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मैदान के महारथी : कुलदीप बिश्नोई के सामने पारिवारिक गढ़ बचाने की चुनौती

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हरियाणा के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे चौधरी भजन लाल के पुत्र कुलदीप बिश्नोई को राजनीति विरासत में मिली। राज्य गठन के बाद से वर्ष 2014 तक हुए विधानसभा के 12 चुनाव में से 11 बार से लगातार बिश्नोई परिवार के वर्चस्व वाली आदमपुर सीट इस बार हॉट सीट बनी हुई है। इस बार कुलदीप को 52 साल से उनका पारिवारिक गढ़ रही आदमपुर सीट को बचाने की चिंता है।

51 साल के कुलदीप अब तक आदमपुर सीट से तीन बार विधायक और दो बार सांसद बन चुके हैं। वह पहली बार सांसद हिसार तो दूसरी बार भिवानी से बने। इस बार उनके सामने खुद चौथी बार चुनाव जीतने और कांग्रेस के प्रदर्शन को अच्छा बनाने की जिम्मेदारी है, भूपेंद्र सिंह हुड्डा का विरोध करते हुए कांग्रेस को छोड़ने वाले कुलदीप अभी तक ऊंची छलांग नहीं लगा पाए हैं। भाजपा ने उन्हें घेरने के लिए सेलेब्रिटी का दांव खेला है और टिक टॉक स्टार सोनाली फोगाट को मुकाबले में उतारा है।

गैर जाट चेहरा

हिसार लोकसभा क्षेत्र में कुल नौ विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें आदमपुर सीट शामिल हैं। पिछले चुनाव हरियाणा जनहित कांग्रेस पार्टी के तले चुनाव लड़े कुलदीप 17 हजार 249 वोटों से चुनाव जीते थे और उनकी पत्नी हांसी सीट से विधायक निर्वाचित हुई थीं। पार्टी को प्रदेश की 89 सीटों पर कुल 3.6 फीसदी वोट मिले थे और वह भाजपा, इनेलो, कांग्रेस के बाद चौथे नंबर पर रही थी। कुलदीप के कांग्रेस में लौटने के बाद पार्टी को उनसे मजबूती मिलने की उम्मीद है। पार्टी को उम्मीद है हिसार और भिवानी जिले में लाभ मिलेगा। कुलदीप को कांग्रेस में गैर जाट चेहरा भी माना जाता है।कुलदीप की मां जसमा देवी भी विधायक रही हैं। गैर जाट मतों को पार्टी में खींचने के लिए ही कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें दोबारा शामिल किया था।

पिता के रिकॉर्ड की बराबरी

कुलदीप के नाम अपने पिता चौधरी भजन लाल की तरह दो सीटों से सांसद बनने का गौरव है। भजन लाल मुख्यमंत्री रहने के बाद दो बार सांसद भी रहे। वह 1989 फरीदाबाद और फिर 1998 में करनाल संसद सदस्य बने।

राजनीतिक सफर

  • 1998 में पिता भजन लाल की परंपरागत सीट आदमपुर से विधायक निर्वाचित हुए।
  • 2004 में चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला और पूर्व मुख्यमंत्री बंशीलाल बेट बेटों को लोकसभा चुनाव में हराया, सांसद निर्वाचित हुए।
  • 2007 में कांग्रेस से अलग होकर हरियाणा जनहित कांग्रेस (भजनलाल) बनाई, सार्वजनिक तौर पर हुड्डा को विरोध किया।
  • 2009 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की 89 सीटों पर चुनाव लड़ा, छह सीटें जीतीं। हालांकि सभी विधायक कांग्रेस में चले गए।
  • 2011 में पिता भजन लाल के निधन के बाद भाजपा से गठबंधन किया। लोकसभा उपचुनाव लड़ा और अभय चौटाला को हराया, हालांकि 2014 में विधानसभा चुनाव से पूर्व गठबंधन टूट गया। इस चुनाव में वह और उनकी पत्नी जीते।
  • 2016 में कांग्रेस के तत्कालीन उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मिले और पार्टी का विलय कर दिया।

ताकत

1968 से आज तक आदमपुर सीट के किले को विपक्षी दल भेद नहीं पाएं हैं, पिता की परंपरागत सीट पर कुलदीप कब्जा बनाए हुए हैं। इस बाद भाजपा ने यहां पर टिक टॉक स्टार सोनाली फोगाट को उतारा है।

कमजोरी

राजनीतिक सूझ-बूझ की कमी, क्षेत्र में कम मौजूदगी। भले ही विधानसभा चुनाव में यह किला अभेद्य रहा, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा इस विधानसभा सीट पर आगे रही। विपक्ष का आरोप है कि कुलदीप बिजनेसमैन हैं, वह नेता नहीं बन पाए।

निजी जीवन पर एक नजर

जन्म सितंबर 1968 हिसार। दिसंबर, 1991 में राजस्थान के हनुमानगढ़ में जन्मी रेनुका बिश्नोई से शादी। तीन बच्चे हैं भव्य, चैतन्य और सिया बिश्नोई। भव्य राजनीति में हैं, चैतन्य क्रिकेटर हैं, आईपीएल में खेल चुके हैं।

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