Tamil Nadu Election Results 2021: तमिलनाडु में चला एम के स्टालिन का जादू, रुझानों में डीएमके को पूर्ण बहुमत
तमिलनाडु के ताजा रुझान 10 साल से सत्ता से बाहर चल रही डीएमके और उसके नेता एमके स्टालिन के लिए सुखद संकेत दे रहे हैं। रुझानों में डीएमके 135 सीटों पर आगे चल रही है वहीं एआईडीएमके 95 सीटों पर बढ़त बनाए...

तमिलनाडु के ताजा रुझान 10 साल से सत्ता से बाहर चल रही डीएमके और उसके नेता एमके स्टालिन के लिए सुखद संकेत दे रहे हैं। रुझानों में डीएमके 135 सीटों पर आगे चल रही है वहीं एआईडीएमके 95 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। 1989 से 2011 तक हर पांच साल में राज्य की सत्ता बदलती रही है। लेकिन 2016 में जयललिता ने लगातार दूसरी बार चुनाव जीतकर इस ट्रेंड को तोड़ दिया था।
पिछले कई दशकों के बाद तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव दो करिश्माई नेता करुणानिधि और जयललिता की अनुपस्थिति में लड़े जा रहे हैं। जहां करुणानिधि की मृत्यु के बाद स्टालिन मजबूती से उभरे हैं तो वहीं एआईडीएमके दो धड़े में बट गई थी। इस बार के भी चुनावी रुझान बता रहे हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव की तरह इस बार का विधानसभा चुनाव स्टालिन का जादू चला है।
1967 से सक्रिय हैं स्टालिन
68 वर्षीय एमके स्टालिन पहली बार 14 साल की उम्र में पार्टी के लिए वोट मांगते हुए दिखाई दिए थे। इस बार उनकी निगाह मुख्यमंत्री पद पर टिकी है। स्टालिन के पिता करुणानिधि 5 बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। स्टालिन ने अपना पहला चुनाव 1991 में लड़ा था। तब से अबतक 6 बार वह विधानसभा के लिए चुनें जा चुके हैं।
आपातकाल में हुई जेल
एम के स्टालिन को इमजेंसी में जेल भी जाना पड़ा था। लेकिन वह इससे मजबूती से निकले। 1990 में वह चेन्नई के मेयर चुनें गए और उसके बाद उन्होंने कभी मुड़कर पीछे नहीं देखा। 2013 में करुणानिधि ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया, लेकिन 2016 विधानसभा चुनावों में हार के बाद वह आलोचकों के निशाने पर आ गये थे। 2019 के लोकसभा चुनाव ऐतिहासिक जीत दर्ज करके अपने आलोचकों को शांत करने के साथ एक मजबूत नेता के तौर पर उभरे।
गठबंधन में डीएमके हुई मजबूत
2016 के विधानसभा चुनावों में डीएमके 178 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, भले इस बार पार्टी 173 सीटों पर चुनाव लड़ रही हो लेकिन पहले से उसकी स्थिति बेहतर हुई है। यह स्टालिन का दबाव ही था कि 2016 में 41 सीटों पर लड़ने वाली कांग्रेस को इस बार महज 25 सीटों पर संतोष करना पड़ा। वहीं स्टालिन ने आगे आकर लेफ्ट पार्टियों को गठबंधन में शामिल करने के लिए अपने कोटे से सीट दिए, जिसका असर अब दिख रहा है।
लेखक के बारे में
Tarun Pratap Singhतरुण प्रताप सिंह, लाइव हिन्दुस्तान के साथ अक्टूबर 2020 से कार्यरत हैं। मौजूदा समय में बिजनेस टीम का हिस्सा हैं। लाइव हिन्दुस्तान के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबर पर लिखने के साथ-साथ आईपीओ पर वीडियो इंटरव्यू की भी जिम्मेदारी सम्भालते हैं। लाइव हिन्दुस्तान की वीडियो टीम के लिए 2022 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में टीम लीड करते हुए 200 विधानसभा सीट में ग्राउंड रिपोर्टिंग, इंटरव्यू और स्पेशल स्टोरीज कर चुके हैं। श्री राम जन्मभूमि प्राण प्रतिष्ठा समारोह, 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी उत्तर प्रदेश में ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव है। साल 2025 में प्रयागराज में सम्पन्न हुए महाकुंभ में 40 दिन से अधिक दिन तक कुंभ नगरी में रहकर अनेकों वीडियो इंटरव्यू और स्पेशल स्टोरिज किए थे।
शिक्षा
बी.ए (ऑनर्स) और एम.ए की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी से पूरा किया है। भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है।
अनुभव -
HT का हिस्सा बनने से पहले स्वतंत्र तौर पर 2019 में लोकसभा चुनाव, 2019 में हरियाणा विधानसभा, 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव और 2020 में दिल्ली दंगा की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव प्राप्त है। श्री राम मंदिर भूमि पूजन (साल 2020) के दौरान भी बतौर स्वतंत्र पत्रकार अपनी सेवाएं दिए हैं।
दैनिक जागरण के एक स्पेशल कार्यक्रम के तहत वाराणसी में दो अलग-अलग साल में 100-100 बच्चों को संसदीय कार्यप्रणाली की 15 दिनों की ट्रेनिंग भी देने का अनुभव प्राप्त है।
विशेषताएं -
वीडियो रिपोर्टिंग में दक्षता हासिल है। कई इंटरव्यू और ग्राउंड ओपनियन वीडियो नेशनल लेवल पर विमर्श का केंद्र बने हैं। बिजनेस और राजनीति के अलावा क्रिकेट, धर्म और साहित्य पर लिखना-पढ़ना पसंद है।
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