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कांग्रेस के लिए यूपी चुनाव की खराब शुरुआत! इमरान मसूद के सपा में जाने से पश्चिम यूपी में फेसलेस हुई पार्टी

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का अभी ऐलान हुआ ही है कि कांग्रेस को बड़ा झटका लग गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और सहारनपुर में प्रभावशाली नेता इमरान मसूद ने पार्टी छोड़ सपाा का दामन थाम लिया...

कांग्रेस के लिए यूपी चुनाव की खराब शुरुआत! इमरान मसूद के सपा में जाने से पश्चिम यूपी में फेसलेस हुई पार्टी
Surya Prakashलाइव हिन्दुस्तान ,सहारनपुरTue, 11 Jan 2022 09:01 AM

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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का अभी ऐलान हुआ ही है कि कांग्रेस को बड़ा झटका लग गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और सहारनपुर में प्रभावशाली नेता इमरान मसूद ने पार्टी छोड़ सपाा का दामन थाम लिया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शुरुआती दो राउंड में ही मतदान होना है। ऐसे में मुस्लिमों के बीच पहचान रखने वाले इमरान मसूद का जाना पार्टी के लिए बड़ा झटका है। यूं भी वेस्ट यूपी में कांग्रेस के पास कोई चेहरा नहीं है। ऐसे में इमरान मसूद के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस इस इलाके में फेसलेस होती दिख रही है। किसान आंदोलन के दौर भी यदि कांग्रेस यहां फेसलेस होकर चुनाव लड़ने की स्थिति में है तो समझा जा सकता है कि कमजोरी किस हद तक है।

खुद इमरान मसूद ने पार्टी छोड़ते इस बात का संकेत दिया है। इमरान मसूद ने कहा, 'राज्य में सपा और भाजपा के बीच सीधी लड़ाई है। मुझे कांग्रेस में बहुत सम्मान मिला है। प्रियंका गांधी ने मुझे काम के लिए बहुत से मौके दिए हैं। लेकिन इस अवसर पर भाजपा को रोकना जरूरी है और समाजवादी पार्टी के अलावा फिलहाल कोई विकल्प नहीं है।' हालांकि इमरान मसूद ने अभी यह साफ नहीं किया है कि वह किस सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। इमरान मसूद के चाचा राशिद मसूद भी कांग्रेस के प्रभावशाली नेता थे। सहारनपुर में मसूद फैमिली का अच्छा खासा असर रहा है। ऐसे में समाजवादी पार्टी उन पर भरोसा जता सकती है।

सपा के लिए आजम की कमी को पूरा करेंगे इमरान मसूद?

सपा के एक सीनियर नेता ने कहा कि मसूद फैमिली के हमेशा से पार्टी लीडरशिप से अच्छे रिश्ते रहे हैं। इमरान मसूद के चाचा के भी मुलायम सिंह यादव से अच्छे संबंध थे। उन्होंने कहा कि इमरान मसूद का समाजवादी पार्टी में आना एक तरह से घर में आने जैसा है। यूपी की सियासत को समझने वालों का मानना है कि प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं के बीच इससे यह संदेश जाएगा कि भाजपा के मुकाबले सपा ही एकमात्र विकल्प है। आजम खान के चुनावी सीन में न होने के चलते समाजवादी पार्टी वेस्ट यूपी में मुस्लिमों के बीच चेहरे का अभाव महसूस कर रही थी। लेकिन इमरान की एंट्री से वह कमी भी पूरी होते हुए दिखेगी।

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