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26 सितम्बर, 2020|3:44|IST

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रविशंकर प्रसाद का सियासी सफर: छात्र जीवन से ही राजनीति में आए अबतक तीन बार केंद्र में बने मंत्री

ravishankar prasad

छात्र नेता से अपना सियासी सफर शुरू करने वाले रविशंकर प्रसाद देश के प्रख्यात वकील भी रहे हैं। उन्होंने 1970 के दशक में इन्दिरा गांधी की सरकार के विरुद्ध विरोध प्रदर्शनों के जरिए अपनी पहचान बनाई। साथ ही, आपातकाल के दौरान जयप्रकाश नारायण की अगुवाई में बिहार में छात्र आन्दोलन का नेतृत्व किया। पटना की सड़कों पर कांग्रेस के खिलाफ आंदोलन करते हुए संसद की दहलीज पर पहली बार उन्होंने सन् 2000 में कदम रखा। अगले ही साल 2001 में अटल बिहारी वाजजेपी की सरकार में केन्द्रीय मंत्री बने। इसके बाद वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार में भी दो बार से केन्द्रीय मंत्री हैं।
 
उनके पिता ठाकुर प्रसाद पटना उच्च न्यायालय के प्रतिष्ठित वकील थे। वह तत्कालीन जनसंघ (वर्तमानकाल में भाजपा) के प्रमुख संस्थापकों में से एक थे। रविशंकर प्रसाद के राजनीतिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य के रूप में हुई। वह 2019 में पहली बार संसदीय चुनाव लड़े और पटना साहिब से सांसद चुने गए। इस बीच वह चार बार राज्यसभा के सदस्य रहे। वर्तमान में लोकसभा के सदस्य बनकर केन्द्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य हैं। 

रविशंकर प्रसाद ने जेपी की अगुआई में छात्र आंदोलन में हिस्सा लिया। जेल गये। उन्हें वकील के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के विरुद्ध चारा घोटाले में बहस करने के साथ अलकतरा घोटाले में जनहित याचिका पर बहस करने का मौका मिला। वे कई मामलों में पटना उच्च न्यायालय में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के वकील भी रहे।  वर्षों तक भाजपा की युवा शाखा व पार्टी संगठन में राष्ट्रीय स्तर का उत्तरदायित्व संभालते रहे। 2001 में मंत्री बनने के बाद 1 जुलाई, 2002 को प्रसाद को विधि एवं न्याय मंत्रालय में राज्य मंत्री का अतिरिक्त भार दिया गया। कार्यभार संभालने के एक पखवाड़े के अन्दर उन्होंने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन हेतु एक विधेयक तैयार किया व फास्ट ट्रैक कोर्ट की प्रक्रिया को गति दी। सूचना एवं प्रसारण राज्य मन्त्री के रूप में उन्होंने रेडियो, टीवी व एनिमेशन क्षेत्र में सुधारों व गोवा में भारतीय अन्तरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) के केन्द्र की स्थापना की शुरुआत की। 

व्यक्तिगत जीवन 
रविशंकर प्रसाद का जन्म 30 अगस्त 1954 को हुआ था। पटना विवि से स्नातक और एलएलबी की पढ़ाई करने वाले रविशंकर प्रसाद कई वर्षों तक विद्यार्थी परिषद में विभिन्न पदों पर रहे। छात्र जीवन में वे पटना विवि छात्र संघ के सहायक महासचिव और विश्वविद्यालय की सीनेट तथा वित्त समिति, कला और विधि संकाय के सदस्य रह चुके हैं। श्री प्रसाद अधिकतर मौकों पर कुर्ता-पायजामा में दिखते हैं। विदेश या पार्टी में जाने पर प्रिंस कोर्ट, ब्लेजर भी पहनते हैं। खाने में हरी सब्जी व सलाद हर रोज लेते हैं। मछली भी पसंदीदा भोजन है।

एक वकील के रूप में
रविशंकर प्रसाद भारत के सर्वोच्च न्यायालय में एक पेशेवर वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। उन्होंने 1980 में पटना उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस शुरू की थी। पटना उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ द्वारा उन्हें वर्ष 1999 में वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया गया। वर्ष 2000 में उनका नामांकन सर्वोच्च न्ययायालय में हुआ। लालू प्रसाद यादव के विरुद्ध चारा व अलकतरा घोटाले में जनहित याचिका पर बहस करने वाले वे प्रमुख वकील थे। उन्होंने विधि एवं चिकित्सा तथा पेटेण्ट कानून पर अन्तरराष्ट्रीय कांग्रेसों में भाग लिया। नर्मदा बचाओ आन्दोलन मामला, टीएन थिरुमपलाड बनाम भारत संघ, रामेश्वर प्रसाद बनाम भारत संघ (बिहार विधानसभा भंग मामला) व भारत में चिकित्सा शिक्षा पर प्रो. यशपाल का मामला, उनके द्वारा लड़े गए ऐतिहासिक मामलों में से हैं। वर्ष 2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्ड पीठ में लम्बे समय से चल रहे अयोध्या मुकदमे के तीन अधिवक्ताओं में से प्रसाद भी एक थे। 

2006 से हैं भाजपा के प्रवक्ता  
श्री प्रसाद 2006 में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने और अप्रैल 2006 में बिहार से राज्य सभा के लिए दोबारा सांसद चुने गए। वर्ष 2007 में उन्हें भाजपा का मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया गया। पिछले 10 वर्षों से वे भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। वे विभिन्न संसदीय समितियों के भी सदस्य रहे। 

इन पदों पर रहे


  • ’ 1991 से 95 तक दो कार्यकाल के लिए भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

  • ’ अगस्त 1995: सदस्य बने, राष्ट्रीय कार्यकारी समिति, भाजपा 

  • ’ अगस्त 1996: बिहार में चारा घोटाला सुर्खियों में आया। पटना उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की व सीबीआई जांच की मांग की

  • ’ अप्रैल 2000: पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए

  • ’ जून 2001: राष्ट्रीय संयोजक कानूनी सेल, भाजपा

  • ’ सितंबर 2001: कोयला और खान मंत्रालय में राज्य मंत्री

  • ’ जुलाई 2002: कानून और न्याय मंत्रालय में राज्य मंत्री (अतिरिक्त प्रभार)

  • ’ जनवरी 2003: सूचना और प्रसारण मंत्रालय (भारत) के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

  • ’ अगस्त 2005: भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में नियुक्त

  • ’ मार्च 2006: दूसरी बार राज्यसभा के लिए चुने गए

  • ’ अगस्त 2006: सदस्य, सूचना प्रौद्योगिकी पर स्थायी समिति

  • ’ अक्टूबर 2009: सदस्य, संवैधानिक और संसदीय अध्ययन संस्थान की कार्यकारी परिषद

  • ’ अप्रैल 2012: तीसरी बार राज्यसभा के लिए चुने गए

  • ’ मई 2012: राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उप नेता बने

  • ’ मई 2013: भारत की संसद के विशेषाधिकार पर समिति के सदस्य बने

  • ’ मई 2014: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी व कानून मंत्री बने।

  • ’ अप्रैल 2018: चौथी बार राज्यसभा के लिए चुने गए।

  • ’ 23 मई 2019: लोस सांसद चुने गए।
  • ’ मई 2019 में, उन्होंने कानून और न्याय मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को जारी रखा। उन्हें भारत सरकार में संचार मंत्रालय का प्रभार भी दिया गया  

कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर किया है देश का प्रतिनिधित्व
अप्रैल 2002 में, उन्हें भारतीय शिष्टमण्डल के नेता के रूप में डरबन (दक्षिण अफ्रीका) गुट निरपेक्ष त्रिस्तरीय बैठक में भाग लेने के लिए भेजा गया था। इसके बाद उन्हें गुटनिरपेक्ष आन्दोलन के त्रिस्तरीय प्रतिनिधिमण्डल में भारतीय सदस्य के रूप में रामल्ला में फिलिस्तीनी नेता स्व. यासिर अराफात से मिलकर उनके साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए भेजा गया। उन्हें राष्ट्रमण्डल कानून मन्त्री शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारतीय शिष्टमण्डल के नेता के रूप में सेण्ट विंसेन्ट (वेस्टइंडीज) भेजा गया। उन्होंने कॉन, वेनिस व लंदन फिल्म समारोहों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। अक्टूबर, 2006 में उन्हें न्यूयॉर्क में हुई 61वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ भेजा गया। 

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  • Web Title:political journey of Ravi Shankar Prasad : three times till now in Modi and Atal Bihari Government he has become Cabinet minister at Center