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9 मई, 2021|10:22|IST

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केरल में बीजेपी सीटों से ज्यादा जमीन मजबूत करने की कोशिश में, सामाजिक समीकरण काफी अलग

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देश के विभिन्न हिस्सों तक अपनी मजबूत पहुंच बना चुकी बीजेपी के लिए केरल अभी भी राजनीतिक पहेली बना हुआ है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मजबूत काडर होने के बावजूद वह वोटों की राजनीति में सफल नहीं हो सकी है। इस बार भी बीजेपी के लिए बहुत ज्यादा संभावना नहीं दिख रही है, हालांकि वह अपना वोट प्रतिशत व सीटों की संख्या में कुछ इजाफा कर सकती है। अभी भाजपा का विधानसभा में महज एक विधायक है।

केरल देश का सबसे ज्यादा साक्षर राज्य होने के साथ ही सामाजिक समीकरणों में भी काफी अलग है। राज्य में लगभग 55 फीसद हिंदू है, जबकि 45 फीसद अल्पसंख्याक यानी ईसाई और मुसलमान है। इनमें भी मुसलमानों की संख्या ज्यादा है। राज्य में ईसाई और मुस्लिम मत सरकारों के गठन में सबसे अहम भूमिका रखते हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के कांग्रेस के साथ गठबंधन में होने से उसे मुसलमान वोटों का फायदा मिलता है। ईसाई मतदाता कभी वामपंथी तो कभी कांग्रेस के साथ रहे है। हालांकि इस बार चर्च में बड़े विवाद से भाजपा को भी मौका मिला है। चर्च का एक वर्ग भाजपा के करीब आया है और अगर वह वोटों में तब्दील होता है तो भाजपा की ताकत कुछ बढ़ सकती है।

केरल के इतिहास में भाजपा ने विधानसभा की एकमात्र सीट पिछली बार नेमम जीती थी, जबकि उसके सबसे बुजुर्ग ओ राजगोपाल विजयी हुए थे। राजगोपाल अब 90 साल से ज्यादा के हो चुके हैं और चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। उनकी जगह पार्टी ने इस सीट से अपने वरिष्ठ नेता के राजशेखरन को उतारा है। उनके सामने कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री करुणाकरण के बेटे मुरलीधरन है। वैसे तो भाजपा ने मेट्रोमैन ई श्रीधरन को चुनाव मैदान में उतार कर राज्य में माहौल गरमाया है, लेकिन उसका बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ता नहीं दिख रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ सकता है। उसने पिछले चुनाव में 15 फीसद वोट और एक विधानसभा सीट जीती थी। जबकि हाल में हुए पंचायत और नगर निकाय चुनाव में उसको 18 फीसद वोट मिले थे। भाजपा की रणनीति राज्य में कांग्रेस को कमजोर करने की है। इसके पहले वह वामपंथी वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश करती रही है जिसमें सफल नहीं हो सकी है। राज्य का हिंदू मोटे तौर पर वामपंथी दलों के साथ होता है और भाजपा का भी इसी समुदाय पर जोर रहता है।

पार्टी के एक प्रमुख नेता ने कहा है कि अगर कांग्रेस इस बार सत्ता में नहीं आई तो उसमें फूट पड़ सकती है। ऐसे में मुस्लिम लीग वामपंथी दलों के करीब जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो आने वाले समय में भाजपा को हिंदू समुदाय में घुसपैठ का मौका मिलेगा। साथ ही वह चर्च में भी घुसपैठ करने में लगी हुई है। केरल की राजनीति में राज्य में सत्ता पर माकपा और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ही कब्जा करते रहें और हर बार सरकार बदल जाती है। लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव में अप्रत्याशित नतीजे आ सकते हैं। इस बार एलडीएफ का पलड़ा भाई देख रहा है और वह सत्ता बरकरार रख सकता है। ऐसा होता है तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका होगा। उसके वरिष्ठ नेता राहुल गांधी वहीं से सांसद भी है।

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  • Web Title:BJP trying to strengthen more on ground than seats in Kerala know what is the social equation