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BJP से निष्कासन के बाद हरक सिंह रावत बोले-विधानसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहता हूं

भाजपा से निष्कासित पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि वह आगामी विधानसभा चुनाव-2022 नहीं लड़ना चाहते हैं। उन्होंने कांग्रेस व बीजेपी पार्टियों के लिए बहुत काम किया है। अगर फिर...

BJP से निष्कासन के बाद हरक सिंह रावत बोले-विधानसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहता हूं
Himanshu Kumar Lallलाइव हिन्दुस्तान, देहरादूनTue, 18 Jan 2022 07:55 PM

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भाजपा से निष्कासित पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि वह आगामी विधानसभा चुनाव-2022 नहीं लड़ना चाहते हैं। उन्होंने कांग्रेस व बीजेपी पार्टियों के लिए बहुत काम किया है। अगर फिर भी पार्टी उनको चुनाव लड़ाने चाहेगी तो वह जरूरू चुनाव लड़ेंगे। बीजेपी से निष्कासन के बाद कांग्रेस दोबारा ज्वाइन करने पर हरक ने कहा कि आज (मंगलवार) को कांग्रेस हाईकमान से बात हुई है और उन्हें ज्वाइनिंग के बारे में जल्द ही सूचित किया जा सकता है।

एक प्राइवेट न्यूज चैनल में बोलते हुए हरक सिंह रावत ने कहा कि उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह काे आश्वासन दिया था कि वह किसी भी सूरत में पार्टी छोड़कर नहीं जाने वाले हैं, लेकिन उससे पहले ही उन्हें भाजपा से निष्कासित कर दिया। अपने निष्कासन को षडयंत्र करार देते हुए हरक कहते हैं कि उन्हें बिना किसी ठोस वजह से पार्टी से निष्कासित किया गया है। 

अपनी बहु, अनुकृति गुसाईं को आगामी विधानसभा सीट चुनाव के लिए टिकट दिए जाने के सवाल पर हरक ने कहा कि अनुकृति ने जनता के बीच बहुत काम किया है। ‘चूंकि अनुकृति एक पूर्व कैबिनेट मंत्री की बहू है तो उसे टिकट दिया जाना चाहिए या नहीं दिया जाना चाहिए, इसपर फैसला करने से पहले अनुकृति के कार्याें पर भी ध्यान देना चाहिए’ हरक सिंह रावत। उन्होंने साफतौर पर कहा कि अनुकृति को टिकट दिए जाने को लेकर न तो बीजेपी और न ही कांग्रेस पार्टी से किसी भी तरह से कोई पैरवी की थी। 

आपको बता दें कि बीजेपी से निष्कासन से पहले हरक अपने साथ ही लैंसडोन से बहू अनुकृति गुसाईं के लिए टिकट मांग रहे थे। बीजेपी में टिकट बंटवारे से पहले ही हरक लगातार बागी तेवर अपनाए हुए थे। भाजपा कोर कमेटी की बैठक में पहुंचने की बजाय दिल्ली के चक्कर काट रहे थे। पार्टी पर लगातार दबाव बनाए हुए थे। हरक सिंह रावत हमेशा दबाव की राजनीति के लिए जाने जाते रहे हैं। वह भाजपा पर लगातार हर बार किसी न किसी चीज के लिए दबाव बनाए हुए थे। पहले उन्होंने कोटद्वार मेडिकल कालेज के नाम पर कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा देने की धमकी देकी र भाजपा को असहज किया।

पूर्व सीएम हरीश रावत की शर्त भी मान गए हरक सिंह रावत
भाजपा से निष्कासित होने के बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के तेवर भी नरम होते दिख रहे हैं। पूर्व सीएम हरीश रावत की माफी मांगने की शर्त को स्वीकार करते हुए हरक सिंह रावत ने कहा कि वह 100 बार माफी मांगने को तैयार हैं। हरीश को बड़ा भाई कहते हुए हरक सिंह रावत कहते हैं कि उन्हें कांग्रेस  और हरीश की सभी शर्तें मंजूर हैं। उत्तराखंड के विकास के लिए वह कुछ भी कर सकते हैं। अगर उनक माफी मांगने पर उनके बड़े भाई हरीश उन्हें माफ कर देते हैं तो यह बहुत ही अच्छी बात होगी।
 
हरक सिंह रावत का प्रोफाइल
1991 पौड़ी से भाजपा के टिकट पर विधायक निर्वाचित
1991 कल्याण सिंह सरकार में सबसे युवा मंत्री बने
1993 में फिर पौडी सीट से निर्वाचित हुए
1995 विवादों के बीच भाजपा का साथ छोड़ा
1997 मायावती के नेतृत्व वाली बसपा में शामिल
1997 यूपी खादी ग्रामोद्योग में उपाध्यक्ष बने
2002 कांग्रेस से लैंसडाउन के विधायक बन
2002 तिवारी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने
2003 जेनी प्रकरण में इस्ती़फा देना पड़ा
2007 फिर से लैंसडाउन के विधायक बने
2007 में कांग्रेस से नेता विपक्ष बनाए गए
2012 रुद्रप्रयाग से विधायक निर्वाचित हुए
2016 कांग्रेस से इस्तीफा दिया, भाजपा में वापसी
2017 भाजपा से कोटद्वार से विधायक बने
2017 भाजपा सरकार में फिर मंत्री बनाए गए
2022 भाजपा सरकार से बर्खास्त किए गए
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