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Hindi News विधानसभा चुनावत्रिपुरा में आदिवासी लगाएंगे भाजपा का बेड़ा पार? ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ पर बड़ा दांव खेल गई भगवा पार्टी

त्रिपुरा में आदिवासी लगाएंगे भाजपा का बेड़ा पार? ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ पर बड़ा दांव खेल गई भगवा पार्टी

भाजपा ने वादा किया कि लगातार दूसरी बार सत्ता में आने पर वह आदिवासी क्षेत्रों के लिए अधिक स्वायत्तता, किसानों की आर्थिक सहायता और रबर आधारित उद्योग के विशिष्ट-विनिर्माण क्षेत्रों में वृद्धि करेगी।

त्रिपुरा में आदिवासी लगाएंगे भाजपा का बेड़ा पार? ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ पर बड़ा दांव खेल गई भगवा पार्टी
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,अगरतलाFri, 10 Feb 2023 12:15 AM
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त्रिपुरा में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में आदिवासी वोट महत्वपूर्ण होने वाले हैं। यही वजह है कि भाजपा ने गुरुवार को त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) को साधते हुए एक आदिवासी-केंद्रित घोषणापत्र जारी किया। चुनावों के लिए एक सप्ताह के भीतर जारी किए गए भाजपा के 'संकल्प पत्र' में कई अन्य आश्वासनों के अलावा 24 प्रमुख वादे हैं। भाजपा ने वादा किया कि त्रिपुरा में लगातार दूसरी बार सत्ता में आने पर वह आदिवासी क्षेत्रों के लिए अधिक स्वायत्तता, किसानों की आर्थिक सहायता और रबर आधारित उद्योग के विशिष्ट-विनिर्माण क्षेत्रों में वृद्धि करेगी। भाजपा ने महिलाओं और छात्राओं के लिए भी लोकलुभावन वादे किए।

राज्य में 16 फरवरी को विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके लिए भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने पार्टी का घोषणापत्र जारी करते हुए कहा कि धार्मिक गुरु अनुकुल चंद्र के नाम पर सभी के लिए पांच रुपये की भोजन योजना शुरू करने के साथ ही अगरतला में एक क्षेत्रीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान की स्थापना भी की जाएगी। हालांकि, नड्डा द्वारा पारंपरिक प्रेसवार्ता के बजाय अपने कार्यकर्ताओं के सामने एक विशाल सभागार में घोषणापत्र जारी किया, जिसमें लोगों को नौकरी या राज्य के 1.9 लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन और महंगाई भत्ता देने के बारे में कोई जिक्र नहीं है।

टिपरा मोथा को टक्कर देने का प्लान?

विश्लेषक आदिवासी क्षेत्रों के लिए अधिक स्वायत्तता के वादों को टिपरा मोथा पार्टी द्वारा ‘‘ग्रेटर टिपरालैंड’’ के लिए की गई मांगों का जवाब देने के तौर पर देख रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि अगर भाजपा सत्ता में वापस आती है, तो आदिवासी क्षेत्रों के लिए विधायी, कार्यकारी और वित्तीय शक्तियों सहित अधिक स्वायत्तता दी जाएगी। नड्डा ने कहा कि पार्टी त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) को अधिक विधायी, कार्यकारी और वित्तीय शक्तियां देगी, जो राज्य के भौगोलिक क्षेत्रों का दो तिहाई हिस्सा है और जहां राज्य की लगभग 40 लाख आबादी का एक तिहाई हिस्सा निवास करता है। भाजपा अध्यक्ष ने आदिवासी संस्कृति और अध्ययन पर अनुसंधान, प्रचार और संरक्षण के लिए धलाई जिले के गंडाचेरा में महाराजा बीर बिक्रम माणिक्य जनजातीय विश्वविद्यालय स्थापित करने का भी वादा किया। इसके अलावा, आदिवासी प्रथागत कानूनों और प्रथाओं के संरक्षण के लिए आदिवासियों के वास्ते प्रथागत न्यायालय स्थापित किए जाएंगे।

20 पर है आदिवासी वोटों की पकड़

60 सदस्यीय त्रिपुरा विधानसभा में 20 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं। इस लिहाज से आने वाले चुनावों में आदिवासी वोट सबसे बड़ा निर्णायक कारक होने की उम्मीद है। त्रिपुरा में शाही परिवार के प्रमुख प्रद्योत किशोर देबबर्मा ने साल 2021 में टिपरा मोथा का गठन किया था। अपने गठन के दो महीने के भीतर इसने 2021 में टीटीएएडीसी चुनावों में जीत हासिल की थी और आदिवासी क्षेत्रों में भारी भीड़ खींच रही है।

भाजपा पहले टिपरा मोथा को अपने साथ लाना चाहती थी लेकिन वहां विफल होने के बाद, यह अब अपने अलग-अलग आदिवासी सहयोगी, इंडीजेनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के साथ संबंधों को सुधारने में कामयाब रही है। पार्टी स्पष्ट रूप से उम्मीद कर रही है कि घोषणापत्र इस खाई को और पाट देगा और आदिवासी वोटों को रिझाने में सफल होगा। 

घोषणापत्र में सबसे बड़ा बिंदु TTAADC यानी त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद को "अधिक स्वायत्तता" प्रदान करने और 125वें संविधान संशोधन विधेयक के ढांचे के भीतर अतिरिक्त विधायी, कार्यकारी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां प्रदान करने का वादा है। कानून में एडीसी के लिए अधिक स्वायत्तता के प्रावधान हैं, और भाजपा ने आदिवासी परिषद में दल-बदल विरोधी कानून के साथ-साथ उनकी आबादी के हिसाब से बजटीय और समयबद्ध आवंटन का वादा किया है।

ग्रेटर टिपरालैंड पर भाजपा का बड़ा दांव

टिपरा मोथा ने ग्रेटर टिपरालैंड की अपनी मांग के लिए "स्थायी संवैधानिक समाधान" का आह्वान किया है। वहीं भाजपा ने आवश्यक संवैधानिक, कानूनी, कार्यकारी और प्रशासनिक उपाय करके "समयबद्ध तरीके से ऐतिहासिक स्थायी समाधान" प्राप्त करने की कसम खाई है। हालांकि, यह कहा गया है कि ऐसा "त्रिपुरा की क्षेत्रीय अखंडता को प्रभावित किए बिना" होगा। भाजपा ने यह भी वादा किया है कि उसके द्वारा शासित सरकार एडीसी को केंद्र प्रायोजित योजनाओं के संबंध में सीधे केंद्र को प्रस्ताव भेजने के लिए अधिकृत करेगी। इसने सीबीएसई, आईसीएसई और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए स्वदेशी कोकबोरोक भाषा शुरू करने पर जनजातीय परिषद से परामर्श करने का वादा किया है। 

तृणमूल कांग्रेस को भी लिया निशाने पर

इसी तरह, त्रिपुरा में किसानों और महिलाओं के लिए विभिन्न लाभ देने के तृणमूल कांग्रेस द्वारा किए गए वादों का जवाब देने के मद्देनजर भाजपा ने घोषणापत्र में दोनों वर्गों पर ध्यान केंद्रित किया है। घोषणापत्र जारी करने के बाद नड्डा ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हम त्रिपुरा को ‘डीटीएच’ - विकास (डिवेलपमेंट), परिवर्तन (ट्रांसफॉर्मेशन) और सद्भाव (हार्मनी) के रास्ते पर ले जाएंगे।’’ घोषणापत्र में कहा गया है कि प्रत्येक बालिका को 50,000 रुपये का ‘बालिका समृद्धि बांड’ दिया जाएगा, जबकि आदिवासी भाषा ‘कोकबोरोक’ को सीबीएसई और आईसीएसई पाठ्यक्रम में विषय के रूप में शामिल किया जाएगा। नड्डा ने कहा, ‘‘हम रबर और बांस पर आधारित उद्योग-विशिष्ट विनिर्माण क्षेत्र स्थापित करेंगे। 6,000 रुपये की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि को बढ़ाया जाएगा और राज्य सरकार द्वारा 2,000 रुपये और प्रदान किए जाएंगे।’’