Memories of Jharkhand assembly elections: when sawan lakra had to wait for 25 years to get a beard cut - झारखंड विधानसभा चुनाव की यादें, जब दाढ़ी कटवाने के लिए 25 साल तक करना पड़ा इंतजार DA Image
15 दिसंबर, 2019|8:25|IST

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झारखंड विधानसभा चुनाव की यादें, जब दाढ़ी कटवाने के लिए 25 साल तक करना पड़ा इंतजार

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चुनाव जीतने के लिए नेता तरह-तरह का संकल्प लेते हैं। देवी-देवता के सामने मन्नतें मांगते हैं। कसमें खाते हैं। जब तक चुनाव नहीं जीतूंगा तब तक चप्पल-जूते नहीं पहनुंगा। दाढ़ी नहीं कटाऊंगा। आईना नहीं देखूंगा, ये नहीं करूंगा, वो नहीं करूंगा... वगैरह-वगैरह। एक ऐसा ही रोचक संकल्प रांची से सटे खिजरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक रहे सावना लकड़ा ने लिया था। 

सावना लकड़ा ने सत्तर के दशक में राजनीति शुरू की। वह अपने क्षेत्र में एक जुझारू नेता के रूप में जाने जाते थे। 1975 से वह चुनावी राजनीति में उतरे। उन्होंने 1975 से निर्दलीय चुनाव लड़ना शुरू किया। चुनाव हार गए। उसी समय उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक खिजरी विधानसभा से वह चुनाव नहीं जीतेंगे, दाढ़ी नहीं कटाएंगे। उन्होंने अपनी दाढ़ी छोड़ दी।
 
अब कसमें खाने के बाद वह लगातार चुनाव मैदान में उतरने लगे। लेकिन दुर्भाग्य उनका पीछा नहीं छोड़ रहा था। हर चुनाव वह हार जाते थे। पहला चुनाव वह 1975 में लड़े और चौथे स्थान पर रहे। फिर वह दूसरे स्थान पर आए। 1980 के चुनाव में कांग्रेस से उमरांव साधो कुजूर चुनाव लड़े और जीते। उस समय सावना लकड़ा दूसरे स्थान पर रहे। एक साल बाद एक सड़क दुर्घटना में कांग्रेस विधायक साधो कुजूर का निधन हो गया। सावना लकड़ा कांग्रेस में शामिल हो गए। उपचुनाव हुआ और सावना लकड़ा कांग्रेस से प्रत्याशी बनाए गए। तब लोगों को लगा कि अब सावना लकड़ा की दाढ़ी कटने का वक्त आ गया। वह उपचुनाव जीतेंगे और दाढ़ी कटवा लेंगे।
 
इस उपचुनाव में भाजपा की ओर से कड़िया मुंडा मैदान में उतरे। कांग्रेस की ओर से तत्कालीन सीएम जगन्नाथ मिश्र समेत आधा दर्जन मंत्री खिजरी उपचुनाव के लिए रांची में कैंप कर गए। मंत्री टी मुचिराय मुंडा, करमचंद भगत, भुखला भगत समेत कई नेता चुनाव प्रचार में थे। इधर कड़िया मुंडा खूंटी से आकर चुनाव लड़ रहे थे। लेकिन दुर्भाग्य ने सावना लकड़ा का पीछा नहीं छोड़ा और अंतत: वह उपचुनाव भी हार गए। उसके बाद 1985, 1990 और 1995 के चुनाव में भी सावना लकड़ा को जीत का स्वाद नहीं मिला। साथ ही उनकी दाढ़ी लगातार लंबी होती जा रही थी।

वर्ष 2000 के चुनाव में खुली किस्मत
साल 2000 में झारखंड से अलग होने के ठीक पहले बिहार विधानसभा के चुनाव हुए और सावना लकड़ा की किस्मत खुली। कांग्रेस उम्मीदवार सावना लकड़ा ने भाजपा प्रत्याशी करमा उरांव को 11 हजार से ज्यादा वोटों से हराकर सीट पर कब्जा किया। जीत के बाद सावना लकड़ा की दाढ़ी कटी। लेकिन इसके लिए उन्हें 25 साल तक इंतजार करना पड़ा। हालांकि उन्होंने आगे दाढ़ी छोड़ दी। 2005 में फिर उन्हें कड़िया मुंडा के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा। लेकिन 2009 में वह फिर जीते। लेकिन दुर्भाग्य से एक हत्याकांड के वह आरोपी और बाद में दोषी करार दिए गए। उन्हें सजा हो गई। उनका निधन जेल में ही हो गया।  

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