14 जुलाई से अस्त होंगे गुरु, एक महीने तक नहीं होंगे विवाह और कई मांगलिक कार्य

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
Follow us on Google News
share

वैदिक ज्योतिष में गुरु ग्रह को शुभ ग्रह माना जाता है। गुरु को विवाह, संतान, शिक्षा, धर्म और भाग्य का कारक माना गया है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 14 जुलाई 2026 से 12 अगस्त 2026 तक गुरु अस्त रहेंगे। इस अवधि में गुरु सूर्य के बेहद करीब पहुंच जाएंगे, जिस वजह से उनकी चमक दिखाई नहीं देगी।

14 जुलाई से अस्त होंगे गुरु, एक महीने तक नहीं होंगे विवाह और कई मांगलिक कार्य

वैदिक ज्योतिष में गुरु ग्रह को शुभ ग्रह माना जाता है। गुरु को विवाह, संतान, शिक्षा, धर्म और भाग्य का कारक माना गया है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 14 जुलाई 2026 से 12 अगस्त 2026 तक गुरु अस्त रहेंगे। इस अवधि में गुरु सूर्य के बेहद करीब पहुंच जाएंगे, जिस वजह से उनकी चमक दिखाई नहीं देगी। इसी स्थिति को गुरु अस्त या गुरु तारा डूबना कहा जाता है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जब तक गुरु अस्त रहते हैं तब तक कई तरह के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। इसलिए इस बार भी करीब एक महीने तक विवाह और अन्य शुभ कार्यों पर विराम लग सकता है। खास बात यह है कि गुरु इस समय कर्क राशि में गोचर कर रहे हैं, जिसे उनकी उच्च राशि माना जाता है।

इन कार्यों को टालने की दी जाती है सलाह

ज्योतिष शास्त्र में गुरु अस्त की अवधि को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इस दौरान विवाह, सगाई, रोका, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार और नए व्यापार की शुरुआत जैसे कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। कई लोग इस समय संपत्ति की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री जैसे बड़े फैसले भी टाल देते हैं।

हालांकि, नियमित पूजा-पाठ, व्रत, साधना, धार्मिक अनुष्ठान और पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखा जा सकता है। इन पर गुरु अस्त का प्रभाव नहीं माना जाता।

जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों पर पड़ सकता है असर

ज्योतिष के जानकारों का कहना है कि गुरु के अस्त होने के दौरान लोगों को कुछ मामलों में धीमापन महसूस हो सकता है। शिक्षा, करियर और भविष्य से जुड़े फैसलों में भ्रम या असमंजस की स्थिति बन सकती है। इसलिए इस दौरान बड़े और महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लेने की सलाह दी जाती है।

आर्थिक मामलों में भी सावधानी जरूरी मानी गई है। शेयर बाजार, बड़े निवेश या अधिक जोखिम वाले वित्तीय फैसलों में जल्दबाजी करने से बचना बेहतर माना जाता है। कुछ लोगों को धन संबंधी योजनाओं में देरी का सामना भी करना पड़ सकता है।

स्वास्थ्य की बात करें तो पाचन तंत्र, पेट से जुड़ी परेशानियां और वजन बढ़ने जैसी समस्याएं कुछ लोगों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में खानपान और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

किन राशियों को बरतनी होगी सावधानी

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कर्क, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों पर गुरु अस्त का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रह सकता है, क्योंकि गुरु इन राशियों के लिए अनुकूल स्थिति में माने जाते हैं।

वहीं मिथुन, कन्या और धनु राशि के लोगों को करियर, आर्थिक मामलों और रिश्तों में धैर्य रखने की जरूरत पड़ सकती है। इस दौरान किसी भी बड़े फैसले में जल्दबाजी करने से बचना बेहतर माना जाता है।

गुरु अस्त में किए जाते हैं ये उपाय

ज्योतिष शास्त्र में गुरु को मजबूत करने के लिए कुछ उपाय भी बताए गए हैं। मान्यता है कि गुरुवार के दिन “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा पीले वस्त्र, हल्दी, चने की दाल और केले का दान भी किया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करना तथा माथे पर चंदन का तिलक लगाना भी शुभ फलदायी माना जाता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi

योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि


योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।

एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य


योगेश के लिए ज्योतिष केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं है। वह इसे आत्मचिंतन और सही फैसलों में मदद करने वाले एक मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। इसी सोच के साथ वह राशिफल और अन्य ज्योतिषीय विषयों को संतुलित, व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को डराना नहीं, बल्कि जानकारी के जरिए उन्हें सोचने और समझने की दिशा देना है।


व्यक्तिगत रुचियां


काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।


विशेषज्ञता (Areas of Expertise):

राशिफल (डेली एवं वीकली)
ग्रह-गोचर
दशा-महादशा
अंकज्योतिष
सामुद्रिक शास्त्र
वास्तु शास्त्र
फेंगशुई
रत्न-उपाय
व्रत-त्योहार एवं पूजा-विधि

और पढ़ें
जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!