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हिंदी न्यूज़ विधानसभा चुनाव हिमाचल प्रदेश चुनाव 2022हिमाचल में कहीं खेल खराब ना कर दें बागी, मनाने में दिन-रात एक कर रहे कांग्रेस और BJP के दिग्गज

हिमाचल में कहीं खेल खराब ना कर दें बागी, मनाने में दिन-रात एक कर रहे कांग्रेस और BJP के दिग्गज

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के सामने अपने बागी नेताओं को साधने की बड़ी चुनौती है। आलम यह है कि दोनों दलों के नेता इन्हें मनाने में दिन रात एक कर रहे हैं।

हिमाचल में कहीं खेल खराब ना कर दें बागी, मनाने में दिन-रात एक कर रहे कांग्रेस और BJP के दिग्गज
Krishna Singhपीटीआई,शिमलाWed, 02 Nov 2022 02:44 PM

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हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव (Himachal Pradesh Assembly polls) में जीत दर्ज करने के लिए सभी दलों ने ताकत झोंक दी है। भाजपा के सामने जहां सत्ता को बरकरार रखने की चुनौती है तो दूसरी ओर कांग्रेस सत्ता में आने के लिए जद्दोजहद कर रही है। हालांकि दोनों दलों के बागी उनके लिए परेशानियों का सबब बने हुए हैं। नतीजतन विद्रोही फैक्टर सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस दोनों को कमजोर कर रहा है। दोनों खेमों के शीर्ष नेता असंतोष के प्रभाव को कुंद करने में जुटे हुए हैं और इसके लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। 

भले ही भाजपा और कांग्रेस राज्य की 68 सीटों में से कुछ पर विद्रोह को दबाने में कामयाब हुई हैं, लेकिन अभी भी दोनों को कुछ नाखुश पूर्व सांसदों और मंत्रियों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि असंतोष के सुरों को साधने की तमाम कोशिशों के बाद भी कांग्रेस को लगभग एक दर्जन बागियों की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा के सामने भी लगभग 20 बागी नेता हैं, जो समस्या बने हुए हैं। यही कारण है कि भाजपा ने सख्ती का संदेश देते हुए चार पूर्व विधायकों और पार्टी के एक उपाध्यक्ष समेत अपने पांच शीर्ष नेताओं को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है।

इसी तरह कांग्रेस ने भी अपने छह नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की है, जिसमें एक पूर्व मंत्री और राज्य विधानसभा के एक पूर्व अध्यक्ष शामिल हैं। कांग्रेस का कहना है कि विद्रोही बिना पतवार के नाव की तरह हैं। पार्टी अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं करेगी। भाजपा के एक नेता ने कहा कि विद्रोहियों का भी वैसा ही हश्र होगा जैसा कि चार पूर्व विधायकों और राज्य उपाध्यक्ष का हुआ। किसी भी सूरत में पार्टी विरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही जानते हैं कि बागियों की चुनौती से पार पाना इतना आसान नहीं है।

समाचार एजेंसी पीटीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बागी निश्चित रूप से चुनावी गणित गड़बड़ा सकते हैं। बागी अभी भी कई सीटों पर चुनाव परिणाम तय करने में सक्षम हैं। पच्छाद, अन्नी, ठियोग, सुलह, चौपाल, हमीरपुर और अर्की में 11 बागी कांग्रेस उम्मीदवारों को परेशान कर रहे हैं। वहीं बीजेपी मंडी, बिलासपुर, कांगड़ा, धर्मशाला, झंडुता, चंबा, देहरा, कुल्लू, हमीरपुर, नालागढ़, फतेहपुर, किन्नौर, अन्नी, सुंदरनगर, नाचन और इंदौरा में बागियों के चलते कांग्रेस जितनी ही परेशान है। पूर्व मंत्री गंगूराम मुसाफिर कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ पच्छाद से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। मुसाफिर 2017 का चुनाव हार गए थे।