पूर्व मंत्री मंजू वर्मा 40000 वोटों से हारीं, RJD के राजवंशी महतो ने चेरिया बरियारपुर सीट जीती

हिन्दुस्तान टीम , पटना
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बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र में आने वाली चेरिया बरियारपुर विधानसभा सीट से मैदान में उतरीं पूर्व मंत्री मंजू वर्मा हार गई हैं। मुजफ्फपुर बालिका गृह कांड से चर्चा में आईं पूर्व मंत्री को राजद के राजवंशी...

पूर्व मंत्री मंजू वर्मा 40000 वोटों से हारीं, RJD के राजवंशी महतो ने चेरिया बरियारपुर सीट जीती

बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र में आने वाली चेरिया बरियारपुर विधानसभा सीट से मैदान में उतरीं पूर्व मंत्री मंजू वर्मा हार गई हैं। मुजफ्फपुर बालिका गृह कांड से चर्चा में आईं पूर्व मंत्री को राजद के राजवंशी महतो ने 40000 से भी ज्यादा वोटों से हराया। मंजू वर्मा पहले दौर से ही पीछे चल रही थीं। दोपहर एक बजे राजवंशी और मंजू वर्मा के वोटों में करीब तीन गुना का अंतर आ गया था। 

राजद के राजवंशी महतो को 68635 वोट मिले। मंजू वर्मा केवल 27738 वोट ही हासिल कर सकीं। एलजेपी की राखी देवी ने भी मंजू वर्मा का जबरदस्त पीछा किया। रेखा को 25437 वोट मिले। 

यहां दूसरे चरण में 3 नवंबर को रिकार्ड 60.45% मतदान हुआ था। मंजू वर्मा लगातार दो बार से जीत हासिल कर रही थीं। मंजू वर्मा ने 2015 में एनडीए प्रत्याशी लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के दिग्गज नेता और चेरिया बरियारपुर के पूर्व विधायक अनिल चौधरी को मात दी थी। उस समय राजद और जदयू साथ लड़े थे।

कुमारी मंजू वर्मा ने 2015 में 69,795 (50.4%) मतों से जीत हासिल की थी जबकि दूसरे स्थान पर रहे एलजेपी के अनिल चौधरी को 40,059 (28.9%) वोट मिले थे। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के मोहम्मद अब्दुल हफीज खान 8,092 (5.8%) मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे। 2010 के विधानसभा चुनावों में जेडीयू के टिकट पर कुमारी मंजू वर्मा ने एलजेपी के प्रत्याशी अनिल चौधरी को मात दी थी। मंजू वर्मा को 32,807 (28.7%) वोट मिले थे जबकि अनिल चौधरी को 31,746 (27.8%) वोट मिले थे। एलजेपी के अनिल चौधरी ने अक्टूबर 2005 में राजद की कुमारी साबित्री को मात दी थी जबकि फरवरी 2005 के चुनावों में उन्होंने राजद की उम्मीदवार राधा कृष्ण को हराया था।

इससे पहले, 2000 के चुनावों में आरजेडी के अशोक कुमार ने जदयू के अनिल चौधरी को शिकस्त दी थी. वहीं 1995 के चुनावों में जनता दल के राम जीवन सिंह ने कांग्रेस के सुखदेव महतो को पराजित किया था। 1990 चुनावों में सुखदेव महतो निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े, लेकिन उन्हें जनता दल के राम जीवन सिंह के हाथों हार का सामना करना पड़ा। 

कांग्रेस के हरिहर महतो ने सीपीआई के सुखदेव महतो को 1985 के विधानसभा चुनावों में हराया था. दिलचस्प बात ये है कि सुखदेव महतो 1980 के चुनावों में सीपीआई के टिकट पर चुनाव लड़े थे और कांग्रेस (आई) के प्रत्याशी हरिहर महतो को शिकस्त दी थी। हरिहर महतो 1977 के चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवार बने और जनता पार्टी के प्रत्याशी जुबैर आजमी जाफरी को हराया था।

हर घंटे बढ़ता रहा फासला

शाम 7.30 बजे

जदयू मंजू वर्मा 26781

राजद राजवंशी महतो 65771

एलजेपी राखी देवी 24464

शाम 5.55 बजे

जदयू मंजू वर्मा 22075

राजद राजवंशी महतो 52196

एलजेपी राखी देवी 15334

शाम 4.20 बजे

जदयू मंजू वर्मा 17397

राजद राजवंशी महतो 37122

एलजेपी राखी देवी 10972

शाम 3.30 बजे

जदयू मंजू वर्मा 13406

राजद राजवंशी महतो 29511

एलजेपी राखी देवी 9032

दोपहर 2 बजे

जदयू मंजू वर्मा 10580

राजद राजवंशी महतो 24791

एलजेपी राखी देवी 8168

दोपहर 1 बजे

जदयू मंजू वर्मा 5622

राजद राजवंशी महतो 16437

एलजेपी राखी देवी 3858 

दोपहर 12 बजे

जदयू मंजू वर्मा 4690

राजद राजवंशी महतो 13328

एलजेपी राखी देवी 3431 

सुबह 11 बजे

जदयू मंजू वर्मा 2800

राजद राजवंशी महतो 7852

एलजेपी राखी देवी 2130 

सुबह दस बजे

जदयू मंजू वर्मा 1958

राजद राजवंशी महतो 5417

एलजेपी राखी देवी 1510 

Dinesh Rathour

लेखक के बारे में

Dinesh Rathour

दिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका (डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।

पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी है।

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