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Tamil Nadu Election Results 2021: तमिलनाडु में चला एम के स्टालिन का जादू, रुझानों में डीएमके को पूर्ण बहुमत 

लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीPublished By: Tarun Singh
Sun, 02 May 2021 02:41 PM
Tamil Nadu Election Results 2021: तमिलनाडु में चला एम के स्टालिन का जादू, रुझानों में डीएमके को पूर्ण बहुमत 

तमिलनाडु के ताजा रुझान 10 साल से सत्ता से बाहर चल रही डीएमके और उसके नेता एमके स्टालिन के लिए सुखद संकेत दे रहे हैं। रुझानों में डीएमके 135 सीटों पर आगे चल रही है वहीं एआईडीएमके 95 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। 1989 से 2011 तक हर पांच साल में राज्य की सत्ता बदलती रही है। लेकिन 2016 में जयललिता ने लगातार दूसरी बार चुनाव जीतकर इस ट्रेंड को तोड़ दिया था।

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पिछले कई दशकों के बाद तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव दो करिश्माई नेता करुणानिधि और जयललिता की अनुपस्थिति में लड़े जा रहे हैं। जहां करुणानिधि की मृत्यु के बाद स्टालिन मजबूती से उभरे हैं तो वहीं एआईडीएमके दो धड़े में बट गई थी। इस बार के भी चुनावी रुझान बता रहे हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव की तरह इस बार का विधानसभा चुनाव स्टालिन का जादू चला है। 

1967 से सक्रिय हैं स्टालिन 

68 वर्षीय एमके स्टालिन पहली बार 14 साल की उम्र में पार्टी के लिए वोट मांगते हुए दिखाई दिए थे। इस बार उनकी निगाह मुख्यमंत्री पद पर टिकी है। स्टालिन के पिता करुणानिधि 5 बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। स्टालिन ने अपना पहला चुनाव 1991 में लड़ा था। तब से अबतक 6 बार वह विधानसभा के लिए चुनें जा चुके हैं। 

आपातकाल में हुई जेल 

एम के स्टालिन को इमजेंसी में जेल भी जाना पड़ा था। लेकिन वह इससे मजबूती से निकले। 1990 में वह चेन्नई के मेयर चुनें गए और उसके बाद उन्होंने कभी मुड़कर पीछे नहीं देखा। 2013 में करुणानिधि ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया, लेकिन 2016 विधानसभा चुनावों में हार के बाद वह आलोचकों के निशाने पर आ गये थे। 2019 के लोकसभा चुनाव ऐतिहासिक जीत दर्ज करके अपने आलोचकों को शांत करने के साथ एक मजबूत नेता के तौर पर उभरे। 

गठबंधन में डीएमके हुई मजबूत 

2016 के विधानसभा चुनावों में डीएमके 178 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, भले इस बार पार्टी 173 सीटों पर चुनाव लड़ रही हो लेकिन पहले से उसकी स्थिति बेहतर हुई है। यह स्टालिन का दबाव ही था कि 2016 में 41 सीटों पर लड़ने वाली कांग्रेस को इस बार महज 25 सीटों पर संतोष करना पड़ा। वहीं स्टालिन ने आगे आकर लेफ्ट पार्टियों को गठबंधन में शामिल करने के लिए अपने कोटे से सीट दिए, जिसका असर अब दिख रहा है।  

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