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सपा, बसपा या भाजपा? यूपी के चुनाव में किस दल की नैया पार लगाएंगे मुस्लिम वोटर

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। उत्तर प्रदेश में सात चरणों में चुनाव होंगे। इसके साथ ही बनते-बिगड़ते समीकरणों को लेकर अनुमानों के गुणा-गणित का सिलसिला तेज हो चला है। यूपी में...

सपा, बसपा या भाजपा? यूपी के चुनाव में किस दल की नैया पार लगाएंगे मुस्लिम वोटर
Deepakलाइव हिंदुस्तान,नई दिल्लीSun, 09 Jan 2022 01:52 PM

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पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। उत्तर प्रदेश में सात चरणों में चुनाव होंगे। इसके साथ ही बनते-बिगड़ते समीकरणों को लेकर अनुमानों के गुणा-गणित का सिलसिला तेज हो चला है। यूपी में भाजपा के हिंदू वोटरों के ध्रुवीकरण और कमजोर विपक्षियों के बीच मुस्लिम समुदाय का वोट बहुत कुछ तय करेगा। 

सपा-बसपा में बंटता रहा है मुस्लिम वोट
गौरतलब है कि अभी तक मुस्लिमों का वोट मुख्य तौर पर सपा और बसपा के बीच बंटता रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक यह बात 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिली। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनावों में दोनों दलों के बीच गठबंधन ने मुस्लिमों की यह परेशानी हल कर दी थी। हालांकि 2019 लोकसभा चुनाव में वोटिंग में बिखराव ने मुस्लिम वोटरों की सीमितता दिखाई थी।

योगी सरकार के लिए है बड़ा सवाल
हालांकि 2022 के हालात पूरी तरह से अलग हैं। हिंदुत्व के मुद्दे पर आगे बढ़ रही योगी सरकार के लिए अल्पसंख्यकों का वोट एक सवाल है। हालांकि पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश की कुछ सीटों पर मुस्लिम मतदाता भाजपा के लिए मददगार बन सकते थे। वहीं जातीय समीकरणों वाली कुछ सीटों पर अल्पसंख्यक समुदाय के वोट सपा और बसपा के लिए भी अहम होंगे। हालांकि अगर कहीं से यह महसूस होता है कि भाजपा के लिए समाजवादी पार्टी चुनौती बन सकती है, मुस्लिम समुदाय के यादव वोटरों के साथ जुड़ने के पूरे आसार हैं। 

कमजोर बसपा से सपा को आसानी
बसपा की कमजोर दावेदारी मुस्लिमों के लिए इस फैसले को आसान बना सकती है। अभी तक अखिलेश यादव ने अपनी रैलियों और सोशल मीडिया कैंपेन में भीड़ को दिखाया है। यह बसपा की तरफ छिटक रहे अपने वोटर बैंक को सहेजने की उनकी कोशिश हो सकती है। फिलहाल खुद को सत्ता की दौड़ में बनाए रखने के लिए सपा को अपने फिसलते वोट बैंक को संभालने की जरूरत है। साथ ही उन्हें एंटी-इनकंबैंसी फैक्टर्स को अपने पक्ष में मोड़ना होगा। वहीं बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती की चुनावी मैदान से अभी तक दूरी भी सपा की इस मुहिम में मदद ही करने जा रही है।

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