगोलशास्त्री पियरे जूल्स सीजर जानसेन और ब्रिटिश खगोलशास्त्री नॉर्मन लॉकयर ने सूरज के स्पेक्ट्रम में नई और अनजान रेखा की खोज की थी। इसके बाद 15 मई 1836 का सूर्य ग्रहण खास माना जाता है। 29 मई 1919 का ग्रहण भी इतिहास में खास जगह रखता है। खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार, सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण 15 जून, 743 ईसा पूर्व को 7 मिनट और 28 सेकेंड तक चला था।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Saumya Tiwariसंक्षिप्त विवरण
सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा हैं और इस संस्थान के साथ करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जुड़ी हैं। इन्हें डिजिटल पत्रकारिता में करीब 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां वह ग्रह राशि परिवर्तन, टैरो, वैदिक ज्योतिष, फेंगशुई, अंकराशि, रत्न शास्त्र और व्रत-त्योहार आदि से जुड़ी खबरें लिखती हैं।
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सौम्या तिवारी की ग्रह राशि परिवर्तन, व्रत-त्योहार, सामुद्रिक शास्त्र, अंकज्योतिष, वास्तु शास्त्र एवं फेंगशुई, कथा-कहानी जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ है। उन्हें ज्योतिष एवं धार्मिक विषयों में करीब 6 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर डिप्टी कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं और धर्म व ज्योतिष (एस्ट्रोलॉजी) सेक्शन का हिस्सा हैं।
इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।
इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।
विशेषज्ञता
ग्रह और नक्षत्रों का राशि पर असर
फेंगशुई
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न विज्ञान


